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अमित शाह से पहलवानों की मुलाक़ात के बाद विरोध प्रदर्शन पर असमंजस
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात के बाद भारतीय पहलवान साक्षी मलिक रेलवे में अपनी नौकरी पर वापस लौट गई हैं.
साक्षी ने ट्वीट करके इस बारे में जानकारी दी है. लेकिन उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन जारी है और वे इससे पीछे नहीं हटेंगी.
उनका ट्वीट आने से पहले ऐसी कई रिपोर्ट्स सामने आईं, जिनमें दावा किया गया था कि 'साक्षी मलिक ने इस विरोध प्रदर्शन से अपना नाम वापस ले लिया है'
कुछ रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया गया कि साक्षी के साथ ही दूसरे पहलवानों ने भी अपने नाम वापस ले लिए हैं.
लेकिन बाद में साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया ने ट्वीट करके अपनी स्थिति स्पष्ट की.
साक्षी मलिक ने अपने ट्वीट में कहा- ये ख़बर बिल्कुल ग़लत है. इंसाफ़ की लड़ाई में ना हम में से कोई पीछे हटा है, ना हटेगा. सत्याग्रह के साथ साथ रेलवे में अपनी ज़िम्मेदारी को साथ निभा रही हूँ. इंसाफ़ मिलने तक हमारी लड़ाई जारी है. कृपया कोई ग़लत ख़बर ना चलाई जाए.
दूसरी ओर बजरंग पुनिया ने भी ऐसी ख़बरों पर ट्वीट पर स्थिति स्पष्ट की.
बजरंग पुनिया, "आंदोलन वापस लेने की खबरें कोरी अफ़वाह हैं. ये ख़बरें हमें नुक़सान पहुँचाने के लिए फैलाई जा रही हैं. हम न पीछे हटे हैं और न ही हमने आंदोलन वापस लिया है. महिला पहलवानों की एफ़आईआर उठाने की ख़बर भी झूठी है. इंसाफ़ मिलने तक लड़ाई जारी रहेगी."
लेकिन आंदोलन को लेकर अब भी कई सवाल हैं.
लेकिन इससे पहले ये जान लेते हैं कि पिछले दिनों इस मामले में क्या कुछ हुआ.
यौन शोषण के आरोपों से लेकर विरोध प्रदर्शन तक
साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया जैसे दिग्गज पहलवान पिछले एक महीने से दिल्ली के जंतर मंतर पर बीजेपी सांसद और कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को गिरफ़्तार करने की मांग लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ छह पहलवानों और एक नाबालिग़ पहलवान ने यौन शोषण का आरोप लगाया है.
इस मामले में दिल्ली के कनॉट प्लेस थाने में दो एफ़आईआर दर्ज कराई गई हैं.
इसमें से एक एफ़आईआर में छह महिला पहलवानों ने अपने साथ हुए यौन शोषण की शिकायत दर्ज कराई है.
वहीं, दूसरी एफ़आईआर में एक नाबालिग़ पहलवान की ओर से यौन शोषण की शिकायत दर्ज़ कराई गई है.
इसी एफ़आईआर में पॉक्सो क़ानून से जुड़ी धाराएँ लगाई गई हैं.
इस क़ानून के तहत अभियुक्त को तत्काल गिरफ़्तार किए जाने का प्रावधान है. लेकिन बृजभूषण शरण सिंह को अब तक गिरफ़्तार नहीं किया गया है.
लगभग एक महीने तक विरोध प्रदर्शन करने के बाद पहलवानों ने बीती 28 मई को नए संसद भवन की ओर मार्च करने का फ़ैसला किया था.
बता दें कि पीएम मोदी इसी दिन नए संसद भवन का उदघाटन कर रहे थे. ऐसे में दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए उनके ख़िलाफ़ बल प्रयोग किया.
इसके बाद महिला पहलवानों ने अपने मेडल्स को गंगा में प्रवाहित करने का फ़ैसला किया.
साक्षी, विनेश और बजरंग पुनिया ऐसा करने के लिए हरिद्वार पहुँचे भी, लेकिन ऐन मौक़े पर किसान नेता नरेश टिकैत ने उन्हें ऐसा करने से रोक लिया.
इसके बाद पहलवानों ने सरकार को पाँच दिन का अल्टीमेट दिया. और इन पाँच दिनों के अंदर ही पहलवानों की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात हो गई.
इसके बाद ही साक्षी मलिक की ओर से आंदोलन से नाम वापस लेने का दावा करने वाली न्यूज़ रिपोर्ट्स सामने आईं.
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अमित शाह से मुलाक़ात में क्या हुआ?
साक्षी मलिक के साथ-साथ उनके साथ आंदोलन में शामिल पहलवानों ने इन न्यूज़ रिपोर्ट्स को ख़ारिज किया है.
साक्षी मलिक ने अपनी और विरोध प्रदर्शन कर रहे दूसरे पहलवानों की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात की पुष्टि की है.
समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा, "हम इस लड़ाई से ना पीछे हटे हैं और ना पीछे हटेंगे, इंसाफ़ मिलने तक ये लड़ाई जारी रहेगी. गृह मंत्री अमित शाह से हमारी मुलाक़ात हुई, हमने बातचीत की, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला. हमारी यही मांग थी कि अभियुक्त पर गंभीर आरोप लगे हैं और उन्हें गिरफ़्तार किया जाए."
उन्होंने ये भी कहा है कि "हमारी सिर्फ़ बात हुई है, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ."
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क्या विनेश और बजरंग ने नाम वापस लिया?
साक्षी ने उस दावे का भी खंडन किया, जिसमें ये कहा जा रहा है कि बजरंग पुनिया और विनेश फोगाट ने इस आंदोलन से अपना नाम वापस ले लिया है.
उन्होंने एएनआई से कहा है कि "ये ग़लत ख़बर है. हम तीनों एक हैं और एक ही रहेंगे जब तक इंसाफ़ नहीं मिल जाता. हम तीनों ने नाम वापस नहीं लिए हैं."
बजरंग पुनिया ने भी ऐसी ही बात कही है.
विनेश फोगाट ने भी अपने ट्वीट में लिखा है - महिला पहलवान किस ट्रॉमा से गुज़र रही हैं इस बात का अहसास भी है फ़र्ज़ी ख़बर फैलाने वालों को? कमज़ोर मीडिया की टांगें हैं जो किसी गुंडे के हंटर के आगे काँपने लगती हैं, महिला पहलवान नहीं."
इसी ट्वीट में उन्होंने मशहूर शायर आबिद अदीब का शेर साझा किया है - "जहाँ पहुँच के क़दम डगमगाए हैं सब के, उसी मक़ाम से अब अपना रास्ता होगा".
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'नौकरी' पर क्या बोले पहलवान
साक्षी मलिक के साथ ही विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया ने भी ट्वीट करके उनके नौकरियों पर वापस लौटने के मुद्दे पर अपनी बात रखी है.
साक्षी, विनेश और बजरंग पुनिया ने एक समान ट्वीट करके लिखा है, "हमारे मेडलों को 15-15 रुपए के बताने वाले अब हमारी नौकरी के पीछे पड़ गए हैं. हमारी ज़िंदगी दांव पर लगी हुई है, उसके आगे नौकरी तो बहुत छोटी चीज़ है. अगर नौकरी इंसाफ़ के रास्ते में बाधा बनती दिखी, तो उसको त्यागने में हम दस सेकेंड का वक्त भी नहीं लगाएँगे. नौकरी का डर मत दिखाइए."
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नाबालिग़ पहलवान ने शिकायत वापस ली?
इस मुद्दे पर एक सवाल और भी है कि क्या जिस नाबालिग़ महिला पहलवान की ओर से बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ यौन शोषण के आरोप लगाए गए हैं, उसने अपनी शिकायत वापस ले ली है?
कुछ दिनों पहले आई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि नाबालिग़ महिला पहलवान अपनी शिकायत वापस ले रही है जिसकी वजह से बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ लगी पोक्सो की धारा हट सकती है.
लेकिन इस मुद्दे पर दिल्ली पुलिस के साथ ही सोमवार को साक्षी मलिक ने भी स्पष्टीकरण दिया है.
साक्षी मलिक ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया है कि "ये सब फ़ेक न्यूज़ है. ये हमारे सत्याग्रह, हमारे विरोध प्रदर्शन को कमजोर करने, आम जनता को हमसे दूर करने के लिए ये सारी चीज़ें चलाई गई हैं, जो बिल्कुल ग़लत है. हम इस लड़ाई में ना ही कभी पीछे हटे थे और ना ही कभी पीछे हटेंगे."
साक्षी मलिक के पति और पहलवान सत्यव्रत कादियान ने एएनआई से कहा है कि जंतर मंतर पर 28 तारीख़ को हुई घटना के बाद उन्हें वहाँ जाने की इजाज़त नहीं है.
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असमंजस का दौर जारी
इस मामले में काफ़ी कुछ ऐसा है जिसे लेकर अभी भी असमंजस और रहस्य की स्थिति बनी हुई है.
अब तक पुख्ता ढंग से ये नहीं पता है कि पिछले कुछ घंटों में पर्दे के पीछे ऐसा क्या कुछ हुआ जिसकी वजह से पहलवानों की अमित शाह से मुलाक़ात हुई. और इस मुलाक़ात का सूत्रधार कौन रहा.
इस समय सबसे बड़ा सवाल ये है कि पहलवानों के अपनी नौकरी पर वापस लौटने के बाद भी क्या ये विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.
सवाल ये भी है कि अगर पहलवान अपनी नौकरी पर जाना जारी रखते हैं तो इस आंदोलन का नेतृत्व कौन करेगा.
इस मुद्दे पर पहलवानों की ओर से साफ़ तौर पर कुछ नहीं कहा गया है. उन्होंने बस इतना कहा है कि ये आंदोलन जारी रहेगा.
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