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दिव्या मदेरणा: महिला सरपंच का अपमान करके फंसी कांग्रेसी विधायक
- Author, नारायण बारेठ
- पदनाम, जोधपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 4 मिनट
राजस्थान के जोधपुर ज़िले की ओसियां विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बनने वाली दिव्या मदेरणा को उनके तेज़-तर्रार अंदाज़ के लिए जाना जाता है.
लेकिन उनके इसी अंदाज़ ने राजस्थान में कांग्रेस के लिए एक नए विवाद को जन्म दे दिया है.
हाल ही में कांग्रेस विधायक दिव्या मदरेणा एक समारोह में शामिल हुई थीं.
इस आयोजन के दौरान जब गांव की महिला सरपंच चंदू देवी दिव्या मदेरणा के बराबर वाली सीट पर आकर बैठीं तो उन्होंने चंदू देवी को कथित रूप से नीचे बैठा दिया.
चंदू देवी कहती हैं कि इस घटना से वो बहुत आहत हुई हैं.
बीबीसी के साथ बातचीत में वह कहती हैं, "मैं इतना व्यथित हुई हूँ कि घर से बाहर निकलने में भी ग्लानि महसूस हो रही है. सरपंच संघ ने विधायक से माफ़ी की मांग की है और आंदोलन की धमकी दी है."
इस घटना का वीडियो वायरल हो गया.
इस बारे में विधायक दिव्या मदेरणा का पक्ष अभी सामने नहीं आया है. उनसे सम्पर्क करने का प्रयास किया गया. मगर बात नहीं हो पाई.
वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता सुरेश चौधरी ने बीबीसी से कहा, "उन्हें घटना की पूरी जानकारी नहीं है."
आख़िर क्या मामला है?
यह घटना शनिवार को जोधपुर के खेतासर गांव में उस समय पेश आई जब विधायक मदेरणा अपने क्षेत्र के गांवों में धन्यवाद यात्रा पर निकली थीं.
ग्रामीणों ने उनके सम्मान में समारोह आयोजित किया और मंच सजाया.
इस मंच पर लगी कुर्सी पर विधायक आसीन हुई और बग़ल की कुर्सी पर चंदू देवी बैठ गईं.
तभी विधायक ने कथित रूप से महिला सरपंच को सामने बैठे लोगों के बीच नीचे बैठने के लिए कहा.
सरपंच चंदू देवी इसी खेतासर गांव की सरपंच हैं. यह सरपंच और विधायक की पहली मुलाक़ात थी.
सरपंच चंदू देवी ने बीबीसी से कहा, ''मुझे उनका यह बर्ताव बहुत बुरा लगा. मुझे इशारा कर नीचे बैठने को कहा गया. मैंने सब्र रखा. फिर मुझे ही नहीं गांव के सभी लोगों को भी यह बुरा लगा. इस अपमान के बाद मेरी तबीयत भी ख़राब हो गई. तीन दिन तक घर से बाहर नहीं निकली. जब मेरे साथ यह हो सकता है तो बाक़ी महिलाओ के साथ कैसा बर्ताव होगा?"
चंदू देवी बताती हैं, "मैं बहुत प्रेम से उनसे मिलने गई थी. मैं भी एक औरत हूँ और वो भी एक महिला हैं. लेकिन इस घटना ने मुझे विचलित कर दिया है. मैं चाहूंगी किसी और महिला के साथ ऐसा न हो."
कांग्रेस के ख़िलाफ़ आंदोलन की चेतावनी
राजस्थान में 9,892 सरपंच हैं. इसके अलावा एक लाख से अधिक पंच भी हैं.
सरपंच संघ के मुताबिक़ इनमें आधी से ज़्यादा महिलाएं हैं.
राज्य सरपंच संघ के अध्यक्ष भंवर लाल जानू ने इस घटना की कड़ी निंदा की है.
जानू ने बीबीसी से कहा, "यह बहुत दुखद घटना है. हम एक महिला विधायक से ऐसे सलूक की उम्मीद नहीं कर सकते. यह शिष्टाचार के ख़िलाफ़ है. सरपंच गांव का प्रथम नागरिक होता है. उनके साथ यह सलूक स्वीकार्य नहीं है. हम सरकार को दो दिन की मोहलत दे रहे हैं. अगर विधायक ने इस घटना पर माफ़ी नहीं मांगी तो हम आंदोलन करेंगे. विधायक का यह व्यवहार ग्रामीण राजस्थान में महिला प्रतिनिधियों का मनोबल तोड़ने का प्रयास है, हम राज्यपाल को ज्ञापन देकर कारवाही की मांग करेंगे.'
परम्पराओं में बने गुंथे मारवाड़ में दस हज़ार की आबादी वाला खेतासर एक बड़ा गांव है.
चंदू देवी ख़ुद पिछड़े वर्ग से है. लेकिन सामान्य वर्ग की इस महिला सीट से चुनाव जीत कर सरपंच बनी हैं.
उनके परिजनों के मुताबिक़, "चंदू देवी पहले आठवीं तक पढ़ी थीं. फिर उन्होंने दसवीं का इम्तिहान पास किया और सरकारी बैठकों में ख़ुद अकेले जाती हैं. उनका परिवार गांव में एक स्कूल भी चलाता है. स्कूल का प्रबंधन ख़ुद चंदू देवी संभालती हैं.''
उनके पति रूपा राम कहते हैं, "आप सोच भी नहीं सकते हम किस पृष्ठभूमि से निकल कर आये हैं. मेरी पत्नी बहुत अपमानित महसूस कर रही हैं."
वहीं, गांव के जलाराम मेघवाल कहते हैं कि यह पूरे गांव का अपमान है.
खेताराम गांव में वार्ड पंच मथुरा राम चौधरी घटना के वक़्त वहां मौजूद थे.
चौधरी बीबीसी को बताते हैं, "गांव वालों ने ही महिला सरपंच से आग्रह किया था कि उन्हें मंच पर बैठना चाहिए. इसी नाते वो मंच पर कुर्सी पर बैठी थीं. यह बहुत शर्मनाक था. यह पूरे गांव की तौहीन है. उस वक़्त हम आपत्ति कर सकते थे. पर गांव की मान मर्यादा देख कर चुप रहे. मगर बाद में सभी को यह बुरा लगा."
कौन हैं दिव्या मदेरणा
विदेश से आला तालीम हासिल करने वाली दिव्या मदेरणा पहली बार विधायक चुनी गई हैं.
सियासत उन्हें विरासत में मिली है. उनके दादा परसराम मदेरणा लम्बे समय तक विधान सभा के सदस्य रहे हैं और मंत्री भी रहे हैं.
उनके समर्थक स्व. मदेरणा को किसान और पिछड़े वर्गो के प्रबल पैरोकार के रूप में याद करते रहे हैं.
विधायक के पिता महिपाल मदेरणा भी विधायक और मंत्री रहे हैं. बाद में भंवरी देवी प्रकरण में उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा था.
सरपंच संघ के अनुसार एक लम्बे संघर्ष के बाद महिलाये पर्दे के परिवेश से बाहर निकली हैं.
ऐसे में इस तरह की कोई भी घटना उनके मनोबल पर बुरा असर डाल सकती है.
ग़ौरतलब है कि 1959 में भारत के प्रधानमंत्री स्व जवाहर लाल नेहरू ने जोधपुर के पड़ोस में नागौर ज़िले से पंचायती राज को देश के लिए समर्पित किया था.
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