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अमेरिका‑ईरान शांति समझौता कितना टिकाऊ? वार्ताकारों की 5 बड़ी चुनौतियां
- Author, पॉल एडम्स
- पदनाम, कूटनीतिक संवाददाता, बीबीसी न्यूज़
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 9 मिनट
अपनी निर्धारित समय सीमा से कुछ ही मिनट पहले, और ईरान की "सभ्यता" को नष्ट करने की अभूतपूर्व धमकी के साथ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि युद्ध को रोकने के लिए दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बन गई है.
मध्यस्थ पाकिस्तान शनिवार से शुरू होने वाली बातचीत के लिए इस्लामाबाद में अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों की मेजबानी कर रहा है. बातचीत की बुनियाद से लेकर कई मुद्दे अभी अनसुलझे हैं.
ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका को ईरान से 10 सूत्रीय प्रस्ताव मिला है, जिसे उन्होंने "बातचीत के लिए एक व्यवहारिक आधार" बताया.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने भी अमेरिका के 15 सूत्री प्रस्ताव का जिक्र किया. जिसके मुताबिक ट्रंप के शीर्ष वार्ताकारों का मानना है कि इससे संघर्ष समाप्त हो सकता है.
दोनों में से कोई भी प्रस्ताव औपचारिक रूप से पेश नहीं किया गया. हालांकि दोनों प्रस्ताव लीक होकर पब्लिश हो चुके हैं. ये दोनों पक्षों की उम्मीदों के संदर्भ में काफी अलग हैं.
इस भ्रम को और बढ़ाते हुए व्हाइट हाउस का यह कहना है कि मीडिया में जिस ईरानी योजना की चर्चा हो रही है, वह वो नहीं है जो अमेरिकी अधिकारियों को मिला है.
संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति के वरिष्ठ राजनयिक सलाहकार अनवर गर्गश ने बीबीसी को बताया, "कई विवरण पूरी तरह से साफ़ नहीं हैं."
"ईरान, अमेरिका और पाकिस्तानी मध्यस्थ की ओर से विरोधाभासी बयान आ रहे हैं. इसलिए, हमें इन बयानों के विवरणों में सामंजस्य स्थापित करने और यह समझने की ज़रूरत है कि आगे बढ़ने का सही तरीका क्या है."
इस मामले में मुख्य मुद्दे क्या हैं?
1. ईरानी परमाणु कार्यक्रम
अमेरिका ने हमेशा ईरान पर परमाणु हथियार के डेवलपमेंट में तेजी लाने का आरोप लगाया है और इसे युद्ध की मुख्य वजह बताया है. हालांकि ईरान ने बार-बार इसका खंडन किया है.
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि पिछले साल 12 दिन तल चले युद्ध और वर्तमान अमेरिकी और इसराइली सैन्य हमलों के कारण हुए नुकसान से ईरान को एक ऐसा परमाणु कार्यक्रम फिर से बनाने में लंबा समय लगेगा जो ख़तरा पैदा कर सके.
हालांकि, ईरान के पास मौजूद लगभग 440 किलोग्राम अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भविष्य को लेकर संदेह बना हुआ है.
माना जाता है कि ये यूरेनियम पिछले साल ईरान के इस्फ़हान स्थित परमाणु अनुसंधान और प्रौद्योगिकी केंद्र पर हुए हमलों के बाद उसके मलबे के नीचे दबा हुआ है.
अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने बुधवार को पत्रकारों से कहा, "इसे गहराई में दबाकर 24 घंटे इसकी सुरक्षा की जाती है."
"ईरान के पास कोई परमाणु हथियार नहीं होंगे. बस, बात यहीं खत्म."
ईरान का दावा है कि भविष्य में होने वाले किसी भी समझौते में परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) की शर्तों के तहत नागरिक इस्तेमाल के लिए यूरेनियम संवर्धन के उसके अधिकार को स्वीकार किया जाना चाहिए.
