आप इस वेबसाइट का टेक्स्ट-ओनली वर्शन देख रहे हैं जो कम डेटा खर्च करता है. सभी तस्वीरों और वीडियो के साथ वेबसाइट का मुख्य वर्शन देखें.
कोरोनाः चेतन भगत ने पूछा फ़ाइज़र वैक्सीन क्यों नहीं, भिड़ गईं कंगना रनौत
कोरोना महामारी के कहर और अस्पतालों की बुरी हालत के बीच भारत में वैक्सीन पर भी चर्चा लगातार जारी है. इस चर्चा में शामिल होने वालों में नया नाम लेखक चेतन भगत का है.
चेतन ने बुधवार को ट्विटर पर वैक्सीन को लेकर कुछ ऐसा लिखा जिस पर सोशल मीडिया में काफ़ी प्रतिक्रियाएं आईं.
दरअसल ‘फ़ाइव पॉइंट समवन’, ‘टू स्टेट्स’ और ‘हाफ़ गर्लफ़्रेंड’ जैसी किताबों से युवाओं के बीच लोकप्रिय हुए लेखक ने भारत में फ़ाइज़र और मॉडर्ना की वैक्सीन उपलब्ध न होने को लेकर सवाल उठाए थे.
उन्होंने इसके लिए एक के बाद एक कई ट्वीट करके भारत सरकार की आलोचना की थी.
'क्या हम बेस्ट के लायक नहीं हैं?'
चेतन भगत ने लिखा, “फ़ाइज़र और मॉडर्ना की वैक्सीन सबसे अच्छी हैं. दोनों ही दिसंबर 2020 से उपलब्ध थीं लेकिन इनमें से कोई भी भारत में उपलब्ध नहीं है. क्यों? क्या हम बेस्ट के लायक नहीं हैं? क्या हम हथियार और रक्षा उपकरण विदेशों से नहीं खरीदते? क्या यह युद्ध जैसी स्थिति नहीं है? वैक्सीन के लिए सिर्फ़ यहीं का होना ज़रूरी क्यों है?”
उन्होंने अपने अगले ट्वीट में लिखा, “सबसे अच्छी वैक्सीनों में से एक और ज़्यादातर विकसित देशों में इस्तेमाल होने वाली फ़ाइज़र ने दिसंबर 2020 में भारत में इस्तेमाल के लिए अर्जी थी लेकिन भारत ने उसे अपने यहाँ और अध्ययन करने को कहा. इसके बाद फ़ाइज़र ने 21 फ़रवरी को अपनी अर्ज़ी वापस ले ली. सोचिए, अगर फ़ाइज़र को दिसंबर में ही मंज़ूरी मिल जाती तो कितनी जानें बचाई जा सकती थीं.”
चेतन भगत के ये ट्वीट्स सोशल मीडिया में तेज़ी से सर्कुलेट होने लगे और इन पर तेज़ी से प्रतिक्रियाएं भी आने लगीं.
कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने कुछ तथ्यों की ओर चेतन भगत का ध्यान आकर्षित किया.
'कुछ तथ्य छूट गए हैं...'
शौविक मज़ुमदार नाम के एक ट्विटर यूज़र ने लिखा, “एक करेक्शन- फ़ाइज़र चाहती थी कि भारत उस क्लॉज पर साइन कर दे जिससे किसी तरह के साइड इफ़ेक्ट की ज़िम्मेदारी कंपनी की न हो. इस पर भारत ने फ़ाइज़र से ब्रिजिंग ट्रायल के लिए कहा जो अपने-आप में सही फ़ैसला था. हालाँकि फ़ाइज़र ने इससे इनकार करते हुए अपनी अर्जी वापस ले ली. इसके अलावा फ़ाइज़र भारत के लिए बहुत महँगी थी और इसे बेहद कम तापमान पर स्टोर करना भी भारत के लिए मुश्किल होता.”
टी. वेंकटेश ने लिखा, “चेतन, तारीखें तो सही हैं लेकिन कुछ तथ्य छूट गए हैं. फ़ाइज़र भारतीय आबादी पर ट्रायल और उसका सेफ़्टी डेटा साझा करने को तैयार नहीं थी. यही वजह थी कि उसे मंज़ूरी नहीं मिली और कंपनी को आख़िकार अपनी अर्जी वापस लेनी पड़ी.”
लिली ने एक मीडिया रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए ट्वीट किया, “आपको कैसे पता कि अगर फ़ाइज़र अमेरिकी लोगों के लिए सुरक्षित है तो यह एशियाई और भारतीय आबादी के लिए भी सुरक्षित होगी? हर वैक्सीन को एक तय प्रक्रिया से गुज़रना होता है. फ़ाइज़र को इसमें छूट क्यों मिले?”
कंगना रनौत भी बीच में आईं
इन सबके बीच बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत भी चेतन भगत से भिड़ गईं.
उन्होंने ट्वीट किया, “किसने कहा कि वो बेस्ट हैं? मेरे ऐसे दोस्त हैं जिन्होंने फ़ाइज़र वैक्सीन लगवाई और उन्हें बुखार, शरीर में दर्द जैसी दिक्कतें हुईं. आप सब भारत और भारतीयों से नफ़रत करना कब बंद करेंगे? हमारी वैक्सीन की माँग विदेशों में भी है. अभी हम आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत अपनी अर्थव्यवस्था को मज़बूत बनाने की कोशिश कर रहे हैं. परजीवी बनना बंद कीजिए.”
किरण मज़ुमदार शॉ का समर्थन
हालाँकि बायोफ़ार्मा कंपनी बायोकॉन की प्रमुख किरण मज़ुमदार शॉ ने चेतन भगत के समर्थन में ट्वीट किया है.
उन्होंने लिखा, “मैं आपके ट्वीट में ग़ुस्सा और निराशा देख-सुन सकती हूँ. हम अपने ही अहंकार से पीड़ित रहे हैं.”
इधर चेतन भगत लगातार अपना बचाव करते नज़र आ रहे हैं.
उन्होंने अपने नए ट्वीट मीडिया रिपोर्ट के हवाले से अलग-अलग वैक्सीन के प्रभाव की लिस्ट शेयर की और तंज़ भरे अंदाज़ में लिखा, “मैं भला यह कहने की हिम्मत कैसे कर सकता हूँ कि भारत ने ग़लतियाँ की हैं? मैं यह कैसे कह सकता हूँ कि कुछ अच्छी वैक्सीन भारत में उपलब्ध नहीं हैं? मैं फ़ैसलों पर सवाल उठाने की ज़ुर्रत कैसे कर सकता हूँ? ज़रूर मुझे इसके पैसे मिले होंगे, मूर्ख, दुष्ट या बेवकूफ़ होऊंगा. कोई बात नहीं अगर लाखों भारतीय मर रहे हैं और बाकी दुनिया कोविड से उबर रही है. हम अब भी परफ़ेक्ट हैं.”
अब एक मई से 18 साल से अधिक और 45 साल से कम उम्र के लोग भी वैक्सीन भी लगवा सकेंगे. इस बीच कई राज्यों ने वैक्सीन की कमी की शिकायत भी की है.
साथ ही एस्ट्रेजेनेका-सीरम इंस्टिट्यूट की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन की कीमतों पर बहस भी जारी है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)