आप इस वेबसाइट का टेक्स्ट-ओनली वर्शन देख रहे हैं जो कम डेटा खर्च करता है. सभी तस्वीरों और वीडियो के साथ वेबसाइट का मुख्य वर्शन देखें.
'रामायण': रिलीज़ से पहले किन विवादों से गुज़री रणबीर कपूर और साई पल्लवी की फ़िल्म?
निर्देशक नितेश तिवारी की फ़िल्म 'रामायण' गुरुवार पांच नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज़ हो रहा है. इसका नाम 'रामायण: राइज़ ऑफ़ अ लेजेंड' है.
फ़िल्म में रणबीर कपूर राम, साई पल्लवी सीता और यश रावण के किरदार में हैं. सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण बने हैं.
निर्माता कंपनी प्राइम फ़ोकस स्टूडियोज़ के मुताबिक़, फ़िल्म हिंदी समेत छह भाषाओं में रिलीज़ हो रही है. इसका प्रीमियर 27 अक्तूबर को लॉस एंजिलिस के एकेडमी म्यूज़ियम ऑफ़ मोशन पिक्चर्स में हुआ था.
लेकिन पर्दे तक पहुंचने से पहले फ़िल्म को लेकर कई तरह के सवाल और विवाद सामने आए.
कुछ सवाल फ़िल्म के संगीत, कपड़ों और कंप्यूटर से बनाए गए दृश्यों को लेकर थे. कुछ आपत्तियां कलाकारों के पुराने बयानों और पिछली फ़िल्मों से जुड़ी थीं. वहीं फ़िल्म की स्क्रिप्ट और दूसरी सामग्री के अधिकारों का मामला अदालत तक पहुंचा. तारीख़ों के हिसाब से जानते हैं कि 'रामायण' को लेकर कब क्या हुआ और संबंधित लोगों ने क्या जवाब दिया.
1. तीन नवंबर 2026: अधिकारों के समझौते पर बॉम्बे हाई कोर्ट का आदेश
रिलीज़ से तीन दिन पहले, दो नवंबर को बॉम्बे हाई कोर्ट ने 'रामायण' को बिना अनुमति रिकॉर्ड करने और इंटरनेट पर दिखाने से रोकने के लिए अंतरिम आदेश दिया.
क़ानूनी ख़बरों की वेबसाइट बार एंड बेंच के मुताबिक़, यह आदेश गॉडपावर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर दिया गया. कंपनी ने फ़िल्म के अधिकार हासिल किए हैं.
मई 2024 में अल्लू मंटेना मीडिया वेंचर्स एलएलपी ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया था.
कंपनी ने उस समय दावा किया था कि फ़िल्म की स्क्रिप्ट और दूसरी सामग्री के अधिकार उसके पास हैं. उसका कहना था कि तय भुगतान नहीं होने के कारण प्राइम फ़ोकस टेक्नोलॉजीज़ को अधिकार देने वाला समझौता लागू नहीं हुआ था.
लेकिन तीन नवंबर 2026 के बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश में दर्ज है कि 19 अप्रैल 2024 के समझौते के तहत प्राइम फ़ोकस टेक्नोलॉजीज़ ने 'प्रोजेक्ट रामायण' के अधिकार अल्लू मंटेना मीडिया वेंचर्स से हासिल किए थे.
यह आदेश फ़ैंटम स्टूडियोज़ की एक अलग याचिका पर आया.
समझौते की एक शर्त के तहत फ़ैंटम समेत इससे जुड़े पक्षों पर दिवाली 2027 तक राम, सीता, लक्ष्मण, रावण या हनुमान को मुख्य किरदार बनाकर फ़िल्म या कोई दूसरा काम तैयार करने की रोक थी.
फ़ैंटम ने इस शर्त से अंतरिम राहत मांगी थी, लेकिन अदालत ने उसका अनुरोध ठुकरा दिया.
अदालत ने कहा कि फ़ैंटम ने कोई ऐसा लिखित समझौता पेश नहीं किया, जिससे यह साबित हो कि उसे इस शर्त से मुक्त कर दिया गया था. हालांकि अदालत ने पक्षों के दूसरे दावों और तर्कों को मध्यस्थता की कार्यवाही के लिए खुला रखा है.
