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कोरोना वायरसः क्लोरीन डाइऑक्साइड, वो ख़तरनाक़ केमिकल जिसे कोविड-19 का इलाज बताया जा रहा
- Author, क्रिस्टीना जे. ऑरगज़
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़ वर्ल्ड
- प्रकाशित
कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी के चमत्कारिक इलाज के तौर पर कई लोग इन दिनों एक विवादास्पद रसायन क्लोरीन डाइऑक्साइड के इस्तेमाल को बढ़ावा देने लगे हैं.
इसे 'मिराकल मिनरल सप्लीमेंट' या 'चमत्कारिक खनिज पदार्थ' के नाम से भी जाना जाता है.
एक ज़माने से लोग मलेरिया, डायबिटीज़, अस्थमा, ऑटिज़्म और यहां तक कि कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज के तौर पर इसका प्रचार करते रहे हैं.
हालांकि किसी भी स्वास्थ्य संगठन ने क्लोरीन डाइऑक्साइड को एक दवा के तौर पर मान्यता नहीं दी है.
और अब जब सारी दुनिया कोविड-19 की महामारी से जूझ रही है, इस केमिकल को एक बार फिर से लोग कोरोना वायरस की काट के तौर पर पेश करने लगे हैं.
सोशल मीडिया पर लोग अपने अनुभव शेयर कर रहे हैं और क्लोरीन डाइऑक्साइड के इस्तेमाल का तरीक़ा बता रहे हैं.
क्लोरीन डाइऑक्साइड के ख़तरे
लेकिन इस केमिकल से जुड़े ख़तरों की एक लंबी सूची है और कई संगठनों ने इसके इस्तेमाल को लेकर सख़्त चेतावनी भी जारी की हैं.
आख़िरी चेतावनी अमरीका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (यूएसएफ़डीए) विभाग की तरफ़ से आई है.
यूएसएफ़डीए ने आठ अप्रैल को जारी की गई चेतावनी में कहा है, "क्लोरीन डाइऑक्साइड के प्रभाव या सुरक्षा के बारे में कोई वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं है. इससे मरीज़ के स्वास्थ्य को गंभीर ख़तरा पहुंचता है."
क्या है क्लोरीन डाइऑक्साइड?
इसे डिस्टिल वाटर (जब पानी को उबालकर भाप में और उसे वापस ठंडा कर पानी में बदल दिया जाता है) में सोडियम क्लोराइट मिलाकर तैयार किया जाता है. इसका इस्तेमाल साफ़-सफ़ाई के काम में किया जाता है. नाम से ये ब्लीच या क्लोरीन के क़रीब लगता है.
कंप्लूटेंस यूनिवर्सिटी ऑफ़ मैड्रिड में केमिस्ट्री के प्रोफ़ेसर मिगेल एंजेल सिएरा रॉड्रिग्ज़ कहते हैं, "ये एक ऐसा कीटाणुनाशक है जिसका इस्तेमाल उद्योगों में किया जाता है. इसे कभी खाने या पीने के इस्तेमाल में नहीं लाना चाहिए."
यूएसएफ़डीए ने भी कहा है कि क्लोरीन डाइऑक्साइड पीने से गंभीर साइड इफ़ेक्ट्स हो सकते हैं और यहां तक कि जान भी जा सकती है.
प्रोफ़ेसर मिगेल ने बताया, "इसमें कोई शक नहीं कि कोरोना वायरस पर क्लोरीन डाइऑक्साइड का कोई असर नहीं होता है."
जानलेवा साइड इफ़ेक्ट्स
क्लोरीन डाइऑक्साइड के इस्तेमाल के बाद मरीज़ों के स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्परिणाम सामने आए हैं.
अमरीका के फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विभाग को मिली रिपोर्टों के मुताबिक़, इस केमिकल से शरीर के श्वसन प्रणाली, लिवर (यकृत) जैसे अंग काम करना बंद कर देते हैं.
कुछ मामलों में तो दिल की धड़कनें इस हद तक असामान्य हो गईं कि मरीज़ की जान जाने तक की नौबत आ जाती है.
