आप इस वेबसाइट का टेक्स्ट-ओनली वर्शन देख रहे हैं जो कम डेटा खर्च करता है. सभी तस्वीरों और वीडियो के साथ वेबसाइट का मुख्य वर्शन देखें.
कोरेगांव हिंसा के विरोध में महाराष्ट्र बंद: अब तक का हाल
महाराष्ट्र के कोरेगांव भीमा में हुई हिंसा के विरोध में दलित संगठनों ने आज प्रदेश बंद बुलाया है.
बंद का असर मुंबई, पुणे और औरंगाबाद में ज़्यादा है, हालांकि कहीं से किसी तरह के नुकसान की ख़बर नहीं है.
बंद के मद्देनज़र राज्य में कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं.
सरकारी बसें न चलने से लोगों को परेशानी हो रही है.
प्रदर्शनकारियों ने सुबह गोरेगांव, विरार, ठाणे, नालासोपारा में ट्रेनें रोकीं लेकिन फ़िलहाल इन इलाक़ों में ट्रेन सेवा बहाल कर दी गई है.
मुंबई में आज एसी लोकल नहीं चलेंगी. बेस्ट की बसों पर भी बंद का थोड़ा असर है हालांकि कुल 2964 सेवाओं में से 2600 सेवाएं चालू हैं. घाटकोपर और चेंबूर में सुबह रास्ता रोका गया लेकिन किसी नुकसान या हिंसा की ख़बर नहीं है.
कल की घटना के बाद औरंगाबाद में धारा 144 लगा दी गई थी. वहां आज इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं.
ठाणे में सबुह शांतिपूर्ण मोर्चा निकाला गया लेकिन दोपहर तक कुछ बसों में तोड़फोड़ की ख़बर आई.
क्या हुआ था कोरेगांव में
कोरेगांव भीमा में सोमवार को एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था जिस दौरान अचानक हिंसा भड़क उठी जिसमें एक शख्स की मौत हो गई.
यह समारोह 200 साल पहले हुई एक घटना की खुशी मनाने के लिए रखा गया था.
एक जनवरी 1818 को कोरेगांव भीमा में 'अछूत' माने जाने वाले आठ सौ महारों ने चितपावन ब्राह्मण पेशवा बाजीराव द्वितीय के 28 हज़ार सैनिकों को हरा दिया था.
ये महार सैनिक ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से लड़े थे और इसी युद्ध के बाद पेशवाओं के राज का अंत हुआ था.
सोमवार के समारोह में हुई हिंसा का का असर जल्दी ही सारे महाराष्ट्र में दिखने लगा.
विरोध कर रहे लोगों ने मुंबई और पुणे में रास्ते जाम किए, पत्थरबाज़ी की और गाड़ियों में आग लगा दी. तक़रीबन 176 बसों में तोड़फोड़ की गई.
दोपहर आते-आते हालात इतने बिगड़ गए कि मुख्यमंत्री के पुणे में होने वाले एक कार्यक्रम को भी रद्द कर दिया गया. औरंगाबाद में धारा 144 लागू कर दी गई.
राज्य सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश और मृतक के परिवार को दस लाख का मुआवज़ा देने का एलान किया.
लेकिन डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के पोते और एक्टिविस्ट प्रकाश आंबेडकर ने इस पर असंतोष जताया. आंबेडकर की मांग है कि मामले की जांच किसी ग़ैर दलित सिटिंग जज से कराई जाए और उन्हें सबूत जमा करने और सज़ा देने की ताक़त भी दी जाए.
आंबेडकर समेत आठ संगठनों ने बुधवार को महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया.