मार्केटिंग रणनीति नाकाम, क्या करें काम?

मार्केटिंग कंपनी गोल्डस्टार
    • Author, एरिक बर्टन
    • पदनाम, बीबीसी कैपिटल
  • प्रकाशित

कंपनियों की सेल्स टीम अक्सर अपने ग्राहकों से लंबे चौड़े वादे कर लेती है. ऐसे वादे पूरे करना कंपनी के बूते की बात नहीं होती है.

बड़ी कंपनियां तो फिर भी इस दिक़्क़त से निपट लेती हैं. मगर, छोटी और नई कंपनियों के लिए सेल्स टीम के ये वादे बड़ी परेशानी का सबब बन जाते हैं. वादा पूरा नहीं हुआ तो वादाख़िलाफ़ी का आरोप और बाज़ार में बुरे नाम का ख़तरा.

ऐसी हालत में क्या करना चाहिए? चलिए जानने की कोशिश करते हैं.

अमेरिका में गोल्डस्टार नाम की कंपनी है, जो फ़िल्म, नाटक और खेल के मुक़ाबलों के टिकट ऑनलाइन बेचती है. इसी मे सेल्समैन हैं जिम मैकार्थी.

जिम मैकार्थी, गोल्ड स्टार के सह-संस्थापक और सीईओ
इमेज कैप्शन, जिम मैकार्थी, गोल्ड स्टार के सह-संस्थापक और सीईओ

मैकार्थी का काम है कि वो ऐसे आयोजन करने वालों से अपनी कंपनी के लिए काम लेकर आएं. अभी हाल में मैकार्थी जब अपने ग्राहकों से मिले, सबने एक अलग तरह की मांग रखी.

उन्होंने कहा कि बहुत से ऐसे लोग होते हैं जो टिकट ख़रीदते-ख़रीदते रह जाते हैं. ऐसे लोग टिकट ख़रीद लें, वे इसका कोई उपाय खोजें.

अब सेल्स टीम के पास ऐसी कोई रणनीति नहीं थी कि ऐसे संभावित ग्राहकों को कैसे वापस ख़रीदारी की टेबल पर ले आए.

लिहाज़ा, मैकार्थी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया. वे ऐसे ग्राहकों को ई-मेल भेजने लगे, जिन्होंने टिकट ख़रीदते-ख़रीदते छोड़ दिया. मेल में वो ग्राहकों को बताते थे कि टिकट अभी भी उपलब्ध हैं. वो चाहें तो अभी भी ले सकते हैं.

मार्केटिंग रणनीति

ये रणनीति काम आई. कई मामलों में ग्राहकों ने ये ई मेल पाने के बाद टिकट ख़रीद लिए.

मैकार्थी कहते हैं कि ये उनकी कंपनी की रणनीति का हिस्सा नहीं था. मगर वक़्त की मांग पर उन्होंने इसमें बदलाव की ज़रूरत महसूस की. बदलाव किया और उसका फ़ायदा भी मिला. मैकार्थी ने तो तुरंत अपनी कंपनी की रणनीति बदल ली.

मगर अक्सर ऐसा नहीं होता. उन कंपनियों में अक्सर रणनीति बनाने वाले और उसे बाज़ार में बेचने वालों के बीच संवाद की कमी होती है. नतीजा ये कि रणनीति और उसकी मार्केटिंग में फ़र्क़ हो जाता है.

मार्केटिंग रणनीति

असल में कंपनी पहले अपने लिए टारगेट तय करती है. जैसे कोई ऐप बनाना या फिर सामान बेचने का. फिर इस टारगेट को कैसे हासिल किया जाए, इसकी रणनीति बनती है. अक्सर इस टारगेट और रणनीति में कनफ्यूज़न हो जाता है.

जानकार कहते हैं कि थोड़ी समझदारी से इस परेशानी को दूर किया जा सकता है.

अमेरिका के बोस्टन की कंपनी ‘एडैप्टिव इंटेलिजेंस’ के पैट्रिक शिया कहते हैं कि अक्सर रणनीति बनाने वाले, इसे बेचने वालों से बात नहीं करते. बेहतर होगा कि तालमेल की ये कमी दूर की जाए. सेल्स टीम को समझाया जाए कि वो ग्राहकों को क्या बेचें.

पैट्रिक शिया, एडडैप्टिव के सह-संस्थापक
इमेज कैप्शन, पैट्रिक शिया, एडडैप्टिव के सह-संस्थापक

बीच के लेवल के मैनेजर को आपसी समझदारी बेहतर करने को कहा जा सकता है. वो मिल जुलकर काम करेंगे तो सेल्स टीम को भी टारगेट और रणनीति का फ़र्क़ मालूम रहेगा.

सेल्स टीम के हर सदस्य को कंपनी से बातचीत करके, उसे रणनीति बनाने वाली टीम से जोड़कर, कनफ्यूज़न की स्थिति से बचा जा सकता है.

शिया कहते हैं कि कंपनी के हर सदस्य को मालूम होना चाहिए कि अंदर क्या काम हो रहा है. और बाज़ार में जाकर क्या चीज़ बेचनी है.

अक्सर, सेल्स टीम के लिए बड़े टारगेट तय कर दिए जाते हैं. दबाव में वो जाकर ग्राहकों को चांद-तारे देने का वादा कर आते हैं. ऐसे वादे जिन्हें पूरे करना कंपनी के बस की बात नहीं होती.

ऐसे में ज़रूरत होती है कि सेल्स के टारगेट के साथ साथ मार्केटिंग की टीम को कंपनी के दूरगामी लक्ष्य भी समझाए जाएं. वो फ़ौरी टारगेट पूरे करने के साथ-साथ कंपनी की भविष्य की योजनाओं को भी समझें.

मार्केटिंग मंत्र

ख़ुद मैकार्थी इस बारे में अपना तजुर्बा बताते हैं. उनकी पहले की कंपनी में एक सेल्सपर्सन बेहद उम्दा काम करता था. हर साल टारगेट से कई गुना ज़्यादा काम करता था.

लेकिन दिक़्क़त ये थी कि वो अक्सर ग्राहकों को ऐसे वादे कर देते थे, जिसे पूरे करने में कंपनी के पसीने छूट जाते थे. कई बार तो वो मुमकिन ही नहीं होता था. ऐसा सिर्फ़ कंपनी की प्रोडक्शन टीम और सेल्स टीम में बातचीत की कमी की वजह से होता था.

मैकार्थी ने अपने इस पुराने साथी की ग़लतियों से सबक़ लिया. इस सबक़ को उन्होंने मौजूदा कंपनी में आज़माया और कामयाब रहे.

मार्केटिंग रणनीति

मैकार्थी सलाह देते हैं कि कंपनी को ज़रूरत के मुताबिक़ अपनी रणनीति बदल लेना चाहिए. ये नहीं सोचना चाहिए कि रणनीति में तो बदलाव नहीं हो सकता.

इंसान को ही बदलना होगा. रणनीति को लेकर लचीलापन रहेगा, तो लक्ष्य हासिल करने में और आगे बढ़ने में सहूलियत होगी.

और, सबसे बड़ी बात, मार्केटिंग की टीम को प्रोडक्ट बनाने वालों के इरादों की ख़बर होनी चाहिए. उन्हें ही बाज़ार में जाकर इसे बेचना है.

जो टीम लीडर दोनों में बेहतर तालमेल कर लेता है, उसकी कामयाबी तय है.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख <link type="page"><caption> यहां</caption><url href="http://ndjeirbsjao.shop/capital/story/20160229-what-should-you-do-if-your-sales-team-goes-off-the-rails%22 platform="highweb"/></link> पढ़ें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी कैपिटल </caption><url href="http://ndjeirbsjao.shop/capital/story/20160229-what-should-you-do-if-your-sales-team-goes-off-the-rails%22 platform="highweb"/></link>पर उपलब्ध है.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> आप यहां</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> क्लिक कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)