इसके अलावा लाल रक्त कोशिकाओं को नुक़सान, उल्टी और डायरिया का गंभीर प्रकोप भी देखा गया है.
यूएसएफ़डीए का कहना है कि क्लोरीन डाइऑक्साइड के इस्तेमाल के बाद अगर मेडिकल हेल्प लेने में देरी हुई तो इससे स्थिति और बिगड़ सकती है.
कोविड-19 के ख़िलाफ़
मुश्किल तो तब और बढ़ जाती है जब फ़ेसबुक और यूट्यूब पर ऐसे वीडियोज़ की भरमार दिखती है जिनमें लोग क्लोरीन डाइऑक्साइड के औषधीय गुणों का बखान कर रहे होते हैं.
इन वीडियो में लोगों को ये दावा करते देखा जा सकता है कि क्लोरीन डाइऑक्साइड में वायरस और बैक्टीरिया को ख़त्म करने की क्षमता है.
कोरोना वायरस से फैली महामारी के दौर में अब लोग इसे कोविड-19 के ख़िलाफ़ चमत्कारिक इलाज के तौर पर बता रहे हैं.
ऐसे ही एक वीडियो में इक्वाडोर के गुआयाक्वील शहर की एक महिला जो अस्थमा की मरीज़ भी हैं, उन्होंने क्लोरीन डाइऑक्साइड को लेकर अपने अनुभव बताएं.
एक महिला की 'आपबीती'
"मैंने सचमुच कोई टेस्ट नहीं कराया था. मैं शॉपिंग के लिए बाहर गई थी. मैं सुपरमार्केट गई थी. मैं लोगों के संपर्क में आई थी. कुछ समय के बाद मुझे रुक-रुक कर बुख़ार आने लगा. मैं बेहद थका हुआ महसूस करती थी. सबकुछ असहज सा लगता था. आंखों के पीछे और सिर में दर्द रहने लगा था."
"हफ़्ते भर बाद तो न तो मैं किसी चीज़ का स्वाद ही महसूस कर पा रही थी और न ही उसकी गंध. कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों में ऐसे ही लक्षण देखे जा रहे थे. मैंने हफ़्तों अपना पूरा ख़याल रखा. लेकिन क्लोरीन डाइऑक्साइड के इस्तेमाल के बाद ही मैंने सुधार महसूस किया."
"मैंने पहले भी क्लोरीन डाइऑक्साइड का इस्तेमाल किया था. लेकिन इसका स्वाद बहुत ही ख़राब था. अगली सुबह मेरे गले की तकलीफ़ और बुखार दोनों ही ग़ायब हो गए और मैं बहुत ही अच्छा महसूस कर रही थी."
संक्रमण के लक्षण
कोरोना वायरस से संक्रमण के मामलों में ये देखा गया है कि इस विषाणु से शुरुआत में श्वसन अंग में इन्फ़ेक्शन होता है फिर बुख़ार और सूखी खांसी और हफ़्ते भर बाद सांस लेने की तकलीफ़ और इसके बाद निमोनिया की गंभीर स्थिति पैदा हो जाती है.
जिन संक्रमित लोगों में ये लक्षण दिखाई देते हैं, उनमें से बहुत से मरीज़ों को बीमारी रोकने के लिए फ़ौरन डॉक्टरी मदद लेनी होती है.
अगर हालात बिगड़ जाएं तो मरीज़ को इंटेसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में भर्ती कराना पड़ता है, जहां उसे मेडिकल वेंटिलेटर की ज़रूरत पड़ती है.
अमरीका में कोविड-19 के इलाज के नाम पर क्लोरीन डाइऑक्साइड के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर 'जेनेसिस-II चर्च ऑफ़ हेल्थ एंड हीलिंग' नाम के एक संगठन को यूएसएफ़डीए ने चेतावनी भी दी है.
स्पेन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, कनाडा, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों ने क्लोरीन डाइऑक्साइड के इस्तेमाल पर रोक लगा रखी है.
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