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'ममाज़ बॉय' पर मचा है महाभारत
- Author, गीता पांडे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
पांच पांडवों से विवाह करने वाली द्रौपदी पर आधारित लघु फ़िल्म 'मामाज़ बॉय' यू ट्यूब पर खूब लोकप्रिय है. पर इसने कट्टरपंथी हिंदुओं को अच्छा ख़ासा नाराज़ भी कर दिया है.
हंसी से भरपूर सोलह मिनट की इस फ़िल्म में द्रौपदी बनी बॉलीवुड कलाकार अदिति राव हैदरी ने एक सजीव, चटपटी और कामुक आधुनिक स्त्री की भूमिका निभाई है, जो कई लोगों को फ़्लर्ट करती है.
निर्देशक अक्षत वर्मा की यह फ़िल्म पांच भाइयों से एक साथ ही विवाह करने को अधुनिक संदर्भ में पेश करती है. लेकिन यह मूल कहानी से भटकती भी नहीं है.
इसमें तमाम अभिनेता और अभिनेत्री उस समय के कपड़ों ही दिखते हैं, परिवेश उसी समय का बनाया गया है, लेकिन उनकी भाषा हिंदी और अंग्रेज़ी का मिला-जुला रूप है.
फ़िल्म की कहानी योद्धा अर्जुन के अपनी पत्नी के साथ घर आने से होती है, जहां वह उसे अपनी मां कुंती से मिलवाते हैं.
घर के कामकाज में मशगूल कुंती द्रौपदी की ओर पीठ होने की वजह से उसे देख नहीं पाती. वे अपने बेटे से कह देती हैं कि "जो भी लेकर आए हो, सभी भाई आपस में बांट लो."
अर्जुन पत्नी को भाइयों से साझा करना नहीं चाहता और मां के आदेश पर खुश नहीं है.
लेकिन अक्षत वर्मा की इस फ़िल्म के युधिष्ठर मूल महाभारत के बड़े भाई से अलग हैं. यह जुआरी बड़ा भाई नहा कर निकली द्रौपदी की खुली पीठी देख उसे हासिल करना चाहता है.
जिम में व्यायाम कर रहे मझले भाई भीम भी उस औरत को किसी तरह पाना चाहते हैं.
नकुल और सहदेव समलैंगिक हैं, पर उन्हें लगता है कि द्रौपदी पत्नी बनी तो वे अपने इस राज़ को बरक़रार रखने में कामयाब रहेंगे.
बीते हफ़्ते से चल रही इस फ़िल्म को सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने 'अप्रासंगिक और दुष्टतापूर्ण' माना है तो कुछ ने 'मज़ेदार' और 'हंसी से सराबोर'.
कट्टरपंथी हिंदू गुट हिंदू सेना ने इस फ़िल्म के ख़िलाफ़ पुलिस में मामला दर्ज़ करवा दिया है.
इस कटरपंथी ट्गुट ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में कहा है, "अक्षत वर्मा और ममाज़ बॉय की टीम ने जानबूझ कर और शरारतपूर्ण तरीके से हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है. उन्होंने हिंदुओं की धार्मिक पुस्तक का मज़ाक उड़ा कर उनकी धार्मिक आस्थाओं को ठेस पंहुचाई है और उनका अपमान किया है."
ख़बरें है कि पुलिस मामले की तहकीक़ात कर रही है.
पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद 'ममाज़ बॉय' को यूट्यूब से हटा लिया गया है, हालांकि यह फ़िल्म अभी भी इंटरनेट पर है.
इस बीच निर्देशक अक्षत वर्मा ने कहा है कि उनका मक़सद किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पंहुचाना क़तई नहीं था. वे सिर्फ़ इसकी पड़ताल कर रहे थे कि इन चरित्रों के मन में क्या कुछ चल रहा था.