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आइडिया, वोडाफोन के विलय से नौकरियों पर गिरेगी गाज?
- Author, आशुतोष सिन्हा
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
- प्रकाशित
वोडाफोन और आईडिया ने सोमवार को अपनी कंपनियों के विलय की घोषणा की है.
दोनों कंपनियां पिछले एक महीने से इस बात पर विचार कर रही थीं. नई कंपनी की घोषणा होने और इस बारे में पूरी जानकारी आना अभी बाकी है.
लेकिन इस घोषणा के बाद अब ये देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बन जाएंगी और इसका दूरगामी असर देखने को मिलेगा.
जैसे-जैसे जियो की तरफ से टक्कर और मजबूत हो रही है, अपने मुनाफ़े को बनाए रखने के लिए कंपनियां सभी विकल्पों पर विचार कर रही हैं.
एयरटेल ने टेलीनॉर को हाल ही में खरीदने की घोषणा की है और रिलायंस कम्युनिकेशन छोटी कंपनियों के साथ विलय की सोच रहा है.
इन कंपनियों के बीच अब घमासान कॉल को लेकर नहीं पर लोगों के डेटा के इस्तेमाल को लेकर है. 39 करोड़ ग्राहकों के साथ नई कंपनी एयरटेल से ग्राहकों के मामले में बड़ी होगी.
मोबाइल डेटा
इसमें आइडिया के 19 और वोडाफोन के 20 करोड़ से कुछ ज़्यादा ग्राहक होंगे.
दिसम्बर 2016 के आंकड़ों के अनुसार, एयरटेल के 27 करोड़ ग्राहक थे और वो देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है.
एयरटेल ने टेलीनॉर को खरीदने की घोषणा की है जिससे उसके 4 करोड़ ग्राहक बढ़ जाएंगे.
सभी मोबाइल कंपनियों के लिए मोबाइल डेटा इस्तेमाल करने वाले ग्राहक फिलहाल सबसे अहम हैं.
2जी, 3जी और 4जी सर्विस इस्तेमाल करने वाले आइडिया के 4.9 करोड़ और वोडाफोन के 6.5 करोड़ ग्राहक हैं.
नई कंपनी
इसके मुकाबले एयरटेल के करीब 5.5 करोड़ ग्राहक डेटा सर्विस इस्तेमाल करते हैं.
आइडिया ने हाल ही में पिछले दस साल में पहली बार तिमाही के आंकड़ें पेश करते समय मुनाफे की घोषणा नहीं की थी.
वोडाफोन को भी स्टॉक एक्सचेंज में अपने शेयर लिस्ट करने की योजना को ठंडे बास्ते में डालना पड़ा है.
इसीलिए उम्मीद करनी चाहिए कि मुनाफे की तलाश में नई कंपनी छंटनी की घोषणा कर सकती है.
छंटनी करना इसीलिए ज़रूरी है क्योंकि रिलायंस जियो की सर्विस ने टेलीकॉम कंपनियों को नए ढंग से सोचने पर मजबूर कर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट
अगर उनकी कंपनियों को मुनाफा चाहिए तो उन्हें कम से कम खर्च में काम करना होगा.
कुछ साल पहले देश में 13 मोबाइल फ़ोन सर्विस देने वाली कंपनियां थीं. 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ कंपनियों के लाइसेंस रद्द कर दिए थे जिसके बाद स्थिति काफी बदल गयी है.
उस समय कंपनियां मोबाइल फ़ोन पर कॉल की दरों पर पैसे कमाने की सोचती थीं. लेकिन अब मोबाइल फ़ोन पर इस्तेमाल किये जा रहे डेटा पर सभी कंपनियों की नज़र है.
डेटा के साथ साथ स्मार्टफ़ोन पर तरह तरह की नयी सर्विस देकर भी कंपनियां ग्राहकों से कुछ ज़्यादा कमाने की कोशिश कर रही हैं.
जो कंपनी सबसे तेज़ी से ऐसे ग्राहकों को अपने साथ कर लेगी वो इस रेस में आगे हो जाएगी.
डेटा स्कीम
रिलायंस जियो ने लॉन्च के बाद पहले छह महीने में ही 10 करोड़ ग्राहक इकठ्ठा करके पूरी इंडस्ट्री में खलबली मचा दी है.
इसके मुकाबले आइडिया को 19 करोड़ ग्राहक इकठ्ठा करने में 10 साल लगे थे.
लेकिन जैसे जैसे लोगों के स्मार्टफ़ोन पर डेटा इस्तेमाल करने की आदत बदलेगी, हो सकता है मौजूदा मोबाइल कंपनियों की सर्विस उन्हें पसंद नहीं आएगी और वो जियो जैसी नई मोबाइल फ़ोन कंपनी की ओर अपना रुख करेंगे.
जियो के डेटा की स्कीम को टक्कर देने के लिए सभी कंपनियां अब अपनी नई स्कीम ला रही हैं.
जिन लोगों ने जियो के प्राइम ऑफर को नहीं लिया है, हो सकता है उनके लिए नई स्कीम की घोषणा हो.
हर महीने अपने मोबाइल फ़ोन पर 400-600 रुपये से ज़्यादा खर्च करने वाले ग्राहकों पर अगर जियो सेंध लगाने की कोशिश करेगा तो टेलीकॉम कंपनियों के बीच इस तरह का घमासान हो सकता है.
टेलीकॉम सेक्टर में छंटनी के दिन आ सकते हैं. वोडाफोन के करीब 13,000 कर्मचारी हैं और आइडिया के करीब 17,000.
विलय के बाद संभावना है कि नौकरियों में कुछ छंटनी हो सकती है क्योंकि हो सकता है कि नई कंपनी को पहले जितने सर्विस सेंटर चलाने की ज़रूरत ही न पड़े.
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