आप इस वेबसाइट का टेक्स्ट-ओनली वर्शन देख रहे हैं जो कम डेटा खर्च करता है. सभी तस्वीरों और वीडियो के साथ वेबसाइट का मुख्य वर्शन देखें.
‘वंदे मातरम’ पर तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की भिड़ंत का सच: फ़ैक्ट चेक
- Author, फ़ैक्ट चेक टीम
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 2 मिनट
सोशल मीडिया पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का 3.50 मिनट का एक वीडियो भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है.
वीडियो के साथ लिखा जा रहा है कि 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और ममता बनर्जी ने एक पार्टी मीटिंग में अपने नेताओं को राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' गाने से रोका तो मुख्यमंत्री आवास में इसे लेकर हंगामा खड़ा हो गया'.
इस वायरल वीडियो में हंगामा साफ़ देखा जा सकता है और वीडियो में दिखाई देता है कि ममता बनर्जी कुछ लोगों पर गुस्सा कर रही हैं.
वहीं एक भीड़ कुर्सियाँ पटक रही है और इमारत के भीतर तोड़-फोड़ कर रही है.
फ़ेसबुक और शेयर चैट पर सैकड़ों लोग इस वीडियो को शेयर कर चुके हैं और एक लाख से ज़्यादा बार यह वीडियो देखा गया है.
लेकिन अपनी पड़ताल में हमने पाया कि ये वीडियो तो सही है, लेकिन इसके साथ किया जा रहा दावा ग़लत है.
वीडियो का सच
अपनी पड़ताल में हमने कि ये वायरल वीडियो 30 नवंबर 2006 का है.
साल 2006 में इस हंगामे के समय ममता बनर्जी नहीं, बल्कि बुद्धदेब भट्टाचार्य पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री थे और सूबे में सीपीआई (एम) की सरकार थी.
यह बात सही है कि वीडियो में जो लोग हंगामा करते दिख रहे हैं वो तृणमूल कांग्रेस पार्टी के नेता और कार्यकर्ता हैं.
लेकिन ये हंगामा 'वंदे मातरम' पर रोक लगाए जाने के कारण नहीं हुआ था.
उस समय की मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस हंगामे की वजह थी ममता बनर्जी की गिरफ़्तारी.
इन रिपोर्ट्स के अनुसार ममता बनर्जी ने प्रशासन के आदेशों को नहीं मानते हुए पश्चिम बंगाल के सिंगूर में दाख़िल होने का प्रयास किया था. वो टाटा कंपनी के नैनो प्लांट के ख़िलाफ़ चल रहे प्रदर्शन में शामिल होना चाहती थीं. लेकिन स्थानीय पुलिस ने उन्हें सिंगूर के बाहर ही गिरफ़्तार कर लिया था.
ममता बनर्जी ने पुलिस की इस कार्रवाई को असंवैधानिक बताया था जिसके बाद ममता बनर्जी, उनकी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता पश्चिम बंगाल असेंबली में सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने पहुँचे थे.
इसी दौरान सदन में हंगामा हुआ था और तोड़फोड़ की गई थी.
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस हंगामे में वाम मोर्चे के छह विधायक, विधानसभा के दो कर्मचारी और दो पत्रकार घायल हो गये थे.
टीएमसी और सीपाई (एम) नेताओं के टकराव के कारण स्थिति ज़्यादा बिगड़ गयी थी.
लेकिन इस घटना के वीडियो को सोशल मीडिया पर अब ग़लत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है.
(इस लिंक पर क्लिक करके भी आप हमसे जुड़ सकते हैं)
- पढ़ें फ़ैक्ट चेक की सभी कहानियाँ एक साथ - फ़ैक्ट चेक- जानें फ़र्ज़ी ख़बरों और दावों का सच
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)