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बॉलीवुड की फ़िल्मों पर क्या पड़ेगा आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का असर?
- Author, देवांग शाह
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, दिल्ली
- प्रकाशित
जिस तेज़ी से वक्त बदल रहा है उसी तेज़ी से विज्ञान और तकनीक भी बदल रही है. फ़िल्मों में भी नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल हो रहा है.
बदलते वक्त के साथ भारतीय फ़िल्म उद्योग में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल को लेकर चर्चा छिड़ रही है, लेकिन बॉलीवुड में एआई कहां फिट बैठती है?
एआई ने हॉलीवुड में पहले ही हलचल मचा रखी है. वहां स्क्रिप्ट लेखकों ने लंबी हड़ताल की लेकिन भारतीय फ़िल्म उद्योग में इस मुद्दे पर बहुत अधिक चर्चा नहीं हुई, जहां दसियों हज़ार लोगों काम करते हैं.
बॉलीवुड के कुछ निर्माता फिलहाल एआई के ख़तरे को कम करके दिखा रहे हैं जबकि बाकियों को लगता है कि इस पर गंभीरता से विचार किए जाने की ज़रूरत है.
जानेमाने निर्देशक शेखर कपूर की डेब्यू फ़िल्म मासूम (1983) में एक ऐसी महिला की कहानी को दिखाया गया है जो अपने पति के विवाहेतर संबंध से पैदा हुए बच्चे को स्वीकार करती है.
यह फ़िल्म बेवफ़ाई और सामाजिक बंधनों से जुड़ी जलिटता को नाज़ुक ढंग से निभाती है. लेकिन इस भावनात्मक फ़िल्म के सिक्वल के लिए शेखर कपूर ने एआई टूल चैटजीपीटी का इस्तेमाल करने का फ़ैसला किया.
शेखर कपूर बताते हैं कि वो इस बात से दंग रह गए कि एआई टूल ने कैसे प्लाट में मौजूद नैतिक जटिलताओं की बारीकियों को समझ लिया.
वो कहते हैं कि एआई ने जो पटकथा तैयार की उसमें दिखाया कि बच्चा बड़ा होकर कैसे अपने पिता से नाराज़गी पाल लेता है और यहीं से पहली फ़िल्म से रिश्ते में एक बदलाव दिखता है.
शेखर कपूर कहते हैं कि एआई के साथ भविष्य बहुत अव्यवस्थित होगा क्योंकि पटकथा लेखकों का एक समूह जिस काम को करने में हफ़्तों लगा देंगे, उसे मशीन लर्निंग कुछ ही सेकेंडों में कर देगी.
एआई पर कब शुरू होगी बात?
साल 2019 में आई डेलॉयट की एक रिपोर्ट के अनुसार, हर साल बनने वाली फ़िल्मों के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा फ़िल्म उद्योग भारत में है. इसमें लगभघ साढ़े आठ लाख लोग काम करते हैं.
जैसे-जैसे एआई टूल और विकसित होते जा रहे हैं और इंटरनेट रश्मिका मंदाना और आलिया भट्ट जैसे लोकप्रिय भारतीय सितारों के डीप फ़ेक वीडियो से भर रहा है, इसके इस्तेमाल पर आर्थिक और नैतिक दोनों तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं.
टीवी और फिल्म निर्माण में एआई का इस्तेमाल, इस साल अमेरिका में अभिनेताओं और स्क्रिप्ट लेखकों की हड़ताल के मुख्य मुद्दों में से एक रहा था, जिससे हॉलीवुड कई महीनों तक ठप रहा.
प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष सिद्धार्थ रॉय कपूर कहते हैं, "अभी तक भारत में एआई के इस्तमाल को लेकर कोई व्यवस्थित बातचीत नहीं शुरू हुई है. लेकिन अब समय आ गया है क्योंकि एआई टूल्स और भी स्मार्ट होते जा रहे हैं."
वो कहते हैं, "आज जहां हम हैं, एआई के साथ अगले तीन से छह महीने में स्थिति बिल्कुल अलग होगी."
एआई के मामले में भारत अभी कहां है?
रेड चिलीज़ वीएफ़एक्स चलाने वाले हैरी हिंगोरानी और केतन यादव का कहना है कि एआई अभी उस जगह से कोसों दूर है जहां बटन दबाने पर सब कुछ तैयार मिलेगा.
रेड चिलीज़ वीएफ़एक्स को बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख़ ख़ान ने दो दशक पहले शुरू किया था.
इस साल इस स्टूडियो ने शाहरुख़ की दो फ़िल्मों 'जवान' और 'पठान' के विज़ुअल इफ़ेक्ट का ज़िम्मा संभाला था. ये दोनों ही फ़िल्में बॉक्स ऑफ़िस पर सबसे बड़ी हिट फ़िल्में थीं.
यादव और हिंगोरानी कहते हैं कि वो एआई टूल्स को आइडियाज़ के लिए इस्तेमाल करते रहे हैं लेकिन उन्हें लगता है कि फ़ोर-के रिज़ोल्यूशन वाले मोशन पिक्चर्स का मुक़ाबला करने से अभी काफ़ी दूर है.
लेकिन निर्देशक गुहान सेनियाप्पन इस विचार को चुनौती देने के मिशन पर हैं. वो आने वाली तमिल फ़िल्म 'वीपन' का निर्देशन कर रहे हैं, जो भारत की ऐसी पहली फ़ीचर फ़िल्म होने वाली है जिसमें ढाई मिनट का सिक्वेंस पूरी तरह एआई से तैयार किया जाएगा.
वो कहते हैं, "हम एक सुपरह्यूमन चरित्र की कहानी पर काम कर रहे हैं जिसमें बहुत सारे एक्शन सिक्वेंस हैं और मैं कहानी को एक नए तरीक़े से दिखाना चाहता हूं."
इसके मुख्य अभिनेता सत्यराज के युवा वर्ज़न को जेनरेट करने के लिए उनकी तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है.
सेनियाप्पन कहते हैं, "लाइव एक्शन के लिए एआई का इस्तेमाल एक सस्ता विकल्प है."
एआई जेनरेटेड विज्ञापन अभियान
बॉलीवुड सितारों में शाहरुख़ ख़ान, साल 2021 में एआई को टेस्ट करने वाले पहले सितारों में से एक थे.
उन्होंने एक विज्ञापन अभियान के लिए अपना चेहरा और आवाज़ दी थी. इसमें डीप फ़ेक तकनीक का इस्तेमाल किया गया था.
यह अभियान कैडबरी ने शुरू किया था. इसमें छोटे व्यवसाय मालिकों को सुविधा दी गई थी कि वो शाहरुख़ ख़ान की आवाज़ और तस्वीर को अपने स्टोर के प्रचार के लिए इस्तेमाल कर सकें और कोरोना महामारी के दौरान बिक्री बढ़ा सकें.
इस अभियान को बनाने वाली कंपनी ओग्लिवी इंडिया के सुकेश नायक कहते हैं कि इस अकेले अभियान ने पूरे देश में 3,00,000 नए विज्ञापन बनाए.
एजेंसी ने बेहद नियंत्रित तरीके से शाहरुख़ की टीम के साथ मिलकर काम किया और यह सुनिश्चित किया कि उनके अभियान का इस्तेमाल करने के लिए चुनिंदा व्यवसायों को ही पंजीकरण की अनुमति दी जाए.
एआई के इस्तेमाल को लेकर भारत में अभी भी कोई विशेष नियम या क़ानून नहीं हैं.
इसी साल बॉलीवुड एक्टर अनिल कपूर ने अपनी समानता, तस्वीर, नाम और आवाज़ सहित अन्य चीजों को सुरक्षित रखने की क़ानूनी लड़ाई जीती है. कपूर ने इस फै़सले को प्रगतिशील और अन्य अभिनेताओं के लिए भी अच्छा बताया.
उन्होंने वैराइटी मैगज़ीन से कहा, "जहां तक मेरी तस्वीर, आवाज़, मॉर्फिंग, जीआईएफ़ और डीप फ़ेक का मुद्दा है तो अगर ऐसा होता है तो मैं सीधे कोर्ट के आदेश और प्रतिबंध भेज सकता हूं और उन्हें वो कंटेन्ट हटाना होगा."
इंसानों और एआई में कौन सबसे बेहतर ?
लेकिन एआई का एक दूसरा पहलू भी है.
कुछ एक्सपर्ट को लगता है कि फ़िल्म बनाने के कुछ पहलुओं को एआई आसान और तेज़ बना सकता है, हालांकि कुछ मानते हैं कि इसके अपने जोखिम हैं.
रेड चिलीज़ वीएफ़एक की शिल्पा हिंगोरानी वीएफ़एक्स के कुछ प्रोसेस को आसान बनाने की संभावनाओं से उत्साहित हैं. वो कहती हैं कि फ़्रेम दर फ़्रेम काम करते हुए क्लाइंट के लिए एक नमूना निकालने में काफ़ी लंबा समय लगता है.
केतन यादव कहते हैं, "समय कम करने का कोई तरीका निश्चित रूप से काम को आसान बनाएगा और वक्त कम करेगा."
अपनी फ़िल्म 'वीपन' में एआई पर बहुत अधिक निर्भरता के बावजूद सेनियाप्पन कहते हैं, "अगर हमारे पास बजट और समय होता तो हम लाइव एक्शन को चुनते."
वो कहते हैं, "एआई बहुत सुंदर है लेकिन यह लाइव एक्शन या एनिमेशन जैसा नहीं है क्योंकि इसमें न तो इंसान अभिनय करता है और न ही स्केच बनाता है."
चैटजीपीटी के साथ अपने शुरुआती आकर्षण के बाद शेखर कपूर ने भी यही महसूस किया. वो कहते हैं, "मैंने खुद से पूछा कि स्मार्ट कौन है और उत्तर मिला- 'मैं खुद'."
वो कहते हैं, "एआई की खुद की कोई नैतिकता नहीं होती है, वो उसी डेटा का इस्तेमाल करता है जो हम उसे देते हैं. यह कोई रहस्य नहीं पैदा कर सकता, न तो डर या प्यार को महसूस कर सकता है."
वो कहते हैं कि हालांकि यह फ़िल्म बनाने की पूरी प्रक्रिया को लोगों के लिए आसान ज़रूर बना सकता है.
उनके मुताबिक, "अगर हर किसी के पास इस तरह का टूल होगा तो हाइरारकी ख़त्म हो जाएगी, और हर किसी की काबिलियत कहानी कहने की होगी."
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