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भारत ने कश्मीर पर ट्रंप की पेशकश ठुकराई
भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ विवाद सुलझाने में मदद की अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के प्रस्ताव को सीधे ख़ारिज कर दिया है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कश्मीर मुद्दे पर किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है.
उन्होंने कहा, "कश्मीर पर हमारा रवैया पूरी तरह से स्पष्ट है. यह भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दा है. हम इसे पाकिस्तान के साथ मिल कर सुलझा लेंगे."
अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने मंगलवार को दावोस में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ मीडिया को संबोधित करते हुए कहा था कि अमरीका कश्मीर के मुद्दे से जुड़े घटनाक्रम पर करीब से नज़र रख रहा है.
ट्रंप ने साथ ही इस विवाद को सुलझाने में मदद की पेशकश दोहराई थी.
पिछले पांच महीने में कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए ट्रंप की ओर से मदद की यह चौथी पेशकश थी.
रवीश कुमार ने कहा कि कश्मीर में चिंताजनक स्थिति पैदा करने की पाकिस्तान की कोशिश विफल हो गई है और दुनिया इसके दोहरे मानदंडों को समझती है.
जहां अच्छा लगे वहां जाएं पवन वर्मा - नीतीश कुमार
बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने पार्टी के प्रवक्ता पवन वर्मा के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने कहा, "अगर किसी को किसी भी बात पर चर्चा करनी है तो वो पार्टी में करे और पार्टी की बैठकों में करे. ये कोई तरीका नहीं कि आप सार्वजनिक तौर पर बयान दें."
नीतिश कुमार पार्टी प्रवक्ता पवन वर्मा के उस पत्र का जवाब दे रहे थे जिसमें उन्होंने नागरिकता संशोधिन क़ानून (सीएए) और एनआरसी को लेकर पार्टी का पक्ष स्पष्ट करने की मांग की थी.
21 जनवरी को पवन वर्मा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर ये चिट्ठी प्रकाशित की थी और लिखा था कि सीएए और एनआरसी को लेकर देश भर में जिस प्रकार विरोध चल रहा है उसे देखते हुए पार्टी को बीजेपी के साथ अपने गठबंधन के बारे में सोचना चाहिए.
इसके जवाब में गुरुवार को नीतीश कुमार ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि "किसी एक व्यक्ति के बयान से जोड़ कर जदयू को न देखें."
उन्होंने कहा "जहां उनको अच्छा लगे वो वहां जा सकते हैं, मेरी शुभकामनाएं उनके साथ हैं."
इसके कुछ देर बाद पवन कुमार ने नीतीश कुमार के बयान का स्वागत किया और कहा "पार्टी के बीच चर्चा की जगह होनी चाहिए और मैंने यही कहा है. मेरा इरादा उन्हें दुख पहुंचाने का बिल्कुल नहीं था."
"मैं चाहता हूं कि पार्टी के भीतर वैचारिक स्पष्टता हो. मैं मेरे पत्र के जवाब का इंतज़ार कर रहा हूं और आगे क्या करना है उसके बाद ही सोचूंगा."
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