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आज की पांच बड़ी ख़बरें: बलात्कार पर ट्वीट, कश्मीरी आईएएस टॉपर के ख़िलाफ़ कार्रवाई
साल 2010 के आईएएस टॉपर शाह फ़ैसल के बलात्कार पर किए एक ट्वीट पर जम्मू-कश्मीर सरकार ने उनके ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई का ऐलान किया है.
यह कार्रवाई केंद्र सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के कहने पर हुई है.
शाह फ़ैसल आईएएस की परीक्षा में टॉप करने वाले पहले कश्मीरी हैं.
उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा था:
जनसंख्या+पितृसत्ता+निरक्षरता+शराब+तकनीक+निरंकुशता = रेपिस्तान.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शाह फ़ैसल पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की निंदा की है.
फ़ैसल फ़िलहाल मिड-करियर ब्रेक पर हैं और अमरीका में मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं.
चरमपंथी संगठनों में शामिल हुए कश्मीरी युवक
रमज़ान महीने के आख़िर में सीज़फ़ायर ख़त्म होने के बाद कश्मीर घाटी में स्थानीय युवाओं के चरमपंथी संगठनों में शामिल होने की घटनाएं बढ़ी हैं.
जम्मू-कश्मीर के मल्टी-एजेंसी सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक जून महीने में कश्मीर के 27 युवक चरमपंथी संगठनों और गतिविधियों में शामिल हुए.
इनमें से ज़्यादातार युवक शोपियां, पुलवामा, अनंतनाग और कुलगाम जैसे ज़िलों से हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में इन आंकड़ों से हवाले से बताया गया है कि इस साल कुल 82 कश्मीरी नौजवान चरमपंथी संगठनों में शामिल हुए.
इनमें 38 हिज़्बुल मुजाहिदीन, 18 लश्कर-ए-तैयबा और 19 जैश-ए-मोहम्मद में भर्ती हुए.
भारतीय महिला क्रिकेट टीम के कोच का इस्तीफ़ा
भारतीय महिला क्रिकेट टीम के कोच तुषार अरोठे ने इस्तीफ़ा दे दिया है. बीसीसीआई ने उनका इस्तीफ़ा मंज़ूर कर लिया है.
अरोठे ने अपने इस फ़ैसले के पीछे व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है.
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनके इस फ़ैसले के पीछे उन भारतीय खिलाड़ियों के साथ तल्ख रिश्ते भी हैं, जिन्हें उन्होंने भारतीय महिला क्रिकेट टीम के बेहतर भविष्य के लिए अपने 'कंफ़र्ट ज़ोन' से बाहर आने की सलाह दी थी.
एशिया कप में बांग्लादेश से मिली हार के बाद तुषार के इस्तीफ़े की सुगबुगाहट होने लगी थी. उन्हें अप्रैल, 2017 में कोच बनाया गया था.
फिर टकराएंगे एलजी और केजरीवाल?
दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने ने तीन आईएएस अधिकारियों का तबादला कर दिया है.
इससे अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी सरकार के साथ उनका टकराव फिर से बढ़ सकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एलजी के अधिकार को भूमि, पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था तक सीमित कर दिया था.
अदालत ने मुख्यमंत्री और एलजी को मिलकर काम करने की सलाह भी दी थी जिसे दोनों ही पक्ष अपनी जीत बता रहे थे.
100 से ज़्यादा बच्चे माता-पिता से नहीं मिल पाएंगे
अमरीकी सरकार ने कहा है कि वह पांच साल से कम उम्र के 100 से ज्यादा आप्रवासी बच्चों को समयीमा के तहत माता—पिता से नहीं मिलवा पाएगी.
अदालत ने इसके लिए 10 जुलाई तक का समय निर्धारित किया था. 27 ऐसे आप्रवासी बच्चे हैं जिनके मामले में अमरीकी प्रशासन को कुछ दिक्कतें आ रही हैं. मसलन, 10 बच्चों के माता- पिता गैरकानूनी तरीके से बॉर्डर पार करने को लेकर कानूनी हिरासत में हैं.
आठ बच्चों के माता- पिता नशे, तस्करी और हत्या जैसे अपराधों में शामिल हैं. इसी तरह कुछ बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न का भी ख़तरा है.
हालांकि, अमरीकी प्रशासन के अनुसार 102 में से 75 बच्चों को उनके परिवार से मिलवाया जाएगा.
अमरीकन सिविल लिबर्टीज यूनियन के अधिवक्ता ली जेलर्न्ट ने इसे निराशाजनक बताया है.
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