मिलावटी मावे से बनी मिठाइयां खाने के क्या हैं ख़तरे?

इमेज स्रोत, Subhendu Sarkar/LightRocket via Getty Images
- Author, शुभांगी मिश्रा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
दिवाली पर मिठाई ख़रीदते वक़्त सिर्फ़ उसकी कैलोरी ही नहीं, बल्कि यह जानना भी ज़रूरी है कि कहीं उसमें मिलावट तो नहीं है? उसमें इस्तेमाल किया गया खोया और घी- असली है या नहीं?
दिवाली में मिठाइयों और नमकीन की मांग में भारी बढ़ोतरी होती है. इस दौरान असली और मिलावटी उत्पादों के बीच फ़र्क करना भी मुश्किल होता है.
तीन नवंबर को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ख़ुद तुर्कमान गेट पहुंचीं और वहां मिलावटी खोया ज़ब्त करने की कार्रवाई की.
उन्होंने इस कार्रवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा, "त्योहारों के दौरान और पूरे साल दिल्ली में छापेमारी तेज़ की जाएगी. मिलावट के ख़िलाफ़ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी."

इमेज स्रोत, x.com/gupta_rekha
समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, "दिल्ली के खाद्य सुरक्षा विभाग ने पिछले दो महीनों में बाज़ारों से 4,000 किलो से ज़्यादा खाद्य पदार्थ नष्ट किए. इनमें खोया, घी, पनीर और मिठाइयां शामिल थीं. विभाग की ओर से जांच किए गए 290 नमूनों में से 85 असुरक्षित या तय मानकों से नीचे पाए गए."
मोरी गेट की खोया मंडी, ओखला और जनकपुरी समेत दिल्ली के कई इलाक़ों में छापेमारी की गई. इन कार्रवाइयों के दौरान कुल 30 अभियान चलाए गए और बड़ी मात्रा में खाद्य पदार्थ ज़ब्त कर नष्ट किए गए.
लेकिन त्योहारों के दौरान मिलावटी मिठाइयों की बिक्री क्यों बढ़ जाती है? इनकी पहचान कैसे करें? और इन्हें खाने से हमारी सेहत पर क्या बुरा असर पड़ सकता है? आइए, समझते हैं.
त्योहारों में क्यों बढ़ती है मिलावट?

इमेज स्रोत, NARINDER NANU/AFP via Getty Images
सितंबर 2026 में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफ़एसएसएआई) ने 'स्पेशल फेस्टिव ड्राइव' को लेकर एक सर्कुलर जारी किया था.
इसमें कहा गया था कि नवरात्रि और दिवाली से पहले मिठाइयों, तेल, पनीर और खोये जैसे खाद्य पदार्थों की मांग में तेज़ी से बढ़ोतरी होती है.
इस दौरान बाज़ार में मिलावटी, नकली और असुरक्षित खाद्य उत्पादों के पहुंचने की आशंका को देखते हुए एफ़एसएसएआई ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी और जांच बढ़ाने को कहा था.
सर्कुलर में कहा गया था, "अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि वे त्योहारों के दौरान अपने-अपने इलाकों में खाने-पीने की दुकानों का निरीक्षण करें और खाने के सामान के नमूने इकट्ठा करें. इन अभियानों में उन इलाकों पर खास ध्यान दिया जाए, जहां मिलावट की आशंका अधिक है और जिन्हें संवेदनशील स्थानों के रूप में चिह्नित किया गया है."
अख़बार 'मिंट' की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत में संगठित मिठाई निर्माताओं की कुल सालाना बिक्री का क़रीब 35 फ़ीसदी कारोबार त्योहारों के मौसम में होता है.
मिलावटी खोए से बनी मिठाइयों से क्या नुकसान होता है?

इमेज स्रोत, Getty Images
आपके लिए नितिन श्रीवास्तव द्वारा चुनी गईं खास कहानियाँ
और जानें
समाप्त
दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. अनिल अरोड़ा ने बीबीसी से बातचीत के दौरान बताया, "त्योहारों के समय मांग इतनी बढ़ जाती है कि कई बार आपूर्ति उस मांग को पूरा नहीं कर पाती. ऐसे में बाज़ार में मिलावटी सामान मिलने की आशंका बढ़ जाती है."
हमने इस बारे में मिठाई और नमकीन निर्माताओं के संगठन से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया.
दिल्ली की मोरी गेट मंडी के खोया मावा व्यापार संघ प्रमुख राकेश तोमर ने बीबीसी न्यूज़ हिंदी से बातचीत में बताया कि मिलावटी मिठाइयों की ज़ब्ती के बाद मंडी के कारोबार पर असर पड़ा है.
उन्होंने कहा, "इस साल कारोबार बिल्कुल बैठ गया है. पिछले सालों के मुक़ाबले कम से कम 40 फ़ीसदी की गिरावट आई है. बड़े उद्योगों की कंपनियों का माल बिकवाने के लिए यह सब किया जा रहा है. हम दिल्ली के छोटे कारोबारी हैं और हमारे खोये में कोई मिलावट नहीं है. हमारा सामान जब्त करते वक्त हमें इसकी वजह भी नहीं बताई जाती."
हमने इन आरोपों पर दिल्ली के खाद्य सुरक्षा आयुक्त से ईमेल के ज़रिए जवाब मांगा, लेकिन उनकी ओर से अब तक कोई जवाब नहीं मिला है. उनका जवाब मिलते ही कॉपी में शामिल किया जाएगा.
सरकार क्या करती है?

इमेज स्रोत, sb stock/getty images
एफ़एसएसएआई त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए विशेष अभियान चलाने की सलाह देता है.
इसके तहत मिठाई की दुकानों, डेयरियों, गोदामों और खाद्य पदार्थ बनाने वाली इकाइयों का निरीक्षण किया जाता है और जांच के लिए नमूने लिए जाते हैं.
इसके अलावा, एफ़एसएसएआई ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 'फ़ूड सेफ़्टी ऑन व्हील्स' नाम की मोबाइल खाद्य जांच प्रयोगशालाओं को प्रमुख बाज़ारों में तैनात करने को कहा है.
इनके ज़रिए खाद्य पदार्थों की मौक़े पर शुरुआती जांच की जा सकती है. हालांकि, सभी तरह की मिलावट की पुष्टि के लिए प्रयोगशाला में विस्तृत जांच ज़रूरी होती है.
अगर कोई दुकानदार या निर्माता मिलावटी या असुरक्षित खाद्य पदार्थ बेचते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके ख़िलाफ़ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई की जा सकती है.
इसमें जुर्माना लगाने, लाइसेंस निलंबित या रद्द करने और गंभीर मामलों में जेल की सज़ा तक का प्रावधान है.
एफ़एसएसएआई ने लोकसभा को बताया था कि वित्त वर्ष 2024-25 में खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत कुल 12,057 कानूनी मामले शुरू किए गए. इनमें 11,358 सिविल मामले और 699 आपराधिक मामले थे.
इसी अवधि में 8,636 सिविल मामलों में जुर्माना लगाया गया. सिविल मामलों में कुल क़रीब 36.43 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया, जबकि 179 आपराधिक मामलों में सज़ा हुई और क़रीब 28.23 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया.
खाद्य पदार्थों की जांच में अगर कोई नमूना तय मानकों पर खरा नहीं उतरता, तो गड़बड़ी की गंभीरता के हिसाब से संबंधित कारोबारी के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाती है.
मिलावटी या असुरक्षित खाद्य पदार्थों की बिक्री की शिकायत उपभोक्ता एफ़एसएसएआई के 'फूड सेफ्टी कनेक्ट' ऐप और ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था के ज़रिए भी कर सकते हैं.
सेहत को कितना नुक़सान होता है?

इमेज स्रोत, anubhav saxena/getty images
मिलावटी खाना खाने से सेहत पर कई तरह के बुरे असर पड़ सकते हैं. ये असर कम समय के लिए भी हो सकते हैं और लंबे समय में भी दिखाई दे सकते हैं.
गंगाराम अस्पताल के डॉ. अनिल अरोड़ा का कहना है कि त्योहारों के दौरान बाज़ार में मिलावटी खाद्य पदार्थ बड़ी तादाद में उपलब्ध होते हैं.
उनके मुताबिक़, "मिलावटी मिठाई या नमकीन खाने का सबसे गंभीर असर पाचन तंत्र पर पड़ सकता है. अगर खाने में ऐसे केमिकल मिले हों जिनसे पेट में सूजन हो सकती है या एसिड का उत्पादन बढ़ सकता है, तो आपको मितली, पेट में दर्द, उल्टी या ऐंठन हो सकती है. दूषित खाना आंतों तक पहुंचकर संक्रमण भी पैदा कर सकता है."
उन्होंने यह भी बताया कि लंबे समय तक बड़ी मात्रा में ऐसे खाद्य पदार्थ खाने से उनमें मौजूद कुछ रसायन शरीर में जमा हो सकते हैं. इनका नुक़सान शुरुआत में दिखाई नहीं देता, लेकिन समय के साथ ये शरीर की मेटाबॉलिक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं.
वो कहते हैं, "ये चीज़ें खास तौर पर लिवर को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे शरीर में कार्बोहाइड्रेट, ग्लूकोज़ और फैट का मेटाबॉलिज़्म बिगड़ सकता है. अगर भारी धातुएं दिल, दिमाग़ और किडनी जैसे अंगों में जमा हो जाएं, तो हेवी मेटल पॉइज़निंग हो सकती है. इससे धीरे-धीरे शरीर को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है."
एफ़एसएसएआई ने उपभोक्ताओं के लिए भी दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनमें खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट की शुरुआती पहचान के तरीक़े बताए गए हैं.
एफ़एसएसएआई की 'डिटेक्ट अडल्टरेशन विद रैपिड टेस्ट' हैंडबुक में दूध और दूध से बने उत्पादों, तेल, घी, मसालों और अनाज समेत कई खाद्य पदार्थों में आम मिलावट की पहचान के लिए घर पर किए जा सकने वाले 50 से ज़्यादा टेस्ट बताए गए हैं.
हालांकि, डॉ. अरोड़ा का कहना है कि ये तरीक़े व्यावहारिक तौर पर हमेशा कारगर नहीं हो सकते.
उन्होंने कहा, "खाने की जांच की ज़िम्मेदारी सरकार की है. कोई भी दवा या खाद्य पदार्थ, जो किसी भी नुक्कड़ पर बिक रहा है, वह प्रमाणित और शुद्ध होना चाहिए. एक आम उपभोक्ता से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह हर उत्पाद की जांच करता रहे. इसकी ज़िम्मेदारी सरकार और खाद्य नियामक की है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह
कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.






















