आप इस वेबसाइट का टेक्स्ट-ओनली वर्शन देख रहे हैं जो कम डेटा खर्च करता है. सभी तस्वीरों और वीडियो के साथ वेबसाइट का मुख्य वर्शन देखें.
पुरुलिया में क्या हुआ जिसकी बीजेपी पालघर लिंचिंग से कर रही है तुलना
पश्चिम बंगाल के पुरुलिया ज़िले में महाराष्ट्र के पालघर जैसी घटना होते होते रह गई.
यहां मकर संक्रांति के मौके़ पर गंगासागर जाने वाले तीन साधुओं की बच्चा चोर के संदेह में स्थानीय लोगों ने पिटाई की और उनके कपड़े फाड़ दिए.
बाद में मौक़ै पर पहुंची पुलिस ने उनको भीड़ से बचाया. पुलिस ने इस घटना के सिलसिले में अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ एक मामला दर्ज कर लिया है. इस मामले में अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
यह घटना 11 जनवरी की है. लेकिन इसका वीडियो शुक्रवार शाम को सामने आया. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोगों ने इन साधुओं के कपड़े फाड़ दिए हैं सरेआम उनकी पिटाई कर रहे हैं.
घटना पर राजनीति हुई तेज़
इसका वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा ने राज्य की ममता बनर्जी सरकार पर जमकर निशाना साधा है.
वहीं टीएमसी नेता और मंत्री शशि पंजा ने कहा है कि 'गांव वालों ने संदेह के आधार पर साधुओं से मारपीट की थी. इस मामले में 12 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है. लेकिन बीजेपी इस मुद्दे पर लोगों को गुमराह करने का प्रयास कर रही है.'
पुलिस ने बताया कि इस मामले में किसी भी पक्ष ने पुलिस में कोई शिकायत नहीं दर्ज कराई है.
स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक, इन साधुओं ने तीन नाबालिग लड़कियों से रास्ता पूछा था. लेकिन भाषा समझ में नहीं आने की वजह से लड़कियां डर कर चिल्लाते हुए वहां से भाग गईं.
इसके बाद स्थानीय लोगों ने उन साधुओं को घेर लिया और मारपीट करने लगे. कुछ देर बाद वहां पहुंची पुलिस की टीम साधुओं को भीड़ से बचा कर कासीपुर थाने ले गई.
उसके बाद स्थानीय ग्रामीण अस्पताल में उनकी प्राथमिक चिकित्सा कराई गई. जांच में उनके पास मौजूद तमाम काग़ज़ात सही पाए गए.
पुलिस क्या बोली
पुरुलिया के पुलिस अधीक्षक अभिजीत बनर्जी ने बताया कि इस घटना के सिलसिले में एक मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच की जा रही है.
उन्होंने बताया कि अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. बाकी अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है.
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, "गंगासागर जाने वाले साधु रास्ता भूल गए थे. उन्होंने एक जगह रुक कर तीन लड़कियों से रास्ता पूछा था. भाषा नहीं समझने के कारण लड़कियां इन साधुओं को देख कर डर गईं और चिल्लाते हुए वहां से भाग गईं.
"इससे स्थानीय लोगों को लगा कि शायद इन साधुओं ने उनसे छेड़छाड़ की है और यह लोग बच्चा चुराने वाले गिरोह के सदस्य हैं. पुलिस ने उन तीनों लड़कियों के माता-पिता से भी बात की. लेकिन उन्होंने साधुओं के ख़िलाफ़ कोई शिकायत नहीं की है."
पुलिस के मुताबिक़, बाद में उन साधुओं को सुरक्षित गंगासागर की ओर रवाना कर दिया गया.
बीजेपी ने क्या कहा
प्रदेश भाजपा ने अपने एक ट्वीट में इस घटना के लिए ममता बनर्जी सरकार पर हमला करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री को इस पर शर्म आनी चाहिए. राज्य में हिंदू साधुओं के साथ हुई यह घटना शर्मनाक है.
दूसरी ओर, पार्टी की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी इसके लिए सरकार को कठघरे में खड़ा किया है.
उन्होंने अपने एक ट्वीट में कहा है कि "पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में पालघर जैसी लिंचिंग हुई है. क्या बंगाल में हिंदू होना अपराध है? साधु मकर संक्रांति पर्व के लिए गंगासागर जा रहे थे. अपराधियों ने उनके कपड़े फाड़े और पीटाई की."
उन्होंने आरोप लगाया कि "मारपीट करने वाले लोग सत्ताधारी टीएमसी से जुड़े हैं. ममता बनर्जी सरकार में शाहजहां शेख जैसे आतंकी को सुरक्षा दी जा रही है लेकिन साधुओं को पीटा जा रहा है. पश्चिम बंगाल में हिंदुओं के साथ अत्याचार किए जा रहे हैं."
पालघर की घटना से तुलना
महाराष्ट्र के पालघर के गढ़चिंचले गांव में 16 अप्रैल 2020 को दो साधुओं और उनके ड्राइवर की 500 से अधिक लोगों की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. जिसके बाद 21 अप्रैल 2020 को मामला जांच के लिए सीआईडी को सौंपा गया.
उन साधुओं की हत्या बच्चा चोरी गिरोह का सदस्य होने के शक पर हुई थी. ऐसी अफ़वाह थी कि इन गिरोह के सदस्य इलाके़ में साधु, डॉक्टर और पुलिस की वेशभूषा पहनकर बच्चा चोरी करते थे. जिसकी वजह से ड्राइवर और दोनों साधुओं की हत्या कर दी गई थी.
यह घटना उस समय हुई थी जब तीनों लोग कार से सूरत में एक व्यक्ति के अंतिम संस्कार के लिए जा रहे थे. कासा पुलिस स्टेशन में पालघर में हुई इस घटना को लेकर तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए थे.
घटना के बाद इलाके में हंगामा हो गया था. उसके बाद राज्य सरकार ने कासा पुलिस के कुछ पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया था. साथ ही सरकार ने 35 से ज़्यादा पुलिस कांस्टेबल और पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर भी कर दिया था.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)