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शरीर से 1000 गुना वज़न उठाने वाले जानवर
- Author, एला डेविस
- पदनाम, बीबीसी अर्थ
- प्रकाशित
पॉल एंडरसन को दुनिया का सबसे ताकवर शख्स माना जाता है. वे अपनी पीठ पर एक साथ आठ लोगों को उठा सकते थे.
कहा जाता है कि 1957 में एंडरसन ने 2.8 टन वजन अपनी पीठ पर उठाया था. इससे कुछ वक़्त के लिए एक वर्ल्ड रिकॉर्ड भी उनके नाम हो गया था. बाद में सबूतों की कमी के चलते ये रिकॉर्ड उनसे छिन गया.
बहुत से लोगों ने कोशिश की, मगर कोई भी पॉल एंडरसन के कारनामे को दोहराना तो क्या, उसके क़रीब भी नहीं पहुंच सका. किसी इंसान के इतना वज़न उठाने का तसव्वुर भी बेकार है.
मगर बहुत से जानवर हैं, जो भारी वज़न उठाने के लिए जाने जाते हैं. मसलन घोड़े. घोड़ों की बहुत सी नस्लें हैं जो भारी सामान उठाने के काम में लाई जाती रही हैं. जैसे पैकहॉर्स, शायर हॉर्स और क्लाईडेसडेल वगैरह.
वैज्ञानिकों ने घोड़ों की अलग-अलग नस्लों की क्रॉस ब्रीडिंग कराकर ये नई नस्लें तैयार की हैं, जो भारी वज़न उठा सकते हैं. वज़न उठाने वाले इन घोड़ों को अंग्रेज़ी में 'ड्रॉट हॉर्सेज़' कहते हैं.
कहते हैं कि इन घोड़ों की मदद से ही इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति कामयाब हुई. जब ये घोड़े ट्रेन के डिब्बों से लेकर लट्ठे और वैगन तक खींचकर एक जगह से दूसरे जगह ले गए.
यहां तक कि जब इंग्लैंड में जेम्स वाट ने भाप का पहला इंजन बनाया, उन्होंने इसकी ताक़त नापने के लिए हॉर्स पावर को ही पैमाना बनाया.
जेम्स वाट के मुताबिक एक घोड़ा एक मिनट में 15 टन वज़न उठा सकता है. पहले तो लोगों ने इस नाप को ग़लत बताया. मगर 1993 में हुई एक रिसर्च में जेम्स वाट का अंदाज़ा सच के बेहद क़रीब पाया गया.
अभी भी शराब के बहुत से कारखानों में ड्रॉट हॉर्सेज़ का इस्तेमाल होता है. इंग्लैंड में वन विभाग भी इन घोड़ों को कई तरह के काम में लाता है. बहुत से लोग इन घोड़ों की ताक़त देखने के लिए आते हैं.
घोड़ों के अलावा हाथी भी भारी वज़न उठाने के लिए जाने जाते हैं. सदियों से इंसान, हाथियों के ज़रिए भारी सामान की ढुलाई करता रहा है. पूर्वी एशियाई देश हों या भारत और श्रीलंका, बहुत सी जगहों पर हाथियों के ज़रिए माल ढुलाई की जाती है.
भारत में तो रेलवे का पूरा नेटवर्क हाथियों के ज़रिये बिछाया गया. यही उनके सफ़ाए की वजह भी बना. ज़्यादातर स्तनधारी जीवों के शरीर के वजन का दस फ़ीसद हिस्सा, उनका कंकाल होता है. मगर हाथियों में ये तादाद 20 फ़ीसद होती है. यही वजह है कि वे ज़्यादा वज़न उठा सकते हैं.
फिर भारी सामान उठाने में हाथियों की सूंड़ भी काफ़ी काम आती है जो डेढ़ लाख मांशपेशियों से बनी होती है. कहते हैं कि हाथी अपनी सूंड से ही 300 किलो वज़न उठा सकता है. एशियाई हाथियों के मुक़ाबले अफ्रीका के हाथी ज़्यादा बड़े होते हैं. इसीलिए वो और भी ज़्यादा वज़न उठा सकते हैं.
मगर आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि वज़न उठाने के मामले में हाथी, कुछ छोटे-छोटे जानवरों से भी बहुत पीछे है.
इस मामले में चींटियां बहुत आगे हैं. वो अपने शरीर से दस से पचास गुना तक ज़्यादा वज़न उठा लेती हैं. चींटी की एक नस्ल, 'ओकोफिलिया समाराडिना' के बारे में कहा जाता है कि वो