10 बाग़ी टीएमसी विधायकों की सदस्यता के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट से क्या कहा?
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट से कहा कि वह पश्चिम बंगाल के 10 बाग़ी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग वाली याचिका पर जल्द सुनवाई करे.
इन विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग विधानसभा स्पीकर के सामने रखी गई थी, लेकिन उन्होंने अब तक इस पर कोई फ़ैसला नहीं लिया है.
बार एंड बेंच के मुताबिक़ मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस से कहा कि इस मामले को जल्द सुनवाई के लिए दो जजों की बेंच के पास भेजा जाए.
कोर्ट ने कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता को कलकत्ता हाई कोर्ट जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाई कोर्ट में याचिका दाख़िल करने की छूट दी. साथ ही हाई कोर्ट से कहा कि वह इस मामले पर जल्द फ़ैसला करे.
सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका टीएमसी विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने दाख़िल की थी. उन्होंने शिकायत की थी कि विधानसभा स्पीकर 10 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग पर फ़ैसला नहीं ले रहे हैं.
इन 10 विधायकों के नाम हैं- ऋतब्रत बनर्जी, फिरहाद हकीम, अरूप रॉय, संदीपन साहा, अखरुज्जमान अंसारी, शिउली साहा, सबीना यास्मीन, बिप्लब मित्रा, जावेद ख़ान और रथिन घोष.
इन सभी ने टीएमसी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था. आरोप है कि चुनाव के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी. बीजेपी से चुनाव हारने के बाद टीएमसी में फूट पड़ गई थी.
8 जुलाई को इन विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग करते हुए विधानसभा स्पीकर के पास याचिकाएं दाख़िल की गई थीं.
शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि स्पीकर को इन याचिकाओं पर एक तय समय के भीतर फ़ैसला लेने का निर्देश दिया जाए. इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 2021 के एक फ़ैसले का हवाला दिया था. उस फ़ैसले में कहा गया था कि विधायकों की सदस्यता रद्द करने के मामलों में स्पीकर को तय समय के भीतर फ़ैसला लेना चाहिए.
इससे पहले भी शोभनदेव चट्टोपाध्याय इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट गए थे. तब कोर्ट ने कहा था कि उसे स्पीकर पर भरोसा नहीं करने की कोई वजह नहीं दिखती.
लेकिन गुरुवार को सुनवाई के दौरान शोभनदेव के वकील ने बताया कि स्पीकर ने अब तक कोई फ़ैसला नहीं लिया है.