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असम के मुख्यमंत्री का इंटरव्यू: 'हम आंदोलनकारियों से बातचीत को तैयार'
- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, गुवाहाटी से, बीबीसी हिंदी के लिए.
- प्रकाशित
असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा है कि उनकी सरकार नागरिकता संशोधन विधेयक (कैब) का विरोध कर रहे आंदोलनकारियों से बातचीत के लिए तैयार है. उन्होंने कहा है कि उनकी सरकार ने गोहाटी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश बिप्लब शर्मा के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है जो असम के ताज़ा हालात पर एक रिपोर्ट देने के साथ इस बारे में संवैधानिक समाधान के लिए सुझाव भी देगी.
मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने बीबीसी के साथ गुरुवार को एक ख़ास बातचीत की, पढ़िए उन्होंने और क्या-कुछ कहा.
सवाल - असम में हिंसा की क्या वजहें हैं?
जवाब - प्रजातंत्र में हिंसक आंदोलनों का बुरा प्रभाव पड़ता है. प्रजातांत्रिक समाज ऐसे प्रदर्शनों के खिलाफ है, जो शांति भंग करते हैं. अभी शांति बहाल होना असम और यहां के लोगों के लिए आवश्यक है. हम इस मुद्दे पर आंदोलनकारियों से बातचीत के लिए तैयार हैं. प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने कहा है कि हमारी सरकार असम के लोगों की पहचान की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है. हमारे बीच कोई भ्रम नहीं होना चाहिए. लेकिन, हमें कुछ समय दें ताकि हम साथ मिलकर इस मामले का शांतिपूर्ण हल निकाल सकें.
सवाल - अगर ऐसा है और प्रधानमंत्री ने भी इस संबंधित ट्वीट किया है, तब यह बात आप अपनी जनता को क्यों नहीं समझा पा रहे हैं.
जवाब - कुछ लोग मिसइनफ़ॉर्मेशन (ग़लत सूचनाएं) दे रहे हैं. सच्चाई को कभी उजागर नहीं किया गया है. यह सारा आंदोलन लोगों को गुमराह करने की कोशिशों का है. उन्हें सच से कोई मतलब नहीं है. कोई कहता है इतने लोगों को नागरिकता मिल जाएगी. दूसरा कुछ और संख्या बताता है. इस कारण थोड़ी दिक्कतें हैं. नागरिकता कानून में कोई पहली बार संशोधन नहीं हुआ है. पहले की सरकारों ने भी इस कानून में नौ बार संशोधन किया है.
सवाल - कर्फ्यू लगाकर, इंटरनेट बंद करके जनता को कितने दिन ऐसे ही चला पाएगी आपकी सरकार? आपके पास पुलिस है, आर्म्ड फोर्सेस है, अपना इंटेलिजेंस है. फिर आर्मी की ज़रुरत क्यों पड़ी?
जवाब - इस आंदोलन में सबलोग शामिल नहीं हैं. कानून-व्यवस्था की भी अपनी प्रकिया है. कोई सरकार उससे अलग कैसे हो सकती है. यह शांति व्यवस्था के लिए किया गया है. किसी को परेशान करने के लिए नहीं. लोगों को हमारे साथ सहयोग करना चाहिए.
सवाल - क्या भारतीय जनता पार्टी में कैब को लेकर कोई मतभेद है?
जवाब - बीजेपी में इस मुद्दे पर कोई मतभेद नहीं है. नागरिकता संशोधन विधेयक के द्वारा पहली बार लोगों को यह अधिकार मिलेगा. असम समझौते के 34 साल बाद किसी सरकार ने यह निर्णय लिया है. यह असम की आइटेंडिटी के लिए है. इसलिए कैब को लेकर मतभेद कैसे संभव है?
सवाल - 15 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के गुवाहाटी आने का कार्यक्रम है. क्या यह कार्यक्रम होगा या इसे स्थगित करने की कोई योजना है.
जवाब - इस बारे में अभी कुछ नहीं कहूँगा, फिर कभी बात कर लेंगे.
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