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सऊदी अरब में हुए फ़ैशन शो पर भड़के इस्लामी स्कॉलर और कट्टरपंथी, क्या है मामला
- Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
- पदनाम, .
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
सऊदी अरब में पिछले दिनों हुआ एक फ़ैशन शो विवादों में घिर गया है. मौलवियों और कट्टरपंथियों ने इस विवादित फ़ैशन शो पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है.
इस फ़ैशन शो में पवित्र काबा जैसा दिखने वाला ग्लास दिखाया गया है.
सऊदी अरब में हर साल होने वाले 'रियाद सीज़न' नाम के सांस्कृतिक उत्सव में इस इंस्टॉलेशन पर मुख्यधारा के अरब मीडिया और सोशल मीडिया पर तीख़ी प्रतिक्रिया हुई है.
आलोचकों का कहना है कि यह इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल का अपमान है.
हालाँकि सऊदी अरब के सरकारी मीडिया ने इन आलोचनाओं को दरकिनार किया है. अफ़वाहों को रोकने के लिए काम करने वाली एक सऊदी संस्था ने ये भी कहा है कि फ़ैशन शो के दौरान दिखी चीज़ सिर्फ़ एक ग्लास क्यूब के आकार की संरचना थी.
हंगामा मचने के बाद सऊदी अरब में अफ़वाहों को रोकने के लिए बने प्राधिकरण (एंटी रयूमर अथॉरिटी) ने इस बात से साफ़ इनकार किया है कि शो के दौरान पवित्र काबा की आकृति का इस्तेमाल किया गया था.
प्राधिकरण ने कहा कि ये सिर्फ़ एक ग्लास क्यूब के आकार की संरचना थी, जिसका काबा से कोई लेना-देना नहीं था.
ये प्राधिकरण एक स्वतंत्र सऊदी मीडिया प्लेटफॉर्म है, जो ऑनलाइन अफवाहों को ट्रैक और वेरिफ़ाई करता है.
लेकिन आलोचनाओं पर सरकारी मीडिया के नज़रिए के बावजूद कई कट्टरपंथी इस्लामी हस्तियों ने इस घटना पर टिप्पणी की. इन लोगों ने इसे इस्लाम का अपमान बताया है.
कुछ टिप्पणीकारों ने इससे भी आगे बढ़कर कहा कि इस "विकृत" प्रदर्शन में शैतानी काम है.
सरकारी मीडिया ने इस आलोचना को मुस्लिम ब्रदरहुड के नेतृत्व में देश को बदनाम करने की कोशिश कहा है और इसे ख़ारिज कर दिया है.
क्राउन प्रिंस पर निशाना
इंटरनेट पर टेलिग्राम और फ़ेसबुक के ज़रिए इस इवेंट की तस्वीरें और वीडियो शेयर किए जा रहे हैं.
कनाडा में रहने वाले इस्लामी लेखक तारिक़ अब्द अल-हलीम टेलिग्राम पर हिदायत अल्सारी के नाम से पोस्ट करते हैं.
उन्होंने पोस्ट किया, "अरब प्रायद्वीप में बहुदेववाद एक आधिकारिक धर्म के रूप में लौट आया है."
अल-हलीम जो लिख रहे हैं वो काबा जैसे दिखने वाले डिसप्ले के इर्द-गिर्द फ़ैशन शो के बारे में की गई टिप्पणियों को दर्शाता है.
कुछ लोगों ने इसकी तुलना 'बुतपरस्त प्रथाओं' से की है.
'शैतानी प्रवृतियाँ'
मोरोक्को के इस्लामी धर्मगुरू अल-हसन बिन अली अल -कित्तानी ने कहा है कि ये घटना भ्रष्टाचार और मूल्यों की गिरावट का संकेत है.
कित्तानी ने लिखा कि अधिककर स्कॉलर इस घटना पर ख़ामोश हैं और चंद 'सच की आवाज़ें' ही इसपर आवाज़ उठा रही हैं.
कई टिप्पणीकारों ने इस फ़ैशन शो का इस्तेमाल अरसे से जिहादियों और कई कट्टरपंथियों के दुश्मन रहे सऊदी अरब के सत्तारूढ़ परिवार की आलोचना करने के लिए किया है.
सीरिया स्थित विचारक अब्देल रहमान अल-इदरीसी ने तर्क दिया कि मॉडलों का काबा जैसी संरचना के आसपास नृत्य वास्तव में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के आदेश पर हुआ है.
फ़ेसबुक पर इस्लामिक स्टेट (आईएस) के एक समर्थक ने क्राउन प्रिंस को एक "अनैतिक व्यभिचारी" तक बताया, जिसने इस्लाम के साथ विश्वासघात किया है.
कथित इस्लामिक स्टेट के समर्थकों का लक्ष्य अक्सर सऊदी अरब और अन्य अरब देशों पर निशाना साधना होता है.
इस विचारधारा के लोग इन देशों को इसराइल और पश्चिमी हितों की "रक्षा" करने वालों के रूप में देखते हैं.
क्या है रियाद सीज़न?
रियाद सीज़न, सऊदी अरब में आयोजित मनोरंजन, सांस्कृतिक और खेल आयोजनों का एक वार्षिक इवेंट है.
रियाद सीज़न 2024 के तहत लेबनान के डिज़ाइनर एली साब ने फ़ैशन शो किया था.
इसी शो पर अरब के सोशल मीडिया यूज़र्स ने कई आपत्तियां दर्ज की हैं.
स्टेज पर हुए डिसप्ले के अलावा कई लोग ग़ज़ा पट्टी और लेबनान में युद्ध के बीच हुए फ़ैशन शो की काफ़ी आलोचना कर रहे हैं.
लंदन से छपने वाले अरबी अख़बार राय अल-यूम की एक रिपोर्ट के अनुसार, रियाद सीज़न के डिजाइनर और आयोजकों पर क्षेत्र में चल रहे युद्ध की अनदेखी करने का आरोप लग रहा है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक यूज़र ने लिखा है कि ग़ज़ा में जनसंहार के बीच सऊदी अरब ने डांसरों और सिंगरों को बुलाया है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित