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बिहार पुलिस के कुत्तों पर चढ़ रही है चर्बी
- Author, नीरज सहाय
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
- प्रकाशित
"पुलिस की जांच में कुत्तों की मदद नहीं लेने से इनका वज़न बढ़ गया है."
बिहार पुलिस के अपराध अनुसंधान विभाग के अपर पुलिस महानिदेशक विनय कुमार का ये बयान भले ही डॉग स्क्वॉड के बारे में है, लेकिन ये पुलिसिया जांच के तौर-तरीक़ों पर भी रोशनी डालती है.
डॉग स्क्वॉड की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए साल 1955 में लैब्राडॉर नस्ल के एक कुत्ते के साथ बिहार पुलिस की अपराध अनुसंधान इकाई में श्वान दस्ते की शुरुआत की गई थी.
इस दस्ते में आज विदेशी नस्ल के 50 कुत्ते हो गए हैं, लेकिन इस दस्ते की हालत ख़स्ता है.
बिहार में अपराध की स्थिति
आलोचकों का ये कहना है कि अपराध की जांच में पुलिस इस दस्ते के इस्तेमाल में ज़्यादा रुचि नहीं लेती इसलिए लगभग बेकार बैठे कुत्तों का वज़न बढ़ रहा है.
विनय कुमार भी इसकी तस्दीक करते हैं. वे कहते हैं, "राज्य के सभी ज़िलों के एसपी को हत्या, अपहरण आदि मामलों की जांच में इनसे काम लेने का निर्देश जारी किया जा चुका है."
राज्य में अपराध के आंकड़ें बताते हैं कि अपराधियों को पकड़ने में पुलिस की चुस्ती कम हुई है. बिहार में साल 2016 में हत्या के 2,581 मामले दर्ज किए गए. साल 2017 में ये बढ़कर 2803 हो गए.
एक साल में अपहरण की घटनाएं 7324 से बढ़कर 8972 हो गईं. बढ़ते अपराध से सरकार और पुलिस की छवि को लेकर सवाल उठ रहे हैं लेकिन अपराधियों को पकड़ने में डॉग स्क्वॉड की सक्रियता बढ़ाने में कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं दिख रही.
डॉग स्क्वॉड की तैनाती
बिहार में पुलिस जांच में कुत्तों की मदद से मामले सुलझाने के उदाहरण भी मौजूद हैं.
इसी साल मई महीने में पटना में अष्टधातु की एक मूर्ति चोरी का मामला खोजी कुत्तों की मदद से सुलझाया गया था.
मूर्ति की बरामदगी और चोर की गिरफ़्तारी दोनों ही श्वान दस्ते की मदद से मुमकिन हो पाया.
ठीक इसी तरह पिछले साल मई में गया ज़िले में चोरी और रेप के मामले में खोजी कुत्तों की मदद ली गई और अपराधी को पकड़ा गया था.
लेकिन इसके बावजूद डॉग स्क्वॉड में तैनाती को लेकर पुलिस अधिकारी उत्सुक नहीं दिखते.
दस्ते के डीएसपी डीएन महतो कहते हैं, "डॉग स्क्वॉड में किसी भी पद पर अपनी तैनाती को पुलिस अधिकारी कर्तव्य के रूप में नहीं बल्कि सज़ा की तरह लेते हैं."
कुत्तों का रख-रखाव
डीएसपी डीएन महतो के मुताबिक़, "स्क्वॉड के कुत्तों का वज़न लगभग 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ गया है. पटना कमिश्नरी में कभी-कभी इनकी मदद ली जाती है, लेकिन प्रदेश के अन्य हिस्सों में इनकी मदद को लेकर उत्साह का घोर अभाव दिखता है."
दरअसल, खोजी कुत्तों के भोजन और रख-रखाव में इतनी ख़ामियां हैं कि पिछले दो साल में 13 कुत्ते दम तोड़ चुके हैं.
डॉग स्क्वॉड में 63 कुत्ते थे जो अब घटकर 50 हो गए हैं. इनमें 30 नर कुत्ते और 20 मादा हैं. लगभग 50 प्रतिशत कुत्ते शाकाहारी हैं.
कुत्तों का भोजन बनाने के लिए न नियमित रसोइया है और न ही उनकी सफ़ाई के लिए अलग से कोई स्टाफ़.
नशीली वस्तुएं पकड़ने की ट्रेनिंग
राज्य के 38 में से मात्र 11 ज़िलों में डॉग स्क्वॉड है.
पांच अप्रैल, 2016 से राज्य में पूर्ण शराबबंदी है लेकिन इसके लागू होने के दो साल बाद 20 अतिरिक्त कुत्तों को अवैध शराब और नशीली वस्तुएं पकड़ने की ट्रेनिंग के लिए तेलंगाना भेजा गया है.
अपर महानिदेशक विनय कुमार कहते हैं, "चरणबद्ध तरीके से डॉग स्क्वॉड को राज्य के सभी ज़िलों में तैनात करने की प्रक्रिया तेज़ कर दी गई है."
"पटना में 28 लाख रुपए की लागत से चार कुत्तों के रहने लायक नया केनेल बना है. डॉग स्क्वॉड के बेहतर इस्तेमाल और उनके रख-रखाव को लेकर कई और काम किए जा रहे हैं."
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