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पहलू ख़ान की बेवा और मासूम बेटे को मिलेगा इंसाफ़?
- Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
- प्रकाशित
वहां मौजूद लोगों में से शायद ही किसी का ध्यान उसपर था, वो सब उसके पिता के क़त्ल की बात कर रहे थे कथित गौरक्षकों के हाथों; लेकिन उसकी गहरी भूरी आंखें सामने रखे पानी की बोतल पर घूम रही थीं - थोड़ा इधर-उधर जातीं और फिर उसी प्लास्टिक की छोटी लेबल लगी बोतल पर टिक जातीं.
आख़िर महज़ आठ-नौ साल का ही तो है वो. हां उसके बाप पहलू ख़ान ने मौत से पहले के बयान में जिनके नाम लिए थे, उनके ख़िलाफ़ पुलिस ने केस बंद करने की सोची है, उसके भाई को अदालत न जाने की धमकी मिल रही है, घर फाक़ाकशी की कगार पर है, लेकिन ये नया खिलौना भी तो बहुत दिलचस्प लग रहा है.
ख़ुद को न रोक पाता वो, आख़िरकार पानी की बोतल उठा लेता है और गटागट ... और हाथ इरशाद ख़ान के सामने रखे दूसरे 'नए खिलौने' की तरफ़ सरकने लगता है.
उसका भाई इरशाद उस दिन, पहली अप्रैल, शनिवार का हादसा बयां करते हैं जब कुछ लोगों ने 'अलवर के बाहर एक पुल के बाद उनकी ट्रक के सामने अपनी मोटर साइकिलें भिड़ा दीं और मवेशी ख़रीदने का सरकारी क़ाग़ज़ होने के बावजूद पहलू ख़ान और उनके दो बेटों को इतना पीटा कि दो दिनों बाद 55 साल के डेयरी मालिक पहलू की अस्पताल में मौत हो गई.'
सीआईडी क्या कह रही है
'हमने कहा कि भाई हमारे पास क़ाग़ज़ है, हम सरकारी मेले से इन्हें ख़रीद के लाए हैं, दुधारु गाय हैं, हम छुपा के नहीं ले जा रहे हैं, आप देख लीजिए. वो बोले हम बजरंग दल वाले हैं, आरएसएस वाले हैं, हमारे होते हुए बेहरोद होकर गाय गुज़रेगी नहीं. फिर वो मारपीट करने लगे, गाड़ी जला दी ... ', इरशाद कहते हैं.
लेकिन आख़िर पहलू ख़ान को कैसे पता चले उन लोगों के नाम, जबकि हमलावर बिल्कुल नये थे, प्रेस कांफ्रेस में बैठे हुए में से कोई सवाल करता है, 'वो आप ही एक दूसरे का नाम ले रहे थे .... सुधीर इसको खींच के इधर ला, ... हुकुम इसकी गाड़ी को खींचकर इधर ला ...... '
हाल में छपी ख़बरों के मुताबिक़ राजस्थान सीआईडी का कहना है कि पहलू ख़ान ने जिन छह लोगों के नाम लिये हैं वो घटनास्थल पर थे ही नहीं.
इरशाद जब ये सब बता रहे थे तो वो मां ज़ैबुना की गोद से थोड़ा और चिपक गया था अब उसकी हाथों में वो लेबल था, ब्लू कलर का, कभी होंठों पर चिपकाता, कभी आंखों पर ले जाता.
बहुत दिनों बाद शायद कोई खिलौना हाथ लगा था! मैं बाद में पूछता हूं कि क्या वो पढ़ता है, 'हां, क्लास चार में ...'
सर को आंचल से ढके ज़ैबुना पास ही खड़ी होती हैं, कहती हैं कि स्कूल पास ही है. ज़ैबुना को शौहर के साथ हुए हादसे की ख़बर पुलिस से मिली थी.
इरशाद बताते हैं कि छह लोगों के ख़िलाफ़ केस बंद किया जा रहा है और पांच को पहले ही ज़मानत मिल चुकी है जबकि 'वकील को उन्होंने 55 हज़ार रूपये बड़ी मुश्किल से जुटाकर दिए थे.'
ज़ैबुना कहती हैं इन पैसों का इंतज़ाम इरशाद ने किया, कैसे वो नहीं जानती हैं, लेकिन 'अब बेटे या घर में किसी को दूध का धंधा नहीं करने देंगी.'
तहसीन पुणावाला, जिन्होंने गौ रक्षकों के हाथों लोगों को पीट-पीटकर मार डालने के मामलों पर रोक के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल कर रखी है; पहलू ख़ान के केस को 22 सितंबर को देश की सबसे उंची अदालत में ले जा रहे हैं.
तहसीन कहते हैं कि उनकी याचिका गौ हत्या पर नहीं है लेकिन जिस तरह गौरक्षा के नाम पर कुछ लोगों को जिस तरह के अधिकार मिल गए हैं उसके खिलाफ़ है.
वो दावा करते हैं कि साल 2015 से 2017 के बीच भारत में 29 ऐसे मामले आये हैं जिसमें लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई है.
संसद के अगले सत्र में इस पर एक बिल भी पेश हो सकता है.
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