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कभी कांग्रेस-कभी बीजेपी! आख़िर कौन है ये बुर्क़ेवाला?
- Author, फ़ैक्ट चेक टीम
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
- प्रकाशित
सोशल मीडिया पर सोमवार को हुई चौथे चरण की वोटिंग से जोड़कर दो तस्वीरें शेयर की जा रही है जिनमें बुर्क़ा पहने एक शख़्स दिखाई देता है जिसे दो लोगों ने पकड़ रखा है.
इन तस्वीरों के साथ लिखा है, "बुर्क़ा पहनकर शमीना के नाम से कांग्रेस को फ़र्ज़ी वोट देते हुए पकड़ा गया कांग्रेसी कार्यकर्ता."
दक्षिणपंथी रुझान वाले फ़ेसबुक पेज @Namo2019PM पर ये दोनों तस्वीरें इसी दावे के साथ पोस्ट की गई हैं जिन्हें 9200 से ज़्यादा लोग शेयर कर चुके हैं.
ये दोनों तस्वीरें हमें बीबीसी के पाठकों ने भी वॉट्सऐप के ज़रिए भेजी हैं और इनकी सच्चाई जाननी चाही है.
फ़ैक्ट चेक का नतीजा:
वायरल तस्वीरों की पड़ताल में हमने पाया कि लोकसभा चुनाव-2019 से इनका कोई संबंध नहीं है. ये दोनों तस्वीरें 2015 की हैं.
ख़बरों में रहीं तस्वीरें
रिवर्स इमेज सर्च की मदद से हमें इस तस्वीर से जुड़े चार न्यूज़ आर्टिकल मिले जो अक्तूबर 2015 में छपे थे.
इन सभी में बुर्क़ा पहने इस शख़्स की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है.
इनमें सबसे पुराना आर्टिकल है 'स्कूप-व्हूप' का जिसके अनुसार ये कथित तौर पर किसी आरएसएस कार्यकर्ता की फ़ोटो है जिसे उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ ज़िले में स्थानीय लोगों ने मंदिर में बीफ़ फेंकते हुए पकड़ लिया था.
अन्य रिपोर्टों के अनुसार बुर्क़ा पहने इस शख़्स की तस्वीरें उस समय सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थीं, लेकिन बाद में इस घटना से संबंधित लगभग सभी ट्वीट्स और फ़ेसबुक पोस्ट्स को हटा दिया गया था.
इन रिपोर्ट्स के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तरफ से इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई थी कि ये वाक़ई संघ से जुड़े किसी कार्यकर्ता की तस्वीर है.
लेकिन इन पुरानी रिपोर्टों से यह ज़रूर स्पष्ट होता है कि मौजूदा लोकसभा चुनाव से इन दोनों तस्वीरों का कोई वास्ता नहीं है.
कुछ और दावे
लोकसभा चुनाव-2019 में पहले चरण की वोटिंग के बाद भी ये दोनों पुरानी तस्वीरें सोशल मीडिया पर ग़लत दावों के साथ शेयर की गई थीं.
कुछ फ़ेसबुक ग्रुप में इन्हें उत्तर प्रदेश के मुज़्ज़फ़रनगर का बताया गया था तो कुछ में इन तस्वीरों को उत्तर प्रदेश के ही सहारनपुर का बताया गया और लिखा गया कि ये शख़्स बीजेपी का कार्यकर्ता है.
बीबीसी इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सकता कि ये तस्वीरें किस घटना से जुड़ी हैं. लेकिन इतना साफ़ है कि 2019 लोकसभा चुनावों से इसका कोई रिश्ता नहीं है.
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