इसलिए मई 2024 के सार्वजनिक नोटिस में किया गया दावा उस समय एक पक्ष की बात थी. उसे फ़िल्म के अधिकारों की मौजूदा स्थिति नहीं माना जा सकता.
2. दो नवंबर 2026: पाइरेसी से बचाने के लिए अदालत का आदेश
रिलीज़ से तीन दिन पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने फ़िल्म को बिना अनुमति रिकॉर्ड करने, अपलोड करने या इंटरनेट पर दिखाने से रोकने के लिए अंतरिम आदेश दिया.
यह फ़िल्म के ख़िलाफ़ कोई विवाद नहीं था. निर्माताओं से जुड़ी कंपनी ने फ़िल्म को पाइरेसी से बचाने के लिए अदालत से सुरक्षा मांगी थी.
गॉडपावर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड ने अदालत में दावा किया कि उसके पास फ़िल्म के कॉपीराइट और उसके इस्तेमाल से जुड़े अधिकार हैं.
कंपनी ने अदालत को बताया कि ख़ास कार्यक्रमों में दिखाए गए फ़िल्म के ट्रेलर के कुछ हिस्से पहले ही बिना अनुमति रिकॉर्ड करके इंटरनेट पर डाले जा चुके थे.
आदेश के तहत इंटरनेट सेवा देने वाली कंपनियों और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म को ऐसे लिंक की जानकारी मिलने पर उन्हें हटाने या उन तक पहुंच रोकने के लिए कहा गया.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़ सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से अदालत को बताया गया कि फ़िल्म के पहले भाग पर क़रीब 2,000 करोड़ रुपये और दोनों भागों पर कुल क़रीब 4,000 करोड़ रुपये ख़र्च होने का अनुमान है.
3. 25 अक्तूबर 2026: 'मंगल रंग' की धुन पर उठे सवाल
रिलीज़ से कुछ दिन पहले फ़िल्म का गाना 'मंगल रंग' आया.
एआर रहमान के बनाए इस गाने के हिंदी संस्करण को अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल ने आवाज़ दी है. फ़िल्म के संगीत से रहमान और हैंस ज़िमर जुड़े हैं.
सोशल मीडिया के कुछ यूज़र्स ने गाने की धुन को क़व्वाली जैसा बताया. कुछ लोगों ने सवाल किया कि यह संगीत राम और सीता की कहानी पर बनी फ़िल्म में कितना ठीक बैठता है?
कुछ लोगों ने इसकी तुलना रहमान के पुराने गानों से भी की.
हालांकि 'मंगल रंग' को क़व्वाली बताना इन श्रोताओं की राय थी. इससे गाने की संगीत शैली को लेकर कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं निकलता.
फ़िल्म के संगीत को लेकर हो रही व्यापक आलोचना के बीच रहमान की प्रतिक्रिया भी सामने आई.
उन्होंने कहा कि वह 'रॉकस्टार' और 'स्लमडॉग मिलियनेयर' जैसी अपनी पुरानी कामयाबी के सहारे नहीं बैठे रह सकते. उनकी यह टिप्पणी केवल 'मंगल रंग' को क़व्वाली बताए जाने के सीधे जवाब में नहीं थी.
बीबीसी में प्रकाशित 16 जनवरी 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक एआर रहमान ने माना था कि बीते आठ सालों में उन्हें बॉलीवुड में काम मिलना बंद हो गया है. ये इंटरव्यू ख़ुद एआर रहमान ने बीबीसी को दिया था.
4. 20 और 21 अक्तूबर 2026: रणबीर ने 'जीत' की जगह 'अंत' कहा
20 अक्तूबर को कोलकाता में दशहरे से जुड़े एक कार्यक्रम में रणबीर कपूर अच्छाई और सच्चाई की जीत की बात कर रहे थे.
लेकिन बोलते समय उनके मुंह से 'जीत' की जगह 'अंत' निकल गया. इससे वाक्य का अर्थ उलट गया.
