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उत्तराखंडः शिक्षा मंत्री को था शुभ मुहूर्त का इंतज़ार
- Author, राजेश डोबरियाल
- पदनाम, देहरादून से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
- प्रकाशित
कहते हैं कि राजनीति में सारे रास्ते कुर्सी तक जाते हैं, लेकिन उत्तराखंड की नई सरकार के दो मंत्री कुर्सी मिलने के बाद भी उस पर बैठने से परहेज करते रहे.
लेकिन किसी त्याग की भावना से नहीं, बल्कि मान्यताओं की वजह से उन्होंने ऐसा किया.
18 मार्च को सरकार बनने के बाद, त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल और राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉक्टर धन सिंह रावत को शुभ घड़ी का इंतज़ार था.
हालांकि दोनों ही मंत्री विधानसभा में अपने ऑफ़िस में बैठ रहे थे और काम कर रहे थे, पर उस कुर्सी से दूर थे जिसे शक्ति का केंद्र माना जाता है.
डॉक्टर धनसिंह रावत ने मंगलवार सुबह विधिवत पूजा-अर्चना के बाद अपनी कुर्सी संभाली. उनके पास सहकारिता, उच्च शिक्षा समेत चार मंत्रालयों की ज़िम्मेदारी है.
कुर्सी पर बैठने के बाद उन्होंने बीबीसी से कहा, "चूंकि हम हिंदू धर्म में विश्वास करते हैं, इसलिए यह फ़ैसला किया था कि नवरात्र शुरू होने के बाद कुर्सी पर बैठेंगे. वैसे काम में कोई दिक्कत नहीं हुई. विभागों की बैठकें ली हैं और काम सुचारू ढंग से चल रहा है."
शिक्षा मंत्री ने सफाई देते हुए कहा कि दिक्कत उन्हें होती है जिन्हें कुर्सी की ज़्यादा चाह रहती है, "मैं तो वैसे भी पैदल आदमी हूं, इसलिए मुझे कुर्सी से ज़्यादा समस्या नहीं रही."
कृषि, उद्यान समेत छह मंत्रालय संभालने वाले कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के ऑफ़िस में उनकी कुर्सी का इंतज़ार मंगलवार को भी ख़त्म नहीं हुआ.
वह भी नवरात्र में ही कुर्सी पर बैठने के लिए इंतज़ार कर रहे थे. फिर मंगलवार से ही कुर्सी पर विराजमान क्यों नहीं हुए?
सुबोध कहते हैं, "आज तीन बजे से नवरात्र शुरू हो रहे हैं और पूजा सुबह ही करवाते हैं इसलिए अब ये कल करवाई जाएगी."
उन्होंने अपने ऑफ़िस के सोफ़े पर बैठकर ही काम निपटाना और लोगों से मिलना जारी रखा.
जब इतने दिन कुर्सी पर बैठने की इच्छा को रोके रखा तो एक दिन और सही.
बहरहाल, वो बुधवार को पूजा पाठ के साथ कुर्सी संभालने जा रहे हैं.
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