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तीन तलाक़ बिल लोकसभा में पास
विपक्ष की आपत्तियों के बीच गुरुवार को लोकसभा में तीन तलाक़ बिल पास हो गया. अब इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा.
मुस्लिम वूमेन (प्रोटेक्शन ऑफ़ राइट्स ऑन मैरिज) बिल पर चर्चा के दौरान सत्ताधारी एनडीए के दो प्रमुख घटकों भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड में दूरियां दिखीं.
जनता दल यूनाइटेड के सांसद बिल के विरोध में वॉकआउट कर गए. कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने भी वॉक आउट किया.
मतविभाजन के दौरान बिल के समर्थन में 303 और विरोध में 82 वोट पड़े.
इसके पहले केंद्रीय क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में बिल पेश करते हुए कहा कि इसे राजनीतिक चश्मे से न देखा जाए.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और मलेशिया जैसे दुनिया के 20 मुस्लिम देशों में तीन तलाक़ पर पाबंदी लगाई जा चुकी है. धर्मनिरपेक्ष भारत ऐसा क्यों नहीं कर सकता है?
सरकार ने दिलाया भरोसा
उन्होंने कहा, "लैंगिक समानता और न्याय के लिए ये विधेयक ज़रूरी है. सुप्रीम कोर्ट के अगस्त 2017 के फ़ैसले के बाद भी महिलाओं को तलाक़-ए-बिद्दत से तलाक़ दिया जा रहा है."
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद 24 जुलाई 2019 तक तीन तलाक़ के 345 मामले सामने आए हैं.
उन्होंने कहा कि जिन्हें प्रस्तावित क़ानून के दुरपयोग की आशंका है, वो सही नहीं है. सरकार ने इसमें हितों की हिफ़ाज़त के इंतज़ाम (सेफ़गार्ड) भी किए हैं.
विपक्ष ने किया विरोध
विपक्ष के नेताओं ने सरकार पर विधेयक को लेकर जल्दीबाज़ी करने का आरोप लगाया.
एआईएमआईएम नेता असदउद्दीन ओवैसी ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि ये महिलाओं के हक़ में नहीं है.
जनता दल यूनाइटेड के नेता राजीव रंजन ने कहा कि ये बिल समाज के एक वर्ग में अविश्वास की भावना पैदा करेगा. कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके के सांसदों ने भी बिल का विरोध किया.
समाजवादी पार्टी के सांसद आज़म ख़ान जब तीन तलाक़ पर हो रही चर्चा में हिस्सा ले रहे थे तो उनकी एक टिप्पणी पर विवाद हो गया जिसके बाद वो सदन के बाहर चले गए.
तीन तलाक़ बिल में एक साथ तीन बार बोलकर दिए जाने वाले तलाक़ (तलाक़-ए-बिद्दत) को अपराध बनाने का सिफ़ारिश है. इसमें दोषी पति को जेल भेजने का प्रावधान है. पिछली लोकसभा में ये भी बिल पास हुआ था लेकिन फरवरी 2019 में ये बिल राज्यसभा में पारित नहीं हो सका था.
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