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बजट 2021: सरकार की घोषणाओं से कितनी नई नौकरियां आएंगी?
- Author, निधि राय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 4 मिनट
स्टॉक मार्केट और कई अर्थशास्त्रियों ने कोविड महामारी के दौर में निर्मला सीतारमण के बजट को उत्साहजनक बताया है.
सरकार ने अर्थव्यवस्था के सभी प्रमुख सेक्टरों के लिए अपना कोष खोला है और निवेश को बढ़ाने पर ज़ोर दिया है. नरेंद्र मोदी सरकार के लिए नौकरियों के अवसर उपलब्ध कराना सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है.
सेंटर फ़ॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (सीएमआईई) के मुताबिक़, दिसंबर महीने में देश में बेरोज़गारी की दर नौ प्रतिशत पर थी.
कोरोना संक्रमण के कारण लगे लॉकडाउन के चलते लाखों लोगों के वेतन में कटौती हुई है, नौकरियाँ गई हैं. इस दौरान कितने लोगों की नौकरियाँ गई हैं, इसको लेकर आधिकारिक तौर पर सरकार ने कोई आँकड़ा नहीं दिया है.
हालाँकि मौजूदा बजट से देश में नौकिरयों के अवसर बढ़ने की बात कई एक्सपर्ट मान रहे हैं. इनके मुताबिक़, बजट में सभी क्षेत्रों के लिए पैसे का प्रबंध किया गया है, अगर इसे सही ढंग से लागू किया जाए, तो उम्मीद के मुताबिक़ नतीजे मिलेंगे.
कई प्रावधान
एक्सिस बैंक के चीफ़ इकोनॉमिस्ट सुगता भट्टाचार्य ने बीबीसी से बताया, "इस बजट में नौकरियों के सृजन के लिए कई प्रावधान किए गए हैं. 13 सेक्टरों में घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रॉडिक्टिव लिंक्ड इंसेंटिव के लिए स्कोप बढ़ाया गया है. इसके अलावा ग्लोबल सप्लाई चेन से एकीकृत भी किया गया है. इसके अलावा टेक्स्टाइल, मत्स्यपालन जैसे क्षेत्रों में निवेश को बढ़ाने के लिए क़दम उठाए गए हैं."
भट्टाचार्य के मुताबिक़, "किफ़ायती दरों पर घर मुहैया कराने के लिए उठाए गए प्रावधानों से निर्माण के क्षेत्र में रोज़गार बढ़ेगा. इसके अलावा लॉजिस्टिक्स में काफ़ी नौकरियों के अवसर आ सकते हैं. लेकिन निजी निवेश को बढ़ाने और नौकरियों के अवसर पैदा करने के लिए इन प्रावधानों को कारगर ढंग से लागू करना अहम होगा."
केयर रेटिंग्स की वरिष्ठ अर्थशास्त्री कविता चाको ने बताया, "सबसे अहम बात है इन प्रोजेक्ट्स को समय से प्रभावी ढंग से पूरा करना. कोरोना महामारी की अनिश्चितता के बीच ज़मीन अधिग्रहण से लेकर टेंडर की प्रक्रिया, वित्त प्रबंधन और सभी जगहों से क्लियरेंस हासिल करना, ये सब अवरोध उत्पन्न कर सकते हैं."
फ़ोर्टिस हेल्थकेयर के प्रबंध निदेशक और सीईओ डॉ. आशुतोष रघुवंशी का मानना है कि स्वास्थ्य सेक्टर में भी प्रोफ़ेशनलों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे.
उन्होंने बताया, "एलाइड हेल्थकेयर प्रोफ़ेशनल्स के लिए आयोग के गठन की घोषणा से देश भर में हेल्थ केयर प्रोफ़ेशनल्स की गुणवत्ता बेहतर होगी. हमारी इंडस्ट्री में मानव संसाधनों में बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है."
इंडियन स्टाफ़िंग फ़ेडरेशन के अध्यक्ष लोहित भाटिया के मुताबिक़, बजट में घोषित नीतियों से अर्थव्यवस्था में नौकरियों के अवसर बढ़ेंगे.
मज़दूरों को सामाजिक सुरक्षा
बजट में चार लेबर कोड को लागू करने की बात कही गई है. इससे ऊबर, स्विगी, डूंजो जैसी फ़र्म में काम करने वाले लोगों को सामाजिक सुरक्षा संबंधी प्रावधान का फ़ायदा होगा.
इसके अलावा पूर्णकालिक कर्मचारियों के लिए भी न्यूनतम मज़दूरी तय होगी. सरकार निर्माण सेक्टर सहित तमाम असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों के बारे में पर्याप्त जानकारी जुटाकर, उन्हें स्वास्थ्य, घर, स्किल, बीमा और पोषण संबंधी सरकारी योजनाओं का लाभ मुहैया कराने की दिशा में काम कर रही है.
एक देश, एक राशन कार्ड जैसी योजनाओं से भी मदद मिलेगी. लोहित भाटिया ने कहा, "असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों जैसे प्रावधानों की घोषणा हुई है. इससे उनकी कामकाज की सुविधाएँ बेहतर होंगी."
टीमलीज़ सर्विसेज़ की सह-संस्थापक और एक्ज़िक्यूटिव वाइस प्रेसीडेंट रितुपर्णा चक्रवर्ती ने बताया, "इस साल के बजट से सबसे ज़्यादा फ़ायदा महिलाओं को हुआ है. महिलाओं को सभी कैटेगरी और पर्याप्त सुरक्षा के साथ रात की शिफ्टों में काम करने की अनुमति दी गई है. इससे महिलाओं के लिए अवसर बढ़ेंगे. दक्षता, ट्रेनिंग और उच्च शिक्षा में निवेश बढ़ाने से हमारे मानवीय पूँजी सूचकांक और उत्पादकता बेहतर होगी."
हालाँकि रितुपर्णा चक्रवर्ती कहती हैं कि सरकार ने कामकाजी पेशवरों के लिए व्यक्तिगत स्तर पर कुछ ख़ास नहीं किया है.
उन्होंने बताया, "न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन के मिशन को सही ठहराने के लिए सरकार को कारोबार करने की स्थिति को बेहतर करने की ज़रूरत थी. किसी भी कारोबारी उपक्रम को शुरू करने के लिए अभी 27 या उससे भी ज़्यादा जगहों से पंजीयन की ज़रूरत पड़ती है, इन सबकी जगह सरकार यूनीक इंटरप्राइज़ नंबर शुरू करने का रोडमैप दे सकती थी. इसके अलावा कामकाजी पेशवेरों को उनके पीएफ़ कंट्रिब्यूशन को लेकर सरकार को विकल्प मुहैया कराना चाहिए."
आनंद राठी सिक्यॉरिटीज़ के चीफ़ इकॉनामिस्ट सुजन हाजरा के मुताबिक, सरकार को विनिवेश के लक्ष्य को पूरा करने में चुनौती का सामना करना पड़ेगा.
उन्होंने बताया, "अगर वे इस चुनौती से पार नहीं पाते हैं तो ख़स्ताहाल उपक्रमों से पीछा नहीं छूटेगा और नौकरियाँ भी सृजित नहीं होंगी.
हालाँकि इस चुनौती से पार पाना आसान भी नहीं दिख रहा है क्योंकि इन उपक्रमों में काम करने वाले कर्मचारी विनिवेश का विरोध करेंगे और बाज़ार की स्थिति भी कोई बहुत अच्छी नहीं है."
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