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शशिकला: चाहा सिंहासन, मिली जेल
- Author, उमर फारूक़
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
- प्रकाशित
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है.
सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में अन्नाद्रमुक महासचिव को दोषी करार दिया है.
राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी शशिकला के नज़दीक आती दिख रही थी. लेकिन पनीरसेल्वम की बगावत और अदालत फ़ैसले से मुख्यमंत्री की कुर्सी उनसे दूर नज़र आ रही है.
शशिकला 25 साल पहले एक साधारण-सा वीडियो पार्लर चलाती थीं.
कैसे वीडियो पार्लर चलाने वाली एक आम महिला तमिलनाडु की राजनीति में सबसे विवादित शख़्सियत के तौर पर उभरी.
इसके तह में जाना अपने आप में एक दिलचस्प शोध का विषय है.
पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के साथ उनकी 25 साल की 'गहरी दोस्ती' एकमात्र वो वजह है जो उन्हें राज्य के सत्तारूढ़ दल में एक मजबूत हैसियत के साथ खड़ा करती है.
जयललिता के निधन के बाद पैदा हुई अनिश्चितता की हालत में ओ पनीरसेल्वम राज्य के मुख्यमंत्री ज़रूर बन गए, लेकिन पनीरसेल्वम के नाम को लेकर पार्टी में पूरी तरह से सहमति नहीं थी.
पार्टी के अंदर उनसे खार खाए लोग उन्हें पसंद नहीं कर रहे थे.
ऐसी ही परिस्थितियों में शशिकला के नाम में उन्हें वे संभावनाएं नज़र आईं कि वो पनीरसेल्वम की जगह ले सकती हैं.
जयललिता के घर-परिवार और उनके राजनीतिक विरासत को संभालने वाली शशिकला ने अपने भाषण में ख़ुद को 'पार्टी की उद्धारक' और अम्मा के सपनों को पूरा करने वाली बताया.
जयललिता और शशिकला की दोस्ती की शुरुआत 1984 में हुई थी. उस वक्त शशिकला एक वीडियो पार्लर चलाती थीं और जयललिता तत्कालीन मुख्यमंत्री एमजी रामाचंद्रन की प्रोपेगैंडा स्क्रेटरी थीं.
शशिकला के पति नटराजन उस वक्त राज्य के सूचना विभाग में काम कर रहे थे. उन्होंने अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर जयललिता की सभी जनसभाओं के वीडियो शूट का ठेका शशिकला को दिलवाया.
जयललिता को शशिकला का काम पसंद आया और दोनों के बीच रिश्ते गहरे होने शुरू हो गए.
1987 में एमजी रामचंद्रन की मृत्यु के बाद जब जयललिता मुश्किल दौर से गुजर रही थीं तब शशिकला ने उन्हें सहारा दिया था.
उस वक्त पार्टी में जानकी रामचंद्रन के समर्थकों की ओर से जयललिता का विरोध हो रहा था और उन्हें पार्टी से बाहर निकालने की मांग हो रही थी.
इसके बाद ही शशिकला अपने पति नटराजन के साथ जया के घर उनकी 'मदद' करने के लिए रहने लगीं.
हालांकि जयललिता और शशिकला के रिश्तों में कई बार उतार-चढ़ाव भी आए. 1991 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद शशिकला के रिश्तेदारों पर जयललिता से नज़दीकी का ग़लत फ़ायदा उठाने के भी आरोप लगे, लेकिन शशिकला पर इससे ज्यादा फ़र्क नहीं पड़ा.
विपक्षी दल शशिकला पर अक्सर यह इल्ज़ाम लगाते रहे हैं कि उनका परिवार ख़ुद को क़ानून से ऊपर समझता रहा है.
उन्हें और उनके परिवार को राजनीतिक हलकों में 'मन्नारगुडी माफ़िया' कहा जाता रहा है. ऐसा उन्हें उनके जन्मस्थान से जोड़ कर कहा जाता है. उनका जन्म थेवर समुदाय के एक परिवार में हुआ था.
नाराज़ होकर जयललिता ने नटराजन को अपने घर से बाहर निकाल दिया था, लेकिन शशिकला ने तब भी समझदारी दिखाते हुए इस फ़ैसले में जयललिता का साथ दिया था और उनके साथ ही रही थीं.
दोनों के बीच रिश्ते इतने प्रगाढ़ थे कि जयललिता ने शशिकला के भतीजे वीएन सुधाकरन को गोद ले रखा था और उनकी भव्य शादी भी करवाई थी.
फ़िज़ूलखर्ची को लेकर इस शादी की चर्चा देशभर में हुई थी.
1996 में चुनाव हारने और सत्ता से बाहर होने के बाद भी जयललिता ने शशिकला को पार्टी से हटाने की कैडरों की मांग नहीं मानी थी.
पार्टी के कैडरों का कहना था कि शशिकला पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों और सत्ता के दुरुपयोग की वजह से पार्टी की छवि ख़राब हो रही है.
इसी साल शशिकला को प्रवर्तन निदेशालय ने फ़ॉरेन एक्सचेंज रेगुलेशन एक्ट के तहत गिरफ़्तार किया था.
लेकिन फिर भी जयललिता ने उनसे दूरी नहीं बनाई.
बाद में उन्होंने शशिकला के गोद लिए भतीजे सुधाकरन और परिवार के कुछ दूसरे सदस्यों को ज़रूर छोड़ दिया.
दो दफ़ा ज़रूर शशिकला को बाहर का रास्ता देखने के नौबत आई, लेकिन दोनों ही बार वो जयललिता के घर में एक विजेता के तौर पर लौटीं.
यह दिखाता है कि जयललिता शशिकला पर कितना भरोसा करती थीं.
पार्टी के अंदर के लोगों का कहना है कि टिकट बांटने में शशिकला की अहम भूमिका होती थी. इसलिए पार्टी के वरिष्ठ नेता, मंत्री और विधायक उनके वफ़ादार बने रहते थे.
एआईएडीएमके के एक वरिष्ठ नेता का कहना है, "यहां तक कि पनीरसेल्वम भी जयललिता के नज़दीक शशिकला की मदद से ही पहुंचे थे. इसलिए उन्हें जयललिता और शशिकला दोनों का ही विश्वास हासिल था."
अब सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद शशिकला को एक और चुनौती से गुज़रना पड़ रहा है.
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