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दक्षिण अफ़्रीका: शी जिनपिंग मुड़-मुड़ कर देखते रहे और उनके सहयोगी को रोक दरवाज़ा बंद कर दिया
ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में शिरकत करने दक्षिण अफ़्रीका के जोहानिसबर्ग गए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग दो दिन में लगातार दूसरी बार विवादों में रहे.
बुधवार को जब जिनपिंग सम्मेलन के लिए समिट वेन्यू की तरफ़ जा रहे थे, उस वक़्त उनके एक सहयोगी साथ में थे. जिनपिंग के दरवाज़े के भीतर जाने के बाद सुरक्षा अधिकारियों ने उनके सहयोगी को दरवाज़े पर ही रोक लिया और फिर दरवाज़ा बंद कर दिया.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स का कहना है कि शी जिनपिंग के भीतर जाने के बाद सुरक्षा अधिकारियों ने दरवाज़ों को बंद कर दिया, जिसके बाद जिनपिंग बार-बार पीछे मुड़ कर दरवाज़े की तरफ देख रहे थे.
पूरे वाक़ये का सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल हो रहा है.
चीनी अधिकारियों ने अब तक इस घटना पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
इससे एक दिन पहले दक्षिण अफ़्रीका पहुंचे शी जिनपिंग ने एक कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया था और कार्यक्रम में उनका भाषण उनके एक प्रतिनिधि ने पढ़ा था.
वीडियो में क्या है?
बीबीसी चीनी सेवा ने घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है, जिसमें देखा जा सकता है कि शी जिनपिंग कॉरिडोर में चलते हुए वेन्यू की तरफ़ बढ़ रहे हैं.
जैसे ही वो सभागार में प्रवेश करते हैं, उनके पीछे आ रहे एक व्यक्ति को (जिनके हाथों में एक ब्रीफ़केस है) सुरक्षा अधिकारी रोक लेते हैं. व्यक्ति को जबरन रोक कर सुरक्षा अधिकारी दरवाज़ा बंद करते हैं. वीडियो में ऐसा लगता है कि दरवाज़े के पास व्यक्ति के साथ धक्का-मुक्की हो रही है.
रूसी सरकार नियंत्रित टेलीविज़न चैनल आरटी ने लिखा है कि दक्षिण अफ्रीका की प्रोटोकॉल टीम ने जिनपिंग के सभागार में प्रवेश करने के बाद दरवाज़े बंद करने की कोशिश की.
रेड कार्पेट पर चल कर भीतर आ रहे जिनपिंग थोड़ा कन्फ्यूज़्ड दिखते हैं और कई बार मुड़कर पीछे देखते हैं.
सभागार के भीतर शी जिनपिंग का इंतज़ार कर रहे दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा उनका स्वागत करते हैं और उन्हें मंच तक लेकर जाते हैं.
जब जिनपिंग का भाषण उनके प्रतिनिधि ने पढ़ा
22 से 24 अगस्त तक जोहानिसबर्ग में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन में मुख्य एजेंडा इस संगठन में और सहयोगियों को शामिल करना है.
अब तक 40 से अधिक देश ब्रिक्स में शामिल होने की इच्छा जता चुके हैं और 23 देश औपचारिक तौर पर इसके लिए आवेदन भी कर चुके हैं.
समूह के संस्थापक सदस्यों, यानी ब्राज़ील, भारत, चीन, दक्षिण अफ़्रीका और रूस के राष्ट्राध्यक्षों ने इसमें शिरकत की.
हालांकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय क्रीमिनल कोर्ट का वॉरंट होने के कारण वो जोहानिसबर्ग नहीं गए, बल्कि वीडियो लिंक के ज़रिए उन्होंने सम्मेलन में शिरकत की.
वहीं शी जिनपिंग सोमवार शाम को जोहानिसबर्ग पहुंच गए थे लेकिन मंगलवार को आयोजित बिज़नेस फ़ोरम की एक बैठक में वो शामिल नहीं हो पाए थे. कार्यक्रम में उन्हें संबोधन देना था, लेकिन उनकी जगह उनका भाषण चीन के वाणिज्य मंत्री वांग वेन्ताओ ने पढ़ा था.
इसके बाद शाम को दक्षिण अफ़्रीकी राष्ट्रपति की तरफ से आयोजित किए गए डिनर में वो शामिल हुए. हालांकि दिन के दौरान कार्यक्रम में शामिल न होने को लेकर उनकी तरफ से कोई जानकारी नहीं दी गई.
द गार्डियन लिखता है कि ये आख़िरी घड़ी में लिया गया फ़ैसला हो सकता है क्योंकि चीन के विदेश मंत्रियों के प्रवक्ताओं और सरकारी मीडिया में जो पोस्ट छापे गए उनमें जिनपिंग के खुद भाषण देने की बात कही गई.
इस साल शी जिनपिंग का ये दूसरा अंतरराष्ट्रीय दौरा है. इससे पहले मार्च में उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाक़ात के लिए मॉस्को का दौरा किया था.
चीन ब्रिक्स देशों के समूह को जी7 और जी-20 देशों के पश्चिमी देशों के समूहों के विकल्प के तौर पर खड़ा करना चाहता है, लेकिन इसे लेकर समूह में मतभेद हैं.
द गार्डियन लिखता है कि ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा ने मंगलवार को कहा कि पश्चिमी मुल्कों के साथ प्रतिद्वंदिता करना समूह का उद्देश्य नहीं है. वहीं चीन से साथ सीमा विवाद को लेकर जारी तनाव के बीच भारत नहीं चाहता कि ब्रिक्स के रास्ते चीन अपनी स्थिति और मज़बूत करे.
सोशल मीडिया पर कई लोग इस वीडियो को शायर कर रहे हैं और इस पर प्रतिक्रिया करते हैं.
अफ़्रीकन ब्लॉगर नाम के एक हैंडल ने सोशल मीडिया साइट एक्स (ट्विटर) पर लिखा कि दक्षिण अफ़्रीका के सुरक्षा अधिकारियों ने शी जिनपिंग के गार्ड को जबरन रोक लिया.
एंटोनी नाम के एक सोशल मीडिया यूज़र ने लिखा कि जिस व्यक्ति को जबरन दरवाज़े के बाहर रोका गया वो चीनी राष्ट्रपति के ट्रांसलेटर थे.
पॉलिटिकल वॉयस नाम के एक सोशल मीडिया हैंडल ने भी इस घटना का वीडियो शेयर किया है. राजतरंगिनी नाम के एक हैंडल ने इसे चीन के लिए शर्मिंंदगी की घटना कहा है.
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