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नोटबंदी का एक माह और आंकड़ों का सच
- Author, विनीत खरे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
भारत में मौजूद कुल दो लाख से अधिक एटीएम मशीनों में से क़रीब 90 प्रतिशत में नए नोटों के हिसाब से बदलाव कर दिए गए हैं.
लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि उन मशीनों में पर्याप्त नक़दी मौजूद है.
500 और 1000 के जितने नोट सर्कुलेशन से हट गए हैं वो कुल नक़दी अर्थव्यवस्था का 86 फ़ीसद है.
अभी लगभग तीन हफ़्तों का समय बाक़ी है और अंदाज़ा है कि 14 लाख करोड़ रूपये से ऊपर बैंकों में जमा हो जाएगें.
सरकारी नोट प्रिंटिंग प्रेस रात-दिन काम कर रहे हैं लेकिन जितना नक़दी हटाई गई है उसे नए नोटों में वापस लाने में महीनों का समय लगेगा.
जो 19 अरब नए करेंसी नोट बाज़ार में लाए गए हैं उनकी क़ीमत, बाज़ार से हटाई गई मुद्रा का एक-तिहाई भर है.
1.2 हज़ार करोड़ रूपये का आंकड़ा सीएमआईई के आकलन के मुताबिक़, जिसमें आर्थिक लेन-देन और रोज़गार को हुए नुक़सान के अलावा नए नोटों की छपाई की लागत भी शामिल है.