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सीएम आदित्यनाथ को गृह प्रवेश के लिए शुभ मुहूर्त का इंतज़ार
- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ से
- प्रकाशित
लखनऊ की कालिदास रोड पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का सरकारी आवास सोमवार को भगवा रंग में डूबा रहा.
छत पर गेरुआ कपड़े की चादर, गेंदे के ताज़ा फूलों से पटी दीवारें और दरवाज़े.
तैयारी थी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के औपचारिक गृहप्रवेश की, जिसको लेकर सोमवार सुबह से ही तैयारियां शुरू हो गई थीं.
पुरोहितों ने गृह प्रवेश के सारे अनुष्ठानों को पूरा किया. मगर बाद में पता चला कि मुख्यमंत्री को गृह प्रवेश के लिए शुभ मुहूर्त का इंतज़ार है, इसलिए सोमवार को वो सरकारी आवास में नहीं आएंगे.
चूंकि तैयारी पूरी थी इसलिए मुख्यमंत्री आवास के हर प्रवेश द्वार को गेंदे के फूलों से सजाया भी गया और हर दरवाज़े पर 'ओम', स्वास्तिक और 'शुभ लाभ' भी लिखा गया.
शायद वो शुभ मुहूर्त ही है जिसकी वजह से सरकार में शामिल किए गए मंत्रियों को उनके विभागों का आवंटन भी पूरा नहीं हो पाया.
हालांकि कुछ जानकार कहते हैं कि विभागों का बंटवारा बहुत सोच समझकर किया जाएगा. उनका कहना है कि जिस तरह मुख्यमंत्री के चयन में देर की गई उसी तरह विभागों के बंटवारे में भी विलंब हो रहा है.
हालांकि बीजेपी ने अभी इस पर कुछ नहीं कहा है मगर राजनीतिक हलकों में कयास लगाए जा रहे हैं कि मंत्रियों को आवंटित होने वाले विभागों की भी समीक्षा की जा रही है और पार्टी और संघ से इस पर सहमति ली जा रही है.
बतौर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पहला दिन बैठकों से शुरू हुआ जिसमें सबसे पहले उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव राहुल भटनागर, गृह विभाग के प्रधानसचिव देवाशीष पांडा और पुलिस महानिदेशक जावीद अहमद से राज्य की क़ानून व्यवस्था पर चर्चा की.
बहुजन समाज पार्टी के नेता मुहम्मद सामी की इलाहाबाद में हुई हत्या पर भी उन्होंने अधिकारियों के साथ चर्चा की और उनसे कहा कि 15 दिनों के अंदर क़ानून व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त करने के लिए अधिकारी एक 'ब्लू प्रिंट' यानी कार्य योजना तैयार करें.
इसके बाद वो मंत्रिमंडल में शामिल किए गए सदस्यों से भी मिलते रहे. इनमें दोनों उपमुख्यमंत्री भी शामिल थे.
बाद में पत्रकारों से बात करते हुए केशव प्रसाद मौर्या ने कहा कि उनकी सरकार के मंत्रिमंडल की पहली बैठक में उन तमाम मुद्दों पर फ़ैसले होंगे जिन्हें बीजेपी ने चुनावों के दौरान अपनी 'संकल्प यात्रा' में उठाया था.
इनमें अवैध बूचड़खानों को बंद करने की बात के साथ साथ किसानों की ऋण माफ़ी की बात भी कही गयी थी.
हालांकि ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि इलाहाबाद में दो अवैध बूचड़खानों को रविवार की रात बंद भी करा दिया गया है.
बीजेपी ने अपने चुनावी प्रचार में कहा था कि सरकार बनाते ही 24 घंटों के अन्दर प्रदेश में चल रहे अवैध बूचडखानों को बंद करा दिया जाएगा.
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