ओमान, जो युद्ध शुरू होने से ठीक पहले दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कर रहा था, ने कहा कि एक व्यवहार्य समझौता विचाराधीन था.
लेकिन सवाल ये है कि अमेरिका यूरेनियम एनरिचमेंट के किसी भी रूप की अनुमति देने पर सहमत होगा?
रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप की 15 सूत्री योजना में कई प्रमुख मांगें शामिल थीं.
जैसे, ईरान अपने सभी प्रमुख परमाणु संयंत्रों को नष्ट करे.ईरानी धरती पर यूरेनियम एनरिचमेंट बंद करे. एनरिच्ड यूरेनियम के अपने भंडार को देश से बाहर ले जाए और व्यापक अंतरराष्ट्रीय निरीक्षणों को स्वीकार करे.
लेकिन जब इस बारे में सीधे तौर पर पूछा गया, तो पीट हेगसेथ ने बस इतना कहा कि ईरान के पास "कभी भी परमाणु हथियार नहीं होगा और न ही उसे विकसित करने की क्षमता होगी."
उनका बयान थोड़ा अलग है.
2. ईरान की मिसाइलें और ड्रोन
इस मामले में भी 15 सूत्री योजना काफी सख़्त है.
ईरान बैलिस्टिक मिसाइल नहीं बनाएगा. उसे लंबी दूरी की मिसाइलों का उत्पादन रोकना होगा और मध्य पूर्व में अपने प्रॉक्सी और सहयोगियों को ड्रोन और सैन्य निर्यात बंद करना होगा.
अमेरिका से युद्ध के दौरान ईरान के उन्नत मिसाइल कार्यक्रम ने देश को एक सुरक्षा कवच प्रदान किया, जिसके तहत उसका परमाणु कार्यक्रम जारी रह सकता था.
पेंटागन का मानना है कि उस सुरक्षा कवच का ज़्यादातर हिस्सा अब नष्ट हो चुका है.
अमेरिकी जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन का कहना है कि ईरान की 80 फीसदी मिसाइल फैसिलिटीज को नष्ट कर दिया गया है.
साथ ही उसके 80 फीसदी एयर डिफ़ेंस सिस्टम और 90 फीसदी हथियार कारखानों को भी नष्ट कर दिया गया है.
ईरान ने इससे पहले अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम की सीमाओं पर चर्चा करने से इनकार कर दिया था.
लेकिन अब हालात बदल गए हैं. यह देखना बाकी है कि क्या ईरान, अमेरिका के साथ दीर्घकालिक समझौते के हिस्से के रूप में मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रमों पर प्रतिबंध स्वीकार करने को तैयार है या नहीं.
3. होर्मुज़ स्ट्रेट
इस्लामिक गणराज्य के शासन के अस्तित्व के अलावा, ईरान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक से गुजरने वाले जहाजों के यातायात को नियंत्रित करने की उसकी क्षमता रही है.
ईरान की होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने की साफ़ इच्छा से संकेत मिलता है कि पिछले महीने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले कुछ दबाव कम होने शुरू हो सकते हैं.
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची का कहना है कि ईरानी सशस्त्र बलों के समन्वय से और उनके शब्दों में, तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए, अगले दो हफ्तों के भीतर सुरक्षित मार्ग संभव हो जाएगा.
युद्ध की शुरुआत से ही ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए नियम लागू करने का इरादा जाहिर किया है.
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कि ईरान की योजना में प्रति जहाज 20 लाख अमेरिकी डॉलर तक का शुल्क वसूलने का अधिकार शामिल है.
जिसका राजस्व ईरान और ओमान के बीच विभाजित किया जाएगा, ये दोनों देश होर्मुज़ स्ट्रेट से सटे हुए हैं.
फारस की खाड़ी के उन देशों के लिए, जो अपने मूल्यवान हाइड्रोकार्बन को होर्मुज स्ट्रेट से जाते हैं, ये बात अस्वीकार्य है.
