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'उपवास' पर मोदी, लेकिन दुनिया का सबसे लंबा अनशन किसका?
हाल में कांग्रेस की तरफ़ से ऐलान किया गया कि दलितों पर हो रहे अत्याचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए राहुल गांधी राजघाट पर एक दिन का उपवास करेंगे.
लेकिन जिस दिन उपवास का वक़्त आया, राहुल के भूखे रहने से कहीं ज़्यादा सुर्खियां कांग्रेसी नेताओं के छोले-भटूरे बटोर ले उड़े.
इसके बाद बारी थी भाजपा की. ऐलान किया गया कि 12 अप्रैल को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के सभी सांसद एक दिन का उपवास रखेंगे.
भूख हड़ताल बनाम भूख हड़ताल
वजह? संसद के बजट सत्र का दूसरा हिस्सा पूरी तरह हंगामे की भेंट चढ़ गया, इसलिए. और भाजपा ने कांग्रेस की गलती से एडवांस में सबक भी ले लिया.
भाजपा की दिल्ली इकाई के सांसदों ने अपने कार्यकर्ताओं को गुरुवार को उपवास शुरू होने से पहले कुछ निर्देश दिए.
इनमें कहा गया है कि आप खाते हुए न दिखें, खाते हुए सेल्फ़ी न लें, अपने इलाके के आसपास से फ़ूड वेंडर हटवा दें और अगर डायबिटीज़ के रोगी हैं तो फिर उपवास न करें.
ख़ैर ये तो बात हुई कुछ घंटे या एक दिन के सांकेतिक उपवास की. लेकिन अतीत में कुछ ऐसे अनशन, उपवास या भूख हड़ताल हुई हैं, जिनके बारे में पढ़कर एक बार तो यक़ीन ही नहीं होगा.
हम बात कर रहे हैं इतिहास के सबसे लंबे चले अनशन और उपवास की.
जतिन दास, 63 दिन
साल 1929 में 13 जुलाई को लाहौर जेल के भीतर एक ऐसी भूख हड़ताल शुरू हुई जिसकी गूंज आज भी सुनाई देती है.
जतिन दास ने भारत के राजनीतिक कैदियों के साथ भी यूरोपीय कैदियों की तरह व्यवहार करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की.
दास की हड़ताल तोड़ने के लिए ब्रिटिश जेल प्रशासन ने काफ़ी कोशिशें कीं.
मुंह और नाक के रास्ते ज़बरदस्ती खाना डालने की कोशिश भी की गई लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. अंत में अंग्रेज़ सरकार को झुकना पड़ा.
लेकिन 63 दिन भूखा रहने की वजह से जतिन दास की तबीयत काफ़ी बिगड़ गई और डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका.
13 सितंबर को उनका निधन हुआ.
लाहौर से कोलकाता के बीच उनकी अंतिम यात्रा की अगुवाई दुर्गा भाभी ने की और हावड़ा रेलवे स्टेशन पर सुभाष चंद्र बोस ने उनका शव की अगवानी की.
पोट्टि श्रीरामुलु, 58 दिन
पोट्टि श्रीरामुलु भारतीय क्रांतिकारी हैं, जिन्होंने साल 1952 में 58 दिन भूख हड़ताल के बाद दम तोड़ दिया था. वो अलग राज्य की मांग करते हुए भूख हड़ताल पर बैठे थे.
श्रीरामुलु को अमरजीवी भी कहा जाता है. वो ख़ुद को सामाजिक कार्यकर्ता और मज़दूर कहा करते थे. उन्होंने महात्मा गांधी के साथ भी लंबा वक़्त गुज़ारा.
मद्रास प्रेसिडेंसी से अलग आंध्र प्रदेश बनाने की मांग को लेकर श्रीरामुलु ने दो बार अनशन किया था. पहला पांच दिन चला और दूसरा 58 दिन.
जतिन दास के बाद वो इकलौते दूसरे व्यक्ति बताए जाते हैं जिनका निधन अनशन की वजह से हुआ.
महात्मा गांधी ने एक बार उनके लिए कहा था, "अगर मेरे पास श्रीरामुलु जैसे 11 और साथी होते तो एक साल में ही अंग्रेज़ सरकार से भारत को आज़ाद करा लेते."
सुंदरलाल बहुगुणा, 74 दिन
कई दशकों से टिहरी बांध विरोधी प्रदर्शनों के लिए मशहूर रहे सुंदरलाल बहुगुणा अपने सत्याग्रह से कई बार सरकारों और संसद के लिए मुश्किल पैदा कर चुके हैं.
उन्होंने कई बार विरोध जताने के लिए भागीरथी के किनारे भूख हड़ताल की हैं.
