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दिनेश मदान की मुश्किल, ट्रैफिक पुलिस ने लगाया 23 हज़ार का जुर्माना
- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नई दिल्ली
- प्रकाशित
"मैं रानू मंडल की तरह लोकप्रिय थोड़ी ना हुआ हूँ. मेरी तो ये बदनामी ही हो रही है. उनकी तरह लोकप्रिय होता तो सलमान खान से मिलने का मौक़ा मिलता. अब तो अदालत में वकीलों और जज से मिलना ही मेरी क़िस्मत में है."
ये कहना है दिल्ली के वसुंधरा में रहने वाले दिनेश मदान का, जिनको ट्रैफिक नियमों के उलंघन के आरोप में गुरुग्राम की पुलिस ने 23 हज़ार रूपए का जुर्माना लगाया है.
मदान अब मीडिया वालों से परेशान हैं जो, बक़ौल उनके, रात दिन फ़ोन कर रहे हैं और उनके घर के चक्कर काट रहे हैं.
मैंने पूछा कि ऐसा तो किसी 'सेलिब्रिटी' के साथ ही होता है तो वो कहते हैं - "ऐसा नाम नहीं कमाना ही अच्छा.''
मदान के लिए वही कहावत चरित्रार्थ हुई, 'चार आने का बन्दर और बारह आने की रस्सी' क्योंकि जिस स्कूटी पर वो गुरुग्राम गए थे उसकी क़ीमत अब 15 हज़ार के आसपास की ही है. जबकि उनको 23 हज़ार बतौर जुर्माना भरना पड़ेगा.
बीबीसी से बात करते हुए वो अपनी ग़लती मानते हैं और कहते हैं कि वो अदालत में जुर्माने की रक़म को कम करने की गुहार लगाएंगे.
उनका कहना है कि वो वर्गीकृत विज्ञापान इकठ्ठा करने का काम करते हैं जिसमे उनकी मासिक आय 15 हज़ार रूपए के आसपास की है.
मदान कहते हैं, "इतनी बड़ी रक़म मेरे लिए चुकाना मुश्किल होगा. मैं जज साहब के सामने अपनी आर्थिक स्थिति रखूंगा और उनसे जुर्माना कम करने की गुहार लगाऊंगा. अगर वो यहीं माने तो उस सूरत में मुझे उधार लेकर पैसे चुकाने पड़ेंगे."
संसद के मानसून सत्र में ही 'मोटर व्हीकल्स (अमेंडमेंट) एक्ट' पारित किया गया जो 1 सितम्बर से पूरे देश में लागू हो गया जिसमे यातायात उलंघन के जुर्माने को कई गुना बढ़ा दिया गया है.
बिना लइसेंस गाड़ी चलाने से लेकर सीट बेल्ट नहीं लगाने तक के जुर्माने में काफ़ी इज़ाफ़ा किया गया है.
कई राज्यों में अभी लागू नहीं
लेकिन कई राज्य ऐसे भी हैं जिन्होंने इस नए संशोधन को लागू नहीं किया है. इसमें राजस्थान, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, पंजाब और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के नाम शामिल है. ज़ाहिर है ये वो राज्य हैं जहाँ भारतीय जनता पार्टी का शासन यहीं है.
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा है, "सेंट्रल मोटर व्हीकल संशोधन एक्ट- 2019 का हम पूरा अध्ययन करेंगे. हमारे लिये जनहित प्राथमिकता है. पड़ोसी राज्यों का अध्ययन कर , इसका प्रस्ताव बनाने के अधिकारियों को निर्देश दिये हैं. समझौता शुल्क को लेकर हमें निर्णय का अधिकार है, आवश्यक होने पर हम जनहित में निर्णय लेंगे."
राजस्थान के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह काचारियावास का कहना है कि उनका राज्य नए क़ानून लागू करेगा मगर उससे पहले जुर्माने की रकम का राज्य सरकार अध्ययन करेगी.
उसी तरह, छत्तीसगढ़ की सरकार का कहना है कि संशोधित परिवहन अधिनियम के 'सेक्शन' 200 में प्रावधान है कि राज्य सरकारें 'कम्पाउंडिंग फ़ाइन' यानी 'समझौता शुल्क' तय कर सकती हैं.
सरकार के प्रवक्ता का कहना है कि अगर गाडी की क़ीमत से ज़्यादा जुर्माने की रक़म होती है तो लोग उसे छोड़कर चले जाएंगे. नाम नहीं लेने के शर्त पर परिवहन विभाग के एक बड़े अधिकारी कहते हैं, ''अब यातायात थानों में इतनी जगह नहीं है कि ऐसे वाहनों को वहां रखा जा सके. ये भी साफ़ नहीं हो पाया है कि यातायात पुलिस या परिवहन विभाग ऐसे वाहनों को कबतक अपने पास रखे."
छत्तीसगढ़ के परिवहन आयुक्त मनोज पिंगुआ ने बीबीसी को बताया है कि सरकार अभी इस आमले पर विचार कर रही है और क़ानूनी सलाह भी ले रही है. उसके बाद ही तय होगा की जुर्माने का 'समझौता शुल्क' क्या तय होगा.
पंजाब की परिवहन मंत्री रज़िया सुल्ताना के अनुसार उनकी सरकार भी संशोधित परिवहन अधिनियम में जुर्माने की रक़म पर क़ानूनी सलाह ले रही है.
उसी तरह पश्चिम बंगाल के परिवहन मंत्री सुवेंदु अधिकारी का कहना है कि नए क़ानून में जुर्माने के जो प्रावधान अति आवश्यक हैं, उन्हें सरकार लागू करेगी. मगर बाक़ी के उल्लंघनों में तय की गयी जुर्माने की रक़म पर प्रदेश के महाधिवक्ता से राय मांगी गयी है.
उन्होंने भी इस क़ानून के सेक्शन 200 का हवाला देते हुए कहा कि इस प्रावधान के अनुसार राज्य सरकार ऐसा कर सकती है.
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