अनवर गर्गश ने बीबीसी को बताया, "यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है."
उन्होंने इसे दुनिया भर के अन्य महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थानों के लिए एक ख़तरनाक मिसाल बताया.
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह बेहद खतरनाक होने वाला है. मुझे नहीं लगता कि यह सफल होगा."
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के टोल वसूलने के विचार को पूरी तरह से ख़रिज नहीं किया है.
एबीसी न्यूज़ के मुताबिक़ अमेरिका और ईरान जॉइंट वेंचर के रूप में होर्मुज स्ट्रेट को मैनेज कर सकते हैं.
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि चूंकि अमेरिका फारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल पर बहुत कम निर्भर है, इसलिए होर्मुज़ स्ट्रेट की समस्या को हल करने में अन्य देशों को नेतृत्व करना चाहिए.
पिछले सप्ताह, ब्रिटेन ने होर्मुज़ स्ट्रेट के मामले पर 40 से अधिक देशों के साथ बातचीत की अध्यक्षता की.
इस बैठक में शामिल सभी लोगों ने इस बात पर सहमति जाहिर की कि पहले युद्ध समाप्त होना चाहिए.
दो हफ्तों की अवधि उपलब्ध होने के साथ, इस तरह की बातचीत और आगे बढ़ सकती है.
ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने एक बयान में युद्धविराम का स्वागत करते हुए कहा, "हम शिपिंग, बीमा और एनर्जी सेक्टर्स के साथ काम करना जारी रखेंगे."
4. क्या लेबनान युद्धविराम समझौते का हिस्सा है?
लड़ाई में विराम की घोषणा करते हुए अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी "लेबनान और अन्य जगहों सहित हर जगह तत्काल युद्धविराम पर सहमत हुए हैं."
ईरान सभी मोर्चों पर शत्रुता समाप्त करने पर जोर देता है, "जिसमें लेबनान के खिलाफ हमले भी शामिल हैं."
लेकिन इसराइल इस बात से सहमत नहीं है.
इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा, "दो सप्ताह का युद्धविराम लेबनान पर लागू नहीं होता है."
लेबनान के अंदर बड़ी संख्या में इसराइली सैनिकों की तैनाती और रक्षा मंत्री कात्ज़ की सीमावर्ती इलाकों को नष्ट करने की बात से बहुत कम संकेत मिलते हैं कि यह मोर्चा शांत हो जाएगा.
फिलहाल, डोनाल्ड ट्रंप इसराइली सरकार के रुख़ के प्रति सहानुभूति रखते नज़र आते हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने पीबीएस की लिज़ लैंडर्स को बताया कि लेबनान "हिज़्बुल्लाह की वजह से" समझौते का हिस्सा नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि लेबनान में युद्ध "एक अलग झड़प" है.
5. ट्रंप के बयान
डोनाल्ड ट्रंप की तबाह करने वाली नेतृत्व शैली और अत्यधिक अप्रत्याशित व्यवहार उनकी कार्यशैली का हिस्सा हैं.
उनके फॉलोअर्स "मैड मैन थ्योरी" की इसलिए प्रशंसा करते हैं क्योंकि इसमें उनके विरोधियों को भ्रमित करने और अकल्पनीय कारनामे हासिल करने की क्षमता है.
हालांकि वह तबाह करने की धमकियों के माध्यम से युद्धविराम हासिल कर सकते थे. लेकिन ईरान के साथ युद्ध ने उनके अनूठे दृष्टिकोण की परीक्षा ली है.
युद्ध के बदलते उद्देश्यों से लेकर इसकी विनाशकारी चेतावनियों तक, इस संघर्ष ने ट्रंप के अधिकार को मजबूत करने के बजाय उसके कमजोर करने के संकेत दिए.
राष्ट्रपति ने यह तो दिखा दिया है कि वह युद्ध शुरू करने में सक्षम हैं, लेकिन क्या अब उनमें इसे समाप्त करने की सलाहियत भी है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.