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लाइव , दिल्ली: गफ़्फ़ार मार्केट की एक इमारत में लगी आग, कई दुकानें जलीं

आग ग्राउंड फ्लोर की एक या दो दुकानों में लगी और फिर ऊपरी मंजिलों तक फैल गई. इमारत में मोबाइल एक्सेसरीज़ और क्रॉकरी की दुकानें थीं.

सारांश

लाइव कवरेज

चंदन कुमार जजवाड़े

  1. दिल्ली: गफ़्फ़ार मार्केट की एक इमारत में लगी आग, कई दुकानें जलीं

    शुक्रवार देर रात लगी इस आग पर पूरी तरह काबू पाने की कोशिश जारी है. इस घटना में किसी के मारे जाने या घायल होने की सूचना नहीं मिली है.

    दिल्ली के उप मुख्य अग्निशमन अधिकारी एमके चट्टोपाध्याय ने घटनास्थल पर समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "आप देख सकते हैं, इमारत से अभी भी धुआं निकल रहा है. इमारत में उचित वेंटिलेशन नहीं है. यहां केवल एक सीढ़ी है और हर मंजिल पर लगभग 14-15 दुकानें हैं. हम आग बुझाने की कोशिश कर रहे हैं."

    उन्होंने बताया कि इमारत के अंदर काफ़ी ज़्यादा गर्म है और फ़ायर ब्रिगेड के कर्मचारी आग को पूरी तरह काबू करने में जुटे हुए हैं.

    उन्होंने बताया, "हमें उम्मीद है कि लगभग दो से तीन घंटे में ऑपरेशन पूरी तरह समाप्त हो जाएगा. हमें रात 1:30 बजे आग लगने की सूचना मिली थी. इमारत में एक बेसमेंट, एक ग्राउंड फ्लोर और तीन ऊपरी मंजिलें हैं. बेसमेंट सुरक्षित है."

    "आग ग्राउंड फ्लोर की एक या दो दुकानों में लगी और फिर ऊपरी मंजिलों तक फैल गई. इमारत में मोबाइल एक्सेसरीज़ और क्रॉकरी की दुकानें थीं. अब तक हमें किसी के हताहत होने की कोई जानकारी नहीं मिली है. आग बुझने के बाद हम तलाशी अभियान चलाएंगे."

  2. दिल्ली के कई इलाक़ों में एयर क्वालिटी बेहद गंभीर, एक्यूआई 400 के पार

    दिल्ली के कई इलाक़ों में हवा की गुणवत्ता (एक्यूआई) 400 के पर चली गई है. सेंट्रल पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक़ एक्यूआई के लिहाज से यह सिवियर स्थिति है.

    सीबीसीबी के आंकड़ों के मुताबिक़ शुक्रवार सुबह 8 बजे दिल्ली के आईटीओ इलाक़े में एक्यूआई 422 दर्ज की गई.

    वहीं जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के पास भी एक्यूआई 421 रही.

    नजफ़गढ़ में भी एक्यूआई 414 रिकॉर्ड किया गया. वहीं चांदनी चौक में एक्यूआई 391 दर्ज की गई.

    सीपीसीबी के मुताबिक़ एक्यूआई 401 से 500 के बीच हो तो इसे सिवियर माना जाता है. यह स्वस्थ लोगों की सेहत पर भी असर डाल सकती है. ऐसी हवा बीमार लोगों पर गंभीर असर डाल सकती है.

    वहीं एक्यूआई 301 से 400 के बीच हो तो लंबे समय तक ऐसी हवा में सांस लेने पर स्वसन संबंधी बीमारी हो सकती है.

    सीबीसीबी के मुताबिक़ एक्यूआई 0 से 50 के बीच हो तभी इसे अच्छा माना जाता है. इसके 100 तक होना भी संतोषजनक है.

  3. शेयर बाज़ार में भारी गिरावट के लिए ट्रंप ने लोगों को ठहराया ज़िम्मेदार

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और एशिया के शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट के लिए आम लोगों को ज़िम्मेदार ठहराया है.

    उन्होंने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा, "आज शेयर बाज़ार इसलिए धराशायी हो गया क्योंकि टेमोक्रेटिक पार्टी ने मंगलवार को बड़ी जीत हासिल की. यह देखकर बेहद दुख होता है. इसके लिए आप खुद ही ज़िम्मेदार हैं."

    उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा "यह चुनाव के नतीजों के आधार पर शेयर बाज़ार के इतिहास के सबसे ख़राब दिनों में से एक रहा. यह सब देखना बेहद दुखद है. बाज़ार को उस स्तर तक पहुंचाने के लिए बहुत मेहनत की गई थी, जहां वह पहले कभी नहीं पहुंचा था, और फिर यह सब हो गया. इसलिए आपके रिटायरमेंट खातों की रकम भी घट गई है."

    "याद रखिए, इसके लिए रिपब्लिकन नहीं, बल्कि डेमोक्रेट्स ज़िम्मेदार हैं। हालांकि, चिंता न करें, हम जल्द ही किसी न किसी तरह पहले से कहीं ज़्यादा बड़े और मज़बूत होकर उभरेंगे."

    इससे पहले अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन के बाद शेयर बाज़ार में भारी गिरावट देखने को मिली है. शेयर बाज़ार से अमेरिका और एशिया की प्रमुख टेक कंपनियों के सैकड़ों अरब डॉलर साफ़ हो गए हैं.

    इसकी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के विकास की रफ़्तार धीमी पड़ने की आशंकाएं हैं.

    एआई के विकास को धीमा करने के मुद्दे पर चुनाव लड़ने वाले डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की जीत के बाद टेक्नोलॉजी और एआई क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई.

  4. अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन: टेक कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट, रचेल क्लन और ओसमोंड चिया

    अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन के बाद शेयर बाज़ार में भारी गिरावट देखने को मिली है. शेयर बाज़ार से अमेरिका और एशिया की प्रमुख टेक कंपनियों के सैकड़ों अरब डॉलर साफ़ हो गए हैं.

    इसकी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के विकास की रफ़्तार धीमी पड़ने की आशंकाएं हैं.

    एआई के विकास को धीमा करने के मुद्दे पर चुनाव लड़ने वाले डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की जीत के बाद टेक्नोलॉजी और एआई क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई.

    टेक कंपनियों की अधिक हिस्सेदारी वाले नैस्डैक कंपोजिट इंडेक्स में 5.5% से ज़्यादा की गिरावट दर्ज की गई. डाउ जोन्स के आंकड़ों के मुताबिक, इससे कंपनियों के बाज़ार मूल्य में अनुमानित 2.5 ट्रिलियन डॉलर की कमी आई.

    अमेरिका के अन्य प्रमुख शेयर बाज़ार सूचकांकों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई. साल 2025 के बाद यह उनका सबसे ख़राब कारोबारी दिन रहा.

    यह बिकवाली एआई पर ख़र्च की जा रही भारी-भरकम रकम से होने वाले फ़ायदे को लेकर पहले से बनी चिंताओं के बीच हुई है.

    एशिया में भी शुक्रवार सुबह टेक कंपनियों की अधिक हिस्सेदारी वाले शेयर बाज़ार सूचकांकों में तेज़ गिरावट दर्ज की गई.

    जापान का निक्केई 225 शुरुआती कारोबार में 5% नीचे आ गया. इस दौरान पैनासोनिक के शेयरों में 10% से ज़्यादा की गिरावट आई, जबकि हिताची के शेयर लगभग 8% तक गिर गए.

    दक्षिण कोरिया की प्रमुख टेक कंपनियों के शेयरों में गिरावट के कारण कोस्पी सूचकांक भी 8.5% से ज़्यादा टूट गया. चिप निर्माता कंपनी एसके हाइनिक्स के शेयरों में 11.5% से ज़्यादा की गिरावट आई, जबकि सैमसंग के शेयर लगभग 10% नीचे आ गए.

    अमेरिका के अलग-अलग चुनावी क्षेत्रों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने डेटा सेंटरों और एआई के तेज़ी से हो रहे विस्तार को धीमा करने के मुद्दे पर चुनाव प्रचार किया था.

    देशभर में मतपत्रों पर ऐसे दर्जनों प्रस्ताव भी शामिल थे, जिनका मक़सद इस तकनीक को संचालित करने के लिए बेहद ज़रूरी डेटा सेंटरों के निर्माण और विकास पर प्रतिबंध लगाना था.

  5. मिडटर्म चुनाव में हार के बाद ईरान युद्ध पर क्या बोले ट्रंप?

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की ओर से कई सैन्य जनरलों को पद से हटाए जाने का मतलब है कि "शायद उन्हें विरोध का सामना करना पड़ रहा है."

    ट्रंप का ये बयान उनकी पार्टी को मिडटर्म चुनावों में मिली क़रारी हार के बाद आया है.

    उनकी यह टिप्पणी उन हालिया ख़बरों के संदर्भ में आई है, जिनमें कहा गया है कि पीट हेगसेथ प्रशासन से बाहर होने वाले हैं.

    उन्होंने ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की भी तारीफ़ की और इस अभियान को युद्ध कहे जाने पर आपत्ति जताई.

    उन्होंने कहा, "किसी ने ईरान के साथ युद्ध की बात कही? नहीं. हमने नाकेबंदी के मामले में शानदार सफलता हासिल की है."

    इसके बाद उन्होंने अनुमान लगाया कि ईरान को युद्ध से उबरने में 25 से 30 साल लग सकते हैं.

    उन्होंने कहा कि हालांकि, यह अभियान बहुत अच्छी तरह काम कर रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ अन्य लोग इस अभियान को 'कब्ज़ा' बता रहे हैं.

    उन्होंने कहा, "यह लगभग एक कब्ज़ा ही है. और हम कोई चालाकी दिखाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं. लेकिन यह एक कब्ज़ा है."

    इसके बाद उन्होंने कहा कि ईरान के साथ युद्ध में 18 अमेरिकी नागरिकों की मौत "बहुत ज़्यादा" है. हालांकि, उन्होंने इसकी तुलना वियतनाम और अफ़ग़ानिस्तान में मारे गए हज़ारों अमेरिकी सैनिकों से की.

  6. बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लाइव पेज पर आपका स्वागत है. मैं बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े अब से दोपहर दो बजे तक आप तक अहम ख़बरें पहुंचाऊंगा.

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