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ईरान और अमेरिका में डील तो हो गई लेकिन ये ख़तरे अब भी बाक़ी
- Author, एंथनी ज़र्चर
- पदनाम, उत्तर अमेरिकी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
अमेरिका और ईरान के बीच दुश्मनी ख़त्म करने के लिए हुए समझौते की घोषणा ने डोनाल्ड ट्रंप को उनके जन्मदिन पर एक बेहद शानदार तोहफ़ा दिया है, हालांकि यह काफ़ी अनिश्चितताओं में लिपटा हुआ है.
समझौते का एलान करते हुए सोशल मीडिया पर की गई अपनी पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट कमर्शियल जहाज़ों के लिए खुल जाएगा और अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटा लेगा.
ट्रंप ने रविवार को कहा, "तेल को निर्बाध बहने दो!"
उन्होंने आगे कहा कि पिछले अमेरिकी राष्ट्रपतियों की नाकामियों के उलट उन्होंने एक 'बेहतरीन समझौता' कराया है, जो 'पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा' लाएगा.
बेशक, इस तरह की बढ़ा-चढ़ाकर की गई बातें ट्रंप के लिए नई नहीं हैं.
पिछले साल ग़ज़ा युद्ध ख़त्म करने वाले समझौते को लेकर उनके 'हमेशा के लिए शांति' और 'ईमान, उम्मीद और ईश्वरीय शुरुआत' के दावे भी इतने ही बड़े थे, जबकि ज़मीनी हक़ीक़त इन दावों से काफ़ी दूर रही है.
इस तरह के बड़े दांव वाले कूटनीतिक समझौतों में क़ामयाबी या नाकामी आमतौर पर बारीक़ ब्योरों पर निर्भर करती है. और यहां यही ब्योरे बहुत कम उपलब्ध हैं.
तेल की आवाजाही पर अभी भी आशंका
रविवार शाम फ़ॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा, यह बात 'इस समझौते में शामिल है' और अमेरिका इसके पालन की पुष्टि कर सकेगा.
इनमें से कुछ बातें आगे की बातचीत और मौजूदा युद्धविराम को 60 दिन बढ़ाने के दौरान होने वाली 'तकनीकी' वार्ताओं में तय की जाएंगी.
लेकिन अगर दशकों से ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम से पीछे हटाने के लिए किए गए प्रयासों से कुछ साफ़ हुआ है, तो वो यह है कि कोई गारंटी नहीं होती, चाहे अमेरिका को इस 'समझौता एमओयू' में कितना भी भरोसा क्यों न हो.
मानो इस बात को और स्पष्ट करने के लिए, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने रविवार को एक बयान जारी कर कहा, "अंतिम बातचीत को तब तक टाल दिया जाएगा, जब तक समझौता ज्ञापन के तहत दूसरे पक्ष की प्रतिबद्धताओं को लागू नहीं किया जाता."
वे प्रतिबद्धताएं क्या हैं और ईरान उनकी क्या व्याख्या करता है, इससे यह तय होगा कि यह समझौता टिकेगा या नहीं.
ऊर्जा बाज़ार के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि होर्मुज़ स्ट्रेट से तेल की आवाजाही युद्ध से पहले के स्तर पर तुरंत लौटने की संभावना नहीं है.
बड़ी संख्या में फंसे तेल टैंकरों को हटाने, बारूदी सुरंगों को साफ़ करने और सामान्य तेल आपूर्ति व उत्पादन बहाल करने में कई सप्ताह लग सकते हैं.
आधिकारिक हस्ताक्षर होने में अभी कई दिन बाकी हैं. ऐसे में ईरान और अमेरिका के पास समझौते की सफलता सुनिश्चित करने के लिए अहम बिंदुओं पर सहमति बनाने का समय है, लेकिन इसके टूटने की आशंका भी बनी हुई है.
इसराइल का फ़ैक्टर
एक और अनिश्चित फ़ैक्टर इसराइल है.
यह हमेशा से तीन पक्षों वाला युद्ध रहा है और ट्रंप ने रविवार को वॉल स्ट्रीट जर्नल से कहा कि वह इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू से बेहद नाराज़ थे, क्योंकि उन्होंने इस सप्ताहांत लेबनान में हमले करने का आदेश दिया था. ट्रंप का मानना था कि इससे लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका ईरान समझौता पटरी से उतर सकता था.
समझौता कायम रहा, कम से कम इतनी देर तक कि इसकी सार्वजनिक घोषणा की जा सके.
लेकिन अगर इसराइल लेबनान में नए सैन्य अभियान शुरू करता है, तो ईरान फिर से होर्मुज़ स्ट्रेट बंद करने का फ़ैसला कर सकता है और एक बार फिर वैश्विक अर्थव्यवस्था को ख़तरे में डाल सकता है.
अपनी टिप्पणी में वेंस ने यह भी माना कि इस युद्ध ने ऊंची ऊर्जा क़ीमतों और उनसे जुड़े आर्थिक असर की वजह से कई अमेरिकियों को परेशान किया है.
उन्होंने कहा, "अमेरिकी लोगों के लिए मेरा मुख्य संदेश है, धन्यवाद."
साथ ही उन्होंने वादा किया कि ईंधन क़ीमतें कम होना शुरू हो जाएंगी.
ट्रंप को कितना फ़ायदा
तेल के दाम कितनी जल्दी कम होते हैं और आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहे अमेरिकियों के लिए यह कितनी जल्दी राहत के रूप में दिखाई देता है, इससे काफ़ी हद तक यह तय होगा कि नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले रिपब्लिकन पार्टी पर बढ़ता दबाव कम होता है या नहीं.
हालिया पोल्स के मुताबिक़, ट्रंप और उनकी पार्टी को जनता की बढ़ती नाराज़गी का सामना करना पड़ रहा है.
यूगोव सर्वे में पाया गया कि 63% अमेरिकी अर्थव्यवस्था को संभालने के उनके तरीक़े से असंतुष्ट हैं, जबकि 57% लोगों का मानना है कि अर्थव्यवस्था और बिगड़ रही है.
कम से कम इतना तो है कि रविवार का समझौता जारी संघर्ष से पैदा हुए कुछ आर्थिक दबाव को कम करने में मदद कर सकता है, भले ही उसे पूरी तरह ख़त्म न कर सके.
अगर पेट्रोल की क़ीमतें वास्तव में गिरना शुरू होती हैं, तो यह अमेरिकियों के लिए इस बात का ठोस संकेत हो सकता है कि हालात बेहतर हो रहे हैं.
यह जंग शुरू होने से पहले जैसी स्थिति थी, उसकी ओर बढ़ाया गया एक अहम क़दम है, भले ही ट्रंप के बड़े लक्ष्य फ़िलहाल पूरे नहीं हुए हों और उन्हें अपने देश में अब भी राजनीतिक जोखिमों का सामना करना पड़ रहा हो.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.