साल 1995 में बांध के असर पर समीक्षा समिति बनाने से जुड़े तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने 45 दिन चला अनशन समाप्त किया था.
इसके बाद उन्होंने राजघाट पर 74 दिन लंबा उपवास भी रखा.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में एक दशक से भी ज़्यादा लंबा केस चला और साल 2001 में टिहरी बांध पर निर्माण फिर शुरू हुआ.
इसके बाद 20 अप्रैल 2001 को उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया.
महात्मा गांधी
मोहनदास करमचंद गांधी अहिंसा और सत्याग्रह के तहत कई बार उपवास किया करते थे.
उन्होंने अपने जीवनकाल में क़रीब 15 उपवास किए, जिनमें से तीन बार इनकी मियाद 21 दिन रही.
पहली बार 21 दिन का उपवास उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए किया था जो दिल्ली में साल 1924 में 18 सितंबर से 8 अक्टूबर तक चला.
और उन्होंने क़ुरान-गीता सुनते हुए ये उपवास समाप्त हुआ था.
21 दिन का दूसरा उपवास साल 1933 में 8 मई से 29 मई के बीच हुआ जो छुआछूत के विरोध में किया गया था.
और 21 दिन का तीसरा उपवास उन्होंने साल 1943 में 12 फ़रवरी से 4 मार्च के बीच किया जिसका मक़सद साम्प्रदायिक दंगे रोकना था.
इरोम चानू शर्मिला, 16 साल
इन्हें आयरन लेडी या मेंगुओबी भी कहा जाता है. मणिपुर की नागरिक अधिकार कार्यकर्ता इरोम ने AFSPA हटाने की मांग को लेकर साल 2000 में 5 नवंबर को भूख हड़ताल शुरू की थी और 16 साल बाद साल 2016 में 9 अगस्त को ख़त्म हुई.
500 से ज़्यादा हफ़्ते तक बिना खाने और पानी की रहने वाली इरोम को दुनिया की सबसे लंबी भूख हड़ताल के लिए जाना जाता है.
हालांकि इस दौरान अदालत के आदेश पर इरोम को पाइप के ज़रिए नाक से आवश्यक तत्व दिए जा रहे थे.
इरोम ने बाद में अनशन ख़त्म कर राजनीति में जाने का फ़ैसला किया, जिसकी काफ़ी आलोचना भी हुई.
उन्होंने कहा था, "मैं राजनीति में जाऊंगी और अपनी लड़ाई जारी रखूंगी."
ये वो लोग हैं, जो हमारे देश के हैं. लेकिन देश से बाहर भी कुछ ऐसे लोग हुए, जिन्होंने कई दिन भूखे रहकर सभी का ध्यान अपनी तरफ़ खींचा. इनमें से कुछ ये रहे:
बॉबी सैंड्स, 66 दिन
बॉबी जेरार्ड सैंड्स प्रॉविज़नल आइरिश रिपब्लिकन आर्मी का सदस्य थे जिन्होंने भूख हड़ताल करते हुए अपनी जान दे दी.
उनकी अगुवाई में साल 1981 में अनशन किया गया था और विरोध था स्पेशल कैटेगरी का दर्जा हटाने का.
भूख हड़ताल की वजह से उनकी और उनके बाद नौ अन्य लोगों की मौत की वजह से दुनिया भर में ये मुद्दा छा गया. कुछ लोगों ने इसकी तारीफ़ की और कुछ ने आलोचना.
वो 27 साल के थे जब भूख हड़ताल के 66 दिन बाद मेज़ के जेल अस्पताल में उनकी मौत हो गई.
उनके निधन की घोषणा होने के बाद नॉर्दर्न आयरलैंड में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए.
दर्शन सिंह फेरूमान, 74 दिन
अमृतसर में एक अगस्त 1885 को दर्शन सिंह का एक सिख परिवार में जन्म हुआ था. वह 1912 में सेना में शामिल हुए. 1914 में सेना छोड़कर उन्होंने हिसार में कंस्ट्रक्शन का व्यवसाय शुरू कर दिया था.
गुरुद्वार सुधार आंदोलन में वह शामिल रहे. साथ ही उन्होंने अकालियों के साथ भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया.
अगस्त 1969 में उन्होंने फ़तेह सिंह को अरदास तोड़ने पर सिखों का गौरव कम करने का आरोप लगाया था. उन्होंने विवादित क्षेत्रों और अरदास का गौरव बरक़रार रखने की मांग को लेकर जेल में 15 अगस्त को अपना उपवास शुरू किया और 27 अक्तूबर 1969 को उनकी मृत्यु हो गई.
उनका यह उपवास 74 दिनों तक चला.