इसका वीडियो सोशल मीडिया पर साझा हुआ और रणबीर की आलोचना होने लगी.
अगले दिन चेन्नई में फ़िल्म के एक कार्यक्रम के दौरान रणबीर ने अपनी बात स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि उनकी ज़ुबान फिसल गई थी और इसके लिए उन्होंने माफ़ी मांगी.
यह विवाद फ़िल्म की कहानी या उसके किसी दृश्य से जुड़ा नहीं था. यह प्रचार के दौरान हुई बोलने की एक ग़लती से पैदा हुआ था. द इंडियन एक्सप्रेस ने उनके पुराने बयान और जब उन्होंने माफ़ी मांगी उसके बारे में विस्तार से लिखा था.
5. आठ सितंबर 2026: शिव सागर ने रणबीर की कास्टिंग पर सवाल उठाया
रामानंद सागर के पोते शिव सागर ने रणबीर कपूर को राम के किरदार में लिए जाने पर आपत्ति जताई.
रामानंद सागर का धारावाहिक 'रामायण' 1987 में दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ था. उसमें अरुण गोविल ने राम की भूमिका निभाई थी.
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में शिव सागर ने कहा कि 'एनिमल' देखने के बाद वह व्यक्तिगत रूप से रणबीर को राम के रूप में स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं.
उनका कहना था कि राम की भूमिका के लिए किसी नए चेहरे को चुना जा सकता था.
हालांकि उन्होंने रणबीर को अच्छा अभिनेता भी बताया और फ़िल्म के दूसरे कलाकारों के चुनाव की तारीफ़ की.
शिव सागर की आपत्ति रणबीर के पिछले किरदार की छवि पर आधारित थी.
6. चार अगस्त 2026: सीता और कैकेयी के कपड़ों पर आलोचना
30 जुलाई को फ़िल्म का आधिकारिक ट्रेलर आने के बाद सोशल मीडिया के कुछ यूज़र्स ने किरदारों के कपड़ों और सजावट पर सवाल उठाए.
ख़ास तौर पर साई पल्लवी की सीता और लारा दत्ता की कैकेयी के रूप की आलोचना हुई.
इसके बाद फ़िल्म के कपड़े डिज़ाइन करने वाले रिंपल और हरप्रीत नरूला ने बताया कि उन्होंने ये चुनाव किस आधार पर किए.
रिंपल ने कहा कि सीता की कल्पना करते समय उनका उद्देश्य उस दौर के कपड़ों को ऐतिहासिक रूप से हूबहू दोहराना नहीं था. उन्होंने आस्था और देवी की उस छवि को आधार बनाया, जो उनके मन में बसी हुई है.
डिज़ाइनरों ने मंदिरों, कैलेंडर के चित्रों और दूसरी परिचित कलाकृतियों से प्रेरणा लेने की बात भी कही.
उन्होंने कैकेयी के कपड़ों में इस्तेमाल हुए हरे और गहरे लाल रंग को उनके किरदार के अलग-अलग पहलुओं से जोड़कर समझाया.
इस मामले में एक तरफ़ सोशल मीडिया के कुछ यूज़र्स की अपेक्षाएं थीं. दूसरी ओर डिज़ाइनरों का कहना था कि कपड़ों से जुड़े उनके फ़ैसले सोच-समझकर और अपनी रचनात्मक कल्पना के आधार पर किए गए थे.
7. दो अगस्त 2026: रामलीला महासंघ ने फ़िल्म पहले दिखाने की मांग की
दिल्ली के श्री रामलीला महासंघ ने निर्माताओं से फ़िल्म की रिलीज़ से पहले एक ख़ास स्क्रीनिंग की मांग की.
महासंघ के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने निर्देशक नितेश तिवारी और प्रोडक्शन कंपनी को चिट्ठी लिखी.
उन्होंने कहा कि महासंघ के प्रतिनिधियों को फ़िल्म पहले दिखाई जानी चाहिए, ताकि वे देख सकें कि उसमें ऐसा कुछ तो नहीं है जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हों.
महासंघ ने मांग पूरी न होने पर प्रदर्शन करने की चेतावनी भी दी.
चिट्ठी में फ़िल्म 'आदिपुरुष' को लेकर हुए विवाद का उदाहरण दिया गया था.
हालांकि यह फ़िल्म पहले दिखाने की मांग थी. इससे यह साबित नहीं होता कि 'रामायण' में कोई आपत्तिजनक दृश्य था.
महासंघ के लिए बाद में ऐसी स्क्रीनिंग हुई या नहीं, इसकी पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है.
8. दो और सात अप्रैल 2026: वीएफ़एक्स पर आलोचना, निर्माता ने दिया जवाब
दो अप्रैल को फ़िल्म की एक झलक सामने आने के बाद उसके वीएफ़एक्स, यानी कंप्यूटर की मदद से तैयार किए गए दृश्यों पर सवाल उठे.
सोशल मीडिया के कुछ यूज़र्स ने दृश्यों की बनावट और किरदारों के रूप की आलोचना की. कुछ लोगों ने यह भी कहा कि उन्हें कुछ दृश्य एआई से बने हुए लगते हैं.
सात अप्रैल को निर्माता नमित मल्होत्रा ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी.
उन्होंने कहा कि फ़िल्म की टीम लोगों की बात ध्यान से सुन रही है और लगातार काम कर रही है. उन्होंने उस समय दिखाए गए दृश्यों को केवल शुरुआत बताया.
अभिनेता ऋतिक रोशन ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि वीएफ़एक्स पर बात करते समय केवल यह नहीं पूछना चाहिए कि कोई दृश्य असली लग रहा है या नहीं. उसकी शैली और मक़सद को भी समझना चाहिए.
हालांकि किसी दर्शक को कोई दृश्य एआई से बना हुआ लगना, उसके वास्तव में एआई से तैयार किए जाने का प्रमाण नहीं है.
इसी तरह नमित मल्होत्रा की प्रतिक्रिया को इस रूप में नहीं देखा जा सकता कि उन्होंने वीएफ़एक्स से जुड़ी हर आलोचना को सही मान लिया था.
9. अक्तूबर 2024: साई पल्लवी की सेना वाली पुरानी क्लिप सामने आई
अक्तूबर 2024 में साई पल्लवी के जनवरी 2022 के एक इंटरव्यू का छोटा हिस्सा सोशल मीडिया पर साझा हुआ.
इसमें वह भारत और पाकिस्तान में सेना तथा हिंसा को देखने के अलग-अलग नज़रिए की बात कर रही थीं.
उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान में कुछ लोग भारतीय सेना को जिस नज़र से देखते हैं, भारत में लोग पाकिस्तानी सेना को उसी तरह देखते हैं.
उनका व्यापक तर्क ये था कि संघर्ष को देखने का नज़रिया दोनों ओर अलग होता है और वह हिंसा को नहीं समझ पातीं.
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि साई पल्लवी ने अपनी तरफ़ से भारतीय सेना को 'आतंकवादी' कहा था.
द न्यूज़ मिनट ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि सोशल मीडिया पर साझा किया गया वीडियो उनके लंबे इंटरव्यू से काटा गया हिस्सा था.
10. सितंबर 2022: रणबीर के महाकाल मंदिर जाने का विरोध
रणबीर कपूर की कास्टिंग पर उठने वाले कुछ सवालों की जड़ फ़िल्म से कई साल पुरानी है.
सितंबर 2022 में 'ब्रह्मास्त्र' के प्रचार के दौरान रणबीर कपूर और आलिया भट्ट उज्जैन के महाकाल मंदिर पहुंचे थे.
वहां बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने रणबीर के पुराने बीफ़ वाले बयान का हवाला देते हुए उनके मंदिर में प्रवेश का विरोध किया. इसके बाद रणबीर और आलिया मंदिर में दर्शन नहीं कर सके.
यह घटना 'रामायण' से जुड़ी नहीं थी. लेकिन बाद में रणबीर को राम के किरदार में लिए जाने पर उनका वही पुराना बयान दोबारा चर्चा में आया.
11. जून 2022: कश्मीरी पंडितों और भीड़ की हिंसा पर साई पल्लवी का बयान
जून 2022 में फ़िल्म 'विराट पर्वम' के प्रचार के दौरान साई पल्लवी ने कश्मीरी पंडितों के साथ हुई हिंसा और गाय ले जाने के शक में एक मुस्लिम व्यक्ति की भीड़ के हाथों हत्या का उदाहरण दिया था.
उनकी टिप्पणी पर आपत्ति हुई और आरोप लगा कि उन्होंने दोनों घटनाओं की तुलना की है.
इसके बाद साई पल्लवी ने एक वीडियो जारी करके सफ़ाई दी.
उन्होंने कहा कि उनकी बात संदर्भ से अलग करके पेश की गई. उनका उद्देश्य कश्मीरी पंडितों के साथ हुई त्रासदी को छोटा बताना नहीं था.
उन्होंने कहा कि वह कश्मीरी पंडितों की तकलीफ़ से परेशान हुई थीं. साथ ही भीड़ की हिंसा की घटना ने भी उन्हें झकझोर दिया था.
साई पल्लवी ने कहा कि किसी भी तरह की हिंसा ग़लत है और धर्म के नाम पर हिंसा बहुत बड़ा पाप है. इसके साथ ही फ़िल्म में उन्हें चुने जाने को लेकर भी विवाद हुआ.
बीबीसी हिंदी में प्रकाशित 29 अक्टूबर के आर्टिकल के मुताबिक कुछ लोगों ने टिप्पणी की थी कि साई पल्लवी सीता की भूमिका के लिए सही चॉइस नहीं हैं. कुछ लोगों का कहना है कि रामायण पर आधारित धारावाहिकों और फ़िल्मों में अभिनय कर चुकी अभिनेत्रियां इस भूमिका के लिए ज़्यादा उपयुक्त होतीं.
12. साल 2011: रणबीर का पुराना बयान
साल 2011 में खाने-पीने पर आधारित एक कार्यक्रम में रणबीर कपूर ने कुणाल विजयकर से अपनी पसंद के बारे में बात की थी.
उन्होंने कहा था कि उनका परिवार पेशावर से आया है और उन्हें मटन, पाया और बीफ़ पसंद है.
उस समय यह बयान किसी बड़े विवाद में नहीं आया. लेकिन बाद के वर्षों में इसका छोटा हिस्सा बार-बार सोशल मीडिया पर साझा किया गया.
कुणाल विजयकर ने भी बाद में उस इंटरव्यू को याद करते हुए कहा था कि पूरी बातचीत में से रणबीर की एक लाइन को सोशल मीडिया ने उठा लिया था.
रणबीर को राम की भूमिका में लिए जाने के बाद इसी पुराने बयान को उनकी कास्टिंग से जोड़कर देखा गया.
फ़िल्म से जुड़े विवादों को तारीख़ के हिसाब से देखने पर उनके बीच का फ़र्क़ भी साफ़ होता है.
कपड़ों, संगीत और वीएफ़एक्स पर उठे सवाल फ़िल्म में दिखाई गई चीज़ों से जुड़े थे. रणबीर कपूर और साई पल्लवी को लेकर हुई आलोचना का बड़ा हिस्सा उनके पुराने बयानों और कामों पर आधारित था.
वहीं फ़िल्म के अधिकारों का मामला एक कारोबारी समझौते से जुड़ा था. पाइरेसी वाला आदेश फ़िल्म के ख़िलाफ़ नहीं, बल्कि उसे बिना अनुमति रिकॉर्ड और प्रसारित किए जाने से बचाने के लिए था.
इन मामलों में कई संबंधित लोगों ने अपनी बात रखी या सफ़ाई दी है. कुछ प्रतिक्रियाएं केवल सोशल मीडिया के कुछ यूज़र्स या व्यक्तियों की राय थीं, जिन्हें पूरी दर्शक संख्या की राय नहीं माना जा सकता.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह
कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.