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लोकसभा चुनाव 2019: नहीं, बुर्क़ा पहनी औरतों ने फ़र्ज़ी वोट नहीं डाला- फ़ैक्ट चेक
- Author, फ़ैक्ट चेक टीम
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 4 मिनट
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर में एक बीजेपी कार्यकर्ता ने बुर्क़ा पहने कुछ महिलाओं के पास से फ़र्ज़ी आधार कार्ड ज़ब्त किए और उन्हें वोट देने से रोका.
यह वीडियो गुरुवार को लोकसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के बाद सामने आया है.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुज़फ़्फ़रनगर से बीजेपी उम्मीदवार संजीव बालियान ने भी दावा किया है कि बुर्क़ा पहने कुछ महिलाएं फ़र्ज़ी वोट डाल रही थीं. इस वीडियो को फ़ेसबुक और ट्विटर पर हज़ारों बार देखा और शेयर किया जा चुका है.
दक्षिणपंथी रुझान वाले फ़ेसबुक ग्रुप्स जैसे "BJP Mission 2019" और "We Support Narendra Modi" ने भी इस वीडियो को शेयर किया है.
बीबीसी ने अपनी पड़ताल में पाया कि इस वीडियो का लोकसभा चुनाव से कोई ताल्लुक नहीं है.
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सच्चाई
इस वायरल वीडियो का कैप्शन है: बीजेपी की मुसलमान कार्यकर्ता ने बुर्क़ा पहने औरतों को फ़र्ज़ी वोट डालते पकड़ा.
वीडियो को ध्यान सुना जाए तो एक महिला कहती है, "मैं बसपा उम्मीदवार शहला हूं. मैं औरतों को परेशान नहीं करना चाहती. मुझे सच-सच बताइए, आप लोगों को ये आधार कार्ड किसने दिए."
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2017 में बहुजन समाज पार्टी ने रामपुर नगर पालिक के अध्यक्ष पद के लिए फ़ैशन डिजाइनर शहला ख़ान को मैदान में उतारा था. उत्तर प्रदेश में स्थानीय निकाय के चुनाव नवंबर, 2017 में हुए थे.
यह वीडियो सबसे पहले 27 नवंबर 2017 को यू-ट्यूब पर अपलोड किया था यानी उत्तर प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव के दूसरे चरण के एक दिन बाद.
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बीबीसी को वीडियो से सम्बन्धित कोई ख़बर या मीडिया रिपोर्ट तो नहीं मिली लेकिन इतना तय है कि इसका साल 2019 से कोई नाता नहीं है. इसे ग़लत ढंग से इस बार के लोकसभा चुनाव से जोड़ा जा रहा है.
चुनाव के दौरान फ़र्ज़ी दावे
इसी तरह का एक और वीडियो बड़े पैमाने पर शेयर किया जा रहा है. इस वीडियो में दावा किया जा रहा है कि चुनाव के पहले चरण में ईवीएम जलाई गईं.
35 सेकेंडस की इस क्लिप में लोगों को ईवीएम ज़मीन पर पटकते, कुचलते और फिर उसमें आग लगाते देखा जा सकता है.
वीडियो को दो अलग-अलग जगहों का बताया जा रहा है.
वीडियो के कैप्शन में कहा गया है: "मंडी और पुंछ में ईवीएम मशीनें जलाई गईं. ईवीएम मशीनें हैक कर ली गई थीं. सभी वोट बीजेपी को जा रहे हैं. चौकीदार चोर है."
इसी वीडियो को नसरुल्लापुरा का बताकर भी शेयर किया जा रहा है और कहा जा रहा है कि सारे वोट बीजेपी को जा रहे हैं.
'डेली इंडिया' नाम के फ़ेसबुक पेज ने भी इस वीडियो को शेयर किया है और लिखा है: ये लोकसभा चुनाव के पहले चरण में हुआ. बाकी पार्टियों के बटन दबाने पर वोट बीजेपी को ही जा रहा था. इसके बाद ग़ुस्साए लोगों ने ईवीएम जला दिए."
इस फ़ेसबुक पेज के करीब 70 हज़ार फ़ॉलोवर हैं.
बीबीसी ने अपनी पड़ताल में पाया कि ये वीडियो अप्रैल 2017 का है और 2019 के लोकसभा चुनाव से इसका कोई वास्ता नहीं है.
असल में श्रीनगर में उपचुनाव के दौरान ग़ुस्साई भीड़ ने पोलिंग बूथों को निशाना बनाया. ये सब अलगाववादियों द्वारा चुनाव बहिष्कार के आह्वान पर हुआ.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन घटनाओं में 33 वोटिंग मशीनें जला दी गई थीं. ये वीडियो कश्मीर के बडगाम ज़िले का है, न कि मंडी या नरसुल्लापुरा का.
हिमाचल प्रदेश के मंडी में सातवें चरण में 19 मई को चुनाव होंगे.
जम्मू-कश्मीर में पहले चरण में सिर्फ़ बारामुला में चुनाव हुए हैं. नरसुल्लापुरा कश्मीर के बडगाम ज़िले में आता है जो श्रीनगर निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है. श्रीनगर में चुनाव दूसरे चरण में 18 अप्रैल को होंगे.
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दावों की पड़ताल
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दावा किया गया है कि मुज़फ़्फ़रनगर में एक बीजेपी कार्यकर्ता ने बुर्क़ा पहने कुछ महिलाओं से फ़र्ज़ी आधार कार्ड ज़ब्त किए. हालांकि असल में इस वीडियो का 2019 के चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है.
इसी तरह ईवीएम जलाते हुए लोगों का वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है और कहा जा रहा है कि ये घटना पहल चरण के चुनाव की है. सच्चाई ये है कि इस वीडियो का भी 2019 के लोकसभा चुनाव से कोई ताल्लुक नहीं है.
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