अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन: ट्रंप की पार्टी की हार का दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?

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अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स ने सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत हासिल कर लिया है. इसके साथ ही अब डोनाल्ड ट्रंप के बाकी बचे कार्यकाल के दौरान कांग्रेस पर डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण रहेगा.
चुनाव के बाद कांग्रेस में हुए इस बदलाव को राष्ट्रपति ट्रंप के लिए झटका माना जा रहा है. चुनाव परिणामों के बाद ट्रंप ने कहा, "ईरान के साथ युद्ध और बढ़ती महंगाई के कारण रिपब्लिकन पार्टी के कई उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा."
वहीं, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि हमारी हार ईरान युद्ध के कारण हुई है.
बीबीसी न्यूज़ के पत्रकारों ने बताया कि बाकी दुनिया में इन चुनाव परिणामों का क्या असर पड़ेगा.
ट्रंप की हार पर क्या बोला ईरान

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लंदन में मौजूद बीबीसी न्यूज़ पर्शियन की वरिष्ठ रिपोर्टर ग़ोंचेह हबीबियाज़ाद के मुताबिक, "ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई का कहना है कि जो लोग सोचते हैं कि अमेरिकी राजनीति में हुए बदलाव से ईरान के प्रति उनकी दुश्मनी बदल जाएगी, वे ग़लत हैं."
"ख़ामेनेई ने यह धमकी भी दी कि अगर अमेरिका ने ईरान पर दोबारा हमला किया, तो जवाबी कार्रवाई और भी ज़्यादा भयावह होगी."
मोजतबा ख़ामेनेई ने 28 फ़रवरी को अमेरिकी-इसराइली हमलों में मारे गए अपने पिता अली ख़ामेनेई के बाद पद संभाला था. हालांकि, वे महीनों से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं.
ख़ामेनेई ने ये बातें बुधवार को जारी छह पन्नों के संदेश में लिखी हैं. यह संदेश 1979 में तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर हुए क़ब्ज़े की याद में जारी किया गया है.
खाड़ी के अरब देशों पर असर

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बीबीसी के सुरक्षा संवाददाता फ़्रैंक गार्डनर के मुताबिक, "यह हार 'प्रोजेक्ट ट्रंप' के लिए एक चुनावी झटका है, जिसे किसी दूसरे दौर में खाड़ी के अरब देशों के लिए भी झटका माना जा सकता था."
राष्ट्रपति ट्रंप और उनके परिवार के इनमें से कई देशों के साथ निजी और कारोबारी रिश्ते हैं. दुबई में एक ट्रंप इंटरनेशनल गोल्फ़ कोर्स है. क़तर ने उन्हें 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर का विमान तोहफ़े में दिया है.
संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई, क़तर और सऊदी अरब ने मिलकर ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर की फ़र्म एफ़िनिटी कैपिटल में अरबों डॉलर का निवेश किया है.
ट्रंप ने 2017 में अपने पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान भी रियाद को अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए चुना था.
सऊदी अरब के रिश्ते डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता और पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ अच्छे नहीं थे. आपको साल 2022 की वह घटना याद होगी, जिसमें सऊदी क्राउन प्रिंस के साथ बाइडेन हाथ मिलाने से बचते नज़र आए थे.
वहीं, सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद को ज़हरीली गैस के इस्तेमाल की सज़ा न दे पाने के बाद खाड़ी देशों के नेताओं ने राष्ट्रपति ओबामा के प्रति नाराज़गी जताई थी.
लेकिन इस साल ईरान के साथ युद्ध ने ट्रंप के बारे में लोगों की सोच बदल दी है.
इस घटना पर एक टिप्पणीकार ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने खाड़ी में आग लगा दी.
"इसकी शुरुआत 28 फ़रवरी से हुई थी. और अब भी यह डर बना हुआ है कि वे युद्ध को फिर भड़का सकते हैं. इसके जवाब में ईरान ने पलटवार किया, तो कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे तबाह हो गए."
चुनावी नतीजों में ईरान कहां?

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वॉशिंगटन डीसी से बीबीसी की रिपोर्टर रेबेका पीडर के मुताबिक, "उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का कहना है कि रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार का कारण ईरान के साथ युद्ध है."
"इस युद्ध की वजह से अमेरिका में महंगाई बढ़ गई है, जिसका असर पेट्रोल पंपों पर बढ़ी कीमतों के रूप में दिखता है."
ट्रंप ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में प्रचार के दौरान पेट्रोल की क़ीमतें 2 डॉलर प्रति गैलन से नीचे लाने का वादा किया था. जबकि अक्टूबर 2026 में इसकी औसत क़ीमत 4.31 डॉलर प्रति गैलन थी. उन्होंने यह वादा भी किया था कि दूसरे कार्यकाल में कोई नया युद्ध नहीं होगा.
लेकिन मिडटर्म चुनाव से ठीक एक दिन पहले अमेरिका ने एक ईरानी द्वीप पर हमले किए. वहीं, ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें युद्ध शुरू करने का कोई पछतावा नहीं है.
चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान के मुख्य वार्ताकार ने कहा, "अमेरिकी वोटरों ने युद्ध को पसंद नहीं किया है."
लेकिन ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई ने एक बयान में कहा है कि उन्हें नतीजों के बाद भी अमेरिकी नीति में बदलाव की उम्मीद नहीं है.
बीबीसी के अमेरिकी सहयोगी सीबीएस न्यूज़ से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह युद्ध "तभी ख़त्म होगा जब मैं कहूंगा कि ख़त्म हो गया है."
चीन का पलड़ा भारी?

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बीबीसी न्यूज़ की चीन संवाददाता लौरा बिकर के मुताबिक, "जैसे-जैसे नतीजे आएंगे, चीन को इसमें एक मौक़ा नज़र आएगा."
चीन और अमेरिका के बीच इस सदी की सबसे बड़ी सुपरपावर बनने की दौड़ है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग को शायद लगता है कि उनका पलड़ा भारी है. वे चीन में डोनाल्ड ट्रंप का स्वागत करने की तैयारी कर रहे हैं.
अमेरिकी उद्योग को सस्ते चीनी सामान से बचाने के लिए ट्रंप ने अमेरिका आने वाले चीनी सामान पर टैरिफ़ लगाया.
लेकिन शी जिनपिंग ने जवाब में और भारी टैरिफ़ लगा दिया, जिससे ट्रंप की योजना नाकाम हो गई. नतीजा यह हुआ कि अमेरिकियों के लिए कई चीज़ें महंगी हो गईं. इनमें खिलौने और कपड़ों जैसी छोटी-छोटी चीज़ें भी शामिल थीं.
चीन ने अमेरिकी कृषि उत्पादों की ख़रीद भी बंद कर दी. इससे ट्रंप का समर्थन करने वाले राज्यों के किसानों को भी नुक़सान हुआ था.
जनवरी के आखिरी सप्ताह में दोनों देशों के बीच चल रहा टैरिफ़ युद्ध थम सकता है. चीन को लग सकता है कि मिडटर्म चुनाव के परिणामों के बाद ट्रंप समझौता करने की कोशिश करेंगे.
इस दौरे से शी जिनपिंग को चीन के लिए एक बेहतर समझौते की उम्मीद है.
रूस को अभी भी उम्मीद

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बीबीसी रूस के संपादक स्टीव रोज़ेनबर्ग के मुताबिक, "व्लादिमीर पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने रूसी मीडिया से कहा, 'हम पूरी उम्मीद करते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप अपने शांति प्रयास जारी रखेंगे.'"
पेस्कोव ने कहा, "जल्द ही त्रिपक्षीय बैठक का एक और दौर होगा." उनका इशारा अगले हफ़्ते अबू धाबी में रूस, यूक्रेन और अमेरिका के बीच होने वाली त्रिपक्षीय वार्ता की ओर था.
उन्होंने आगे कहा, "हमने मेलानिया ट्रंप के सफल मानवीय शांति प्रयासों को देखा है." उनका इशारा हाल ही में रूसी क़ब्ज़े वाले ओलेशकी में चलाए गए मानवीय अभियान की ओर था.
उन्होंने यह भी कहा, "हमें उम्मीद है कि ये अभियान जारी रहेंगे."
स्टीव के मुताबिक, "अगर शांति प्रयासों का कोई नतीजा नहीं निकलता, तो रूस शायद पहले की तरह यूक्रेन और यूरोप को ही दोषी ठहराएगा."
"अब रूस इसके लिए डेमोक्रेट्स और मिडटर्म चुनाव को भी दोष दे सकता है. लेकिन, वह शायद डोनाल्ड ट्रंप को दोष नहीं देगा. इसकी वजह यह है कि रूस ने ट्रंप के साथ अपने रिश्तों में काफ़ी निवेश किया है. यह भी साफ़ है कि रूस को अभी भी ट्रंप प्रशासन के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने की उम्मीद है."
चुनाव परिणामों पर दुनिया की मीडिया ने क्या लिखा

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बीबीसी मॉनिटरिंग ने लिखा, "यूक्रेन, ईरान और पूरे मिडिल ईस्ट के लोगों के लिए अमेरिकी मिडटर्म चुनाव घरेलू राजनीति से कम और इस बात से ज़्यादा जुड़े थे कि इन नतीजों का जारी युद्धों पर क्या असर पड़ेगा."
यूक्रेन में टिप्पणीकारों का ध्यान ट्रंप के युद्ध संचालन पर रहा. पत्रकार रोमन त्सिम्बाल्युक ने तंज़ कसते हुए कहा, "राष्ट्रपति ने हर युद्ध सुलझा दिया, लेकिन अपना युद्ध हार गए."
यह ट्रंप के उन बार-बार किए गए दावों की ओर इशारा था, जिनमें वे दुनिया के संघर्ष ख़त्म करने की बात करते हैं.
यूक्रेन के पावर प्लांट्स पर रूस के हमले जारी हैं. रूस में कुछ लोगों को उम्मीद है कि डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत से रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग और तेज़ हो सकती है.
वहीं, दूसरे लोगों को डर है कि अमेरिका में राजनीतिक गतिरोध से यूक्रेन को लेकर अमेरिकी नीति में नई अनिश्चितता पैदा हो सकती है.
रूस ने खुलकर उम्मीद जताई है कि ट्रंप युद्ध ख़त्म कराने के लिए मध्यस्थता जारी रखेंगे. इस महीने रूस-यूक्रेन वार्ता होने की उम्मीद है.
लेकिन युद्ध का समर्थन करने वाले रूस के लोगों ने चेतावनी दी है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के नियंत्रण वाली कांग्रेस रूस के साथ भविष्य के किसी भी समझौते पर रोक लगा सकती है. साथ ही, वह रूस पर लगे प्रतिबंधों में कोई ढील नहीं देगी.
इस बीच, ईरान के नेतृत्व और सरकार से जुड़े मीडिया ने डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत को ट्रंप की युद्ध नीति की सार्वजनिक आलोचना बताया. ईरानी मीडिया ने ईरान के साथ सैन्य टकराव की बढ़ती राजनीतिक क़ीमत की ओर इशारा किया.
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