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आईआईटी में समोसे बेचने वाले का बेटा
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बंगलूरु से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
- प्रकाशित
वैभिरिशेट्टी मोहन अभ्यास की उम्र 17 साल है. वो किसी भी दूसरे टीनएज़र की ही तरह हैं.
ज्वाइंट एंट्रेंस एक्ज़ाम (जेईई) एडवांस्ड में 64वीं रैंक हासिल कर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में दाखिला तय करने वाले अभ्यास अपने बारे में झिझकते हुए बातचीत करते हैं.
देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में जगह बनाने वाले दूसरे छात्रों और उनमें जो अहम फर्क है, वो ये कि अभ्यास का परिवार आर्थिक रूप से संपन्न नहीं है.
उनके पिता समोसा बेचते हैं.
अभ्यास के पिता वी सुब्बा राव की उम्र 45 साल है. वो घर में ही समोसे बनाते हैं. इस काम में पत्नी और बच्चे उनकी मदद करते हैं.
समोसे तैयार होने पर वो उन्हें कुछ दुकानों में सप्लाई करते हैं और ख़ुद साइकिल पर भी समोसे बेचते हैं.
अभ्यास ने बीबीसी हिंदी को बताया, "वो हर दिन करीब 300 से 500 समोसे बनाते हैं और रोज की उनकी कमाई 500 से एक हज़ार रुपये के बीच होती है. वो किसी तरह मेरी छोटी बहन और मेरी पढ़ाई का खर्च उठाते हैं. वो 10वीं कक्षा में पढ़ती है."
इरादा वैज्ञानिक बनने का
अभ्यास का इरादा वैज्ञानिक बनने का है.
वो कहते हैं, "मैंने अभी तय नहीं किया है कि किस ब्रांच में पढ़ाई करनी है लेकिन मेरा रुझान भौतिक विज्ञान से जुड़े क्षेत्र में है."
भौतिक विज्ञान में उनके रुझान को सबसे पहले कार्तिकेय कॉन्सेप्ट स्कूल के शिक्षक अंचा रामबाबू ने पहचाना. उस वक़्त अभ्यास नवीं कक्षा में थे.
रामबाबू कहते हैं, "उनके परखने की क्षमता ने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया. वो जोड़-घटाव बड़ी तेज़ी के साथ करता है और उसमें विषय की अच्छी समझ है. वो लगनशील और परिश्रमी है."
एडवांस्ड परीक्षा में बैठने के एक साल पहले अभ्यास ने जेईई (मेन्स) परीक्षा में छठी रैंक हासिल की थी. ऊंची रैंक हासिल करना उनके लिए एक आदत बन चुकी है. स्कूल में उन्होंने हमेशा पहले चार स्थान में जगह बनाई.
हर दिन 10 घंटे पढ़ाई
अभ्यास ने बताया, " जूनियर कॉलेज के पहले साल के दौरान जेईई के लिए मैंने हर दिन 10 घंटे पढ़ाई की. दूसरे साल के दौरान सुबह 8 से रात 9.30 बजे तक हमारी क्लास होती थी. "
बेटे ने कठिन परिश्रम के जरिए चार आला आईआईटी (बम्बई, कानपुर, दिल्ली और चेन्नई) में से किसी एक में दाखिला लेना सुनिश्चित कर लिया है, तब सुब्बा राव आईआईटी में होने वाले ख़र्च को लेकर बेफिक्र दिखते हैं.
वो कहते हैं, "कष्ट करके पढ़ाएंगे "
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