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ईद से पहले भारत प्रशासित कश्मीर में कैसे हैं हालात?
जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद पूरे भारत प्रशासित कश्मीर और ख़ासकर घाटी की स्थिति पर पूरे देश और दुनिया की नज़र है.
सोमवार को ईद है और प्रशासन की तरफ़ से कई इलाक़ों में कर्फ़्यू में ढील देखने को मिली.
भारत प्रशासित कश्मीर में मौजूद बीबीसी संवाददाता आमिर पीरज़ादा ने बताया कि कर्फ्यू में ढील के बाद सड़कों पर कुछ हलचल देखने को मिली.
आमिर ने बताया, ''सोमवार को ईद मनाई जाएगी, इसलिए सभी लोग खरीदारी के मकसद से बाहर निकल आए थे. गाड़ियां चल रही थीं, लोग घरों से निकल आए थे.''
आमिर ने बताया कि रविवार सुबह लगभग 12 बजे तक सड़कों पर गाड़ियों की काफी आवाजाही थी, कुछ जगहों पर तो ट्रैफिक जाम भी लग गए थे.
शुक्रवार को श्रीनगर के सौरा इलाके में नमाज़ के बाद विरोध प्रदर्शन हुए थे. हालांकि भारत सरकार का कहना है कि हालात नियंत्रण में हैं और कहीं पर कोई बड़ा विरोध प्रदर्शन नहीं हुआ है.
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने ट्वीट करके कहा है कि पुलिस की ओर से एक गोली भी नहीं चलाई गई है.
जम्मू कश्मीर पुलिस ने कश्मीर के आईजीपी ने का बयान ट्विटर पर अपलोड किया है.
इसमें आईजीपी कह रहे हैं, ''कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों की तरफ से घाटी में गोलीबारी की ख़बरें चलाई गई हैं, यह पूरी तरह से ग़लत समाचार है. घाटी में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है. घाटी में बीते एक हफ्ते से शांति कायम है और हम मीडिया संस्थानों का धन्यवाद देते हैं जिन्होंने इसमें सहयोग दिया.''
बीबीसी संवाददाता आमिर पीरज़ादा के मुताबिक़ दोपहर 12 बजे बाद अचानक से एक बार फिर पाबंदियां बढ़ा दी गई.
उन्होंने कहा, ''सुरक्षाबलों ने एक बार फिर बैरिकेड लगाने शुरू कर दिए और लोगों की हलचल भी एकदम से कम हो गई.''
दरअसल घाटी में सूचना प्राप्त करने के ज़्यादातर साधन फिलहाल बंद पड़े हैं. किसी के पास कोई जानकारी नहीं हैं. मोबाइल या इंटरनेट सब बंद हैं, जिसकी वजह से किसी से संपर्क नहीं हो रहा.
कैसी होगी ईद ?
शुक्रवार को हुए प्रदर्शऩ के बाद फ़िलहाल सौरा में स्थिति क्या है, इस बारे में भी जानकारी नहीं मिल पा रही है.
प्रशासन ने सौरा जाने वाली सभी सड़कें बंद करके रखी हैं. इसी कारण बीबीसी संवाददाता भी वहाँ नहीं जा पाए.
आमिर पीरज़ादा बताते हैं, ''हमने सौरा जाने की कोशिश की लेकिन वहां जाने के कुछ रास्ते सुरक्षाबलों ने बंद किए हैं तो बाकी रास्तों पर नाराज़ स्थानीय युवा खड़े थे."
एक सवाल यह भी उठता है कि ऐसे हालात में ईद की कहां अदा की जाएगी?
बीबीसी संवाददाता रियाज़ मसरूर ने जानकारी दी कि आमतौर पर जामा मस्जिद में ईद की नमाज़ अदा की जाती है, इसके अलावा ईदगाह में या फिर बड़े मैदानों में भी ईद की नमाज अदा होती है.
रियाज़ ने बताया, ''अनंतनाग, शोपियां, बांदिपुरा, कुपवाड़ा जैसी जगहों में आमतौर पर बड़े-बड़े मैदानो में ईद की नमाज़ अदा की जाती है. लेकिन माना जा रहा है कि इस बार शायद घरों और मोहल्लों के अंदर ही ईद की नमाज़ अदा करने की इजाज़त दी जाएगी.''
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