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नीरज चोपड़ा और पाकिस्तान के अरशद नदीम की दोस्ती के साथ प्रतिद्वंद्विता
- Author, वंदना
- पदनाम, सीनियर न्यूज़ एडिटर, बीबीसी न्यूज़
- प्रकाशित
बुडापेस्ट में आयोजित वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप्स में 88.7 मीटर तक भाला फेंकने वाले नीरज चोपड़ा ने गोल्ड मेडल जीतकर भारत के लिए इतिहास रच दिया है. बीते साल इसी प्रतियोगिता में उन्होंने रजत पदक जीता था.
भले ही दुनिया के अन्य खिलाड़ी यह उपलब्धि हासिल कर चुके हों, मगर भारतीय एथलेटिक्स के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि है.
इस साल यह चैंपियनशिप पाकिस्तान के लिए भी ऐतिहासिक रही. अरशद नदीम ने अपने देश के लिए रजत पदक जीता है. यह पाकिस्तान के लिए इस तरह का पहला पदक है.
एक छोटे से गांव से संबंध रखने वाले अरशद की गिनती आज पाकिस्तान के बड़े खिलाड़ियों में होती है. क्रिकेट और हॉकी के लिए पहचाने जाने वाले देश में यह एक बड़ी उपलब्धि है.
भारत के नीरज और पाकिस्तान के अरशद अपनी दोस्ती और प्रतिद्वंद्विता दोनों के लिए जाने जाते हैं.
अपने आख़िरी थ्रो से पहले दोनों खिलाड़ी अदब से झुके और जीतने के तुरंत बाद दोनों सच्ची खेल भावना का प्रदर्शन करते हुए एक-दूसरे के गले मिले और हाथ मिलाया.
वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप्स 2023 को भारत के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इसमें तीन भारतीय खिलाड़ी- नीरज चोपड़ा, कृष्णा जेना और डीपी मनु पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा के फ़ाइनल में पहुंचे थे. ऐसा पहली बार हुआ था जब भारत के तीन खिलाड़ी फ़ाइनल में पहुंचे हों.
भारत ने पुरुषों की 4X400 मीटर रिले के फ़ाइनल में भी पांचवां स्थान हासिल किया जो अच्छा प्रदर्शन माना जा रहा है. पारुल चौधरी 3000 मीटर स्टीपलचेज़ स्पर्धा के फ़ाइनल में जगह बनाने वालीं दूसरी भारतीय महिला बनीं और उन्होंने पेरिस ओलंपिक्स के लिए भी क्वॉलिफ़ाई कर दिया है.
नीरज का करिश्मा
नीरज ने 2022 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था. उनकी इस उपलब्धि से पहले वर्ल्ड चैंपियनशिप्स में भारत को आख़िरी मेडल 2003 में मिला था.
तब अंजू बॉबी जॉर्ज ने लंबी कूद स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था और वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप्स में मेडल जीतने वालीं पहली भारतीय बनी थीं.
हालांकि, भारत को एथलेटिक्स में अपने नए हीरो के लिए 18 साल का इंतज़ार करना पड़ा था. यह इंतज़ार तब ख़त्म हुआ जब, नीरज चोपड़ा ने 2021 में आयोजित टोक्यो ओलंपिक्स में स्वर्ण पदक जीता और पूरे देश में उत्साह भर दिया था.
ओलंपिक की ट्रैक एंड फ़ील्ड स्पर्धाओं में भारत से कभी कोई चैंपियन नहीं था लेकिन नीरज के आने के बाद सबकुछ बदल गया है.
और ओलंपिक में मेडल जीतने के बाद से वह लगातार नई उपलब्धियां हासिल करते जा रहे हैं.
नीरज की सफ़लता कितनी बड़ी है, इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि 7 अगस्त को भारत में नेशनल जैवलिन डे या राष्ट्रीय भाला फेंक दिवस मनाया जाता है. यह वही तारीख़ है, जब नीरज ने टोक्यो ओलंपिक खेलों में गोल्ड मेडल जीता था.
नीरज का सफ़र
25 साल का यह दुबला सा युवा खिलाड़ी हरियाणा से संबंध रखता है. वह हरियाणा जो कुश्ती और पहलवानों के लिए जाना जाता है. अंडर-20 कुश्ती प्रतियोगिता की वर्तमान स्वर्ण पदक विजेता यहीं से हैं.
नीरज की यात्रा पर नज़र डालें तो इसमें धैर्य, मज़बूत इरादे और कड़ा परिश्रम नज़र आता है.
यह यक़ीन करना मुश्किल है कि यह ओलंपिक चैंपियन किसी समय गोलमटोल किशोर था जिसका वज़न क़रीब 80 किलो था. हमेशा कुर्ता-पायजमा पहनने वाले नीरज को तब गांव में प्यार से सरपंच कहा जाता था.
उन्होंने नज़दीक के गांव के स्टेडियम में अपनी सेहत बेहतर करने के इरादे से जाना शुरू किया था.
उनकी एक वीडियो क्लिप भी वायरल हुई थी जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें पता ही नहीं था कि भाला होता क्या है. एक दिन जब गांव के खिलाड़ी भाला फेंक रहे थे तो उन्होंने भी भाला फेंकने में हाथ आज़माया.
भाले का हवा को चीरते हुए जाना और फिर ज़मीन से टकराना उन्हें कुछ पसंद आ गया.
नौसिखिया होने के बावजूद जिस तरह बहुत आसानी से उन्होंने भाला फेंका, उससे हर कोई हैरान रह गया. बस, यहीं से उनकी ज़िंदगी बदल गई.
जल्द ही उन्होंने बड़े शहर का रुख़ किया और भारत में कई प्रतियोगिताओं में जीत हासिल की. वह विधिवत कोचिंग नहीं ले रहे थे और ख़ुद से ही अभ्यास कर रहे थे. 2012 में उन्हें एक चोट लगी जिससे उनका करियर लगभग ख़त्म हो गया था.
मगर परिवार के साथ और अपने पक्के इरादों के दम पर नीरज हर बाधा को पार करते चले गए.
2016 में अंडर 20 वर्ल्ड चैंपियनशिप को जीतकर उन्होंने धमाकेदार शुरुआत की और तब से वह लगातार आगे बढ़ रहे हैं.
बाइक का शौक
नीरज को बाइक्स और हरियाणा के लोकगीत बहुत पसंद हैं. वह फ़ोटोग्राफ़ी का भी शौक़ रखते हैं.
नीरज चोपड़ा को सोशल मीडिया पर प्यार से रुडयार्ड किपलिंग के कहानी संग्रह ‘द जंगल बुक’ के पात्र के नाम मोगली कहा जाता है.
शायद इसलिए क्योंकि उनके बाल मोगली की ही तरह लंबे हैं और इसलिए भी कि वह मोगली की ही तरह फ़ुर्तीले भी हैं.
एथलीट्स को शरीर पर चोटें आना आम है. नीरज को भी कई बार चोटें लगीं लेकिन आत्मनियंत्रण और फ़िटनेस पर ध्यान रखना उनके बहुत काम आया.
नीरज चोपड़ा अंडर 20 चैंपियन हैं, साथ ही एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स, ओलंपिक और डायमंडल लीग भी जीत चुके हैं. अब उनकी निगाहें 2024 ओलंपिक में दूसरी बार मेडल जीतने पर हैं.
आज उन्हें भारतीय एथलेटिक्स जगत का सबसे बड़ा चेहरा माना जाता है. नीरज की कामयाबी ने भारतीय एथलेटिक्स को दुनिया के नक़्शे पर पहचान दिलाई है.
नई पीढ़ी में नई तरह का आत्मविश्वास भरा है. उनके प्रेरणा लेकर नए एथलीट्स की पूरी पीढ़ी तैयार होती दिखाई दे रही है.
मुझे नीरज की पोस्ट की गई ये फ़ोटो ख़ास तौर पर याद है, जिसमें पीछे ‘स्पोर्ट इज़ आर्ट’ यानी ‘खेल एक कला है’ लिखा दिखाई दे रहा है. वह खेल को भी इसी उत्कृष्ट स्तर पर ले गए हैं.
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