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बच्चे पैदा करने से क्या महिलाओं की उम्र कम होती है?
- Author, केट बॉवी
- पदनाम, ग्लोबल हेल्थ, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
जब बच्चे शरारत करते हैं, खाना खाने से मना करते हैं या सोने से इनकार करते हैं, तो माँएं मज़ाक में कहती हैं कि बच्चे उनकी उम्र कम कर रहे हैं.
एक नया शोध बताता है कि यह मज़ाक मुश्किल परिस्थितियों में रहने वाली महिलाओं के लिए हक़ीक़त के क़रीब हो सकता है.
ऐतिहासिक दस्तावेज़ों के विश्लेषण से अंदाज़ा लगा है कि कुछ महिलाओं की उम्र उनके हर बच्चे के साथ लगभग छह महीने तक कम हो गई थी. सबसे मुश्किल परिस्थितियों में रहने वाली महिलाओं पर इसका असर सबसे ज़्यादा पड़ा.
क्रमिक विकास का अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं ने पैरिश रिकॉर्ड्स का अध्ययन किया, जिनमें किसी आबादी में जन्म और मृत्यु का विवरण रखा जाता है.
इन रिकॉर्ड्स में 1866 से 1868 के बीच आए फ़िनलैंड के भीषण अकाल के समय जीवित 4,684 महिलाओं का ब्यौरा शामिल था.
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अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता नीदरलैंड्स के ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय के डॉक्टर यूअन यंग कहते हैं कि यह यूरोप के हालिया इतिहास के 'सबसे भयावह अकालों में से एक' था.
डॉक्टर यंग और उनकी टीम- प्रोफ़ेसर हन्ना डगडेल, प्रोफ़ेसर विरपी लुम्मा और डॉक्टर एरिक पोस्टमा- ने पाया कि अकाल के दौरान मां बनने वाली महिलाओं की उम्र हर बच्चे के साथ छह महीने कम हो गई.
शोध के परिणामों के अनुसार, इसका कारण यह हो सकता है कि इन माँओं ने अपनी बहुत सारी ऊर्जा अपनी कोशिकाओं को दुरुस्त करने के बजाय प्रजनन में लगा दी, जिससे बाद में बीमारियों का ख़तरा बढ़ गया.
लेकिन अकाल के पहले या बाद महिलाओं के मां बनने और उनकी जीवन अवधि के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया.
डॉक्टर यंग कहते हैं, "हम यह दुविधा केवल उन महिलाओं में पाते हैं जो अकाल के दौरान अपने जीवन के प्रजनन काल में थीं."
इससे पता चलता है कि महिलाएं बच्चे पैदा करने के वर्षों में जिस वातावरण में रह रही थीं, वह एक महत्वपूर्ण कारक था.
माँ बनने के बाद का असर
तो, ऐसा क्यों हुआ?
एक कारण तो यह हो सकता है कि बच्चों के होने से सेहत पर लंबे समय तक रहने वाले प्रभाव मुश्किल परिस्थितियों में और अधिक ख़राब हो जाते हैं.
यह तो लंबे समय से पता है कि मांओं को दिल से जुड़ी और मेटाबॉलिक बीमारियों का ख़तरा ज़्यादा होता है, जिसका एक कारण वजन बढ़ना और बढ़ा हुआ शारीरिक तनाव होता है.
डॉक्टर यंग कहते हैं, "एक और संभावित कारण यह हो सकता है कि इस अवधि में बच्चों को पालने, स्तनपान कराने और गर्भावस्था की प्रक्रिया ही मां के शरीर में ज़रूरी चीज़ों की कमी का कारण बनती है."
गर्भावस्था और स्तनपान में बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है. इसका मतलब यह है कि अकाल के दौरान नई माँ के पास अपने शरीर की कार्यप्रणाली सुचारू बनाए रखने के लिए और भी कम ऊर्जा बचती है, जिससे बाद में बीमारियों को रोकना मुश्किल हो जाता है.
डॉक्टर यंग कहते हैं, "यह संभव है कि इन आबादियों में, जहाँ महिलाएं बहुत अधिक बच्चे पैदा कर रही थीं और शायद हर जन्म के बीच में स्वास्थ्य लाभ के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल रहा था, स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव एक-दूसरे पर जुड़ते गए."
लेकिन वह यह भी कहते हैं कि चूंकि इस अध्ययन में ऐतिहासिक डेटा का विश्लेषण किया है, न कि प्रयोगशाला में नए प्रयोग से डेटा बनाया गया है, इसलिए वह पूरी तरह निश्चित नहीं हो सकते.
संतान और जीवन अवधि का 'संतुलन'
डॉक्टर यंग के शोध में यह भी पाया गया कि जिन महिलाओं के कई बच्चे थे, उनमें यह प्रभाव अधिक स्पष्ट था लेकिन सभी महिलाओं पर इसका असर समान नहीं था.
वह बताते हैं, "असल में यह दो अवधारणाएं हैं- बहुत बड़े परिवार और अकाल जैसी घटनाएं."
दशकों से वैज्ञानिक इस बात को लेकर उलझन में रहे हैं कि क्यों कुछ प्रजातियां बहुत संतान पैदा करती हैं और उनकी उम्र कम होती है- जैसे चूहे और कीट- जबकि कुछ प्रजातियों की उम्र लंबी होती है और उनके बच्चे कम होते हैं- जैसे हाथी, व्हेल और मनुष्य.
एक प्रमुख सिद्धांत यह है कि ऊर्जा को कोशिकाओं की मरम्मत से हटाकर प्रजनन में लगाया जाता है- जो बुढ़ापे में योगदान देता है.
क्या आधुनिक महिलाओं पर भी यही प्रभाव पड़ता है?
लेकिन क्या 200 साल पहले की महिलाओं पर शोध के निष्कर्ष 21वीं सदी की मांओं पर भी लागू हो सकते हैं?
डॉक्टर यंग कहते हैं, "इस बात को उस ऐतिहासिक अवधि के संदर्भ में समझना महत्वपूर्ण है, तब आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उतनी मज़बूत नहीं थीं."
"उस समय महिलाएं औसतन चार से पांच बच्चे पैदा करती थीं, जो आज के परिवारों की तुलना में कहीं अधिक हैं."
1800 से दुनिया भर के परिवारों में बच्चों की संख्या में भारी कमी आई है. 2023 में यह औसत एक महिला के सिर्फ़ दो से थोड़ा अधिक बच्चे तक पहुंच गया था- यह बदलाव शिक्षा, नौकरी, गर्भनिरोधक साधनों की उपलब्धता और बच्चों की मृत्यु दर में कमी के कारण आया.
हालांकि, कुछ देशों- जैसे नीजेर, चाड, सोमालिया और दक्षिण सूडान- में महिलाओं के आज भी आमतौर पर कम से कम चार बच्चे होते हैं.
हालांकि डॉक्टर यंग कहते हैं कि इस विषय पर और शोध की ज़रूरत है, लेकिन यह संकेत मिलते हैं कि दुनिया के कुछ हिस्सों में ये निष्कर्ष आज भी लागू हो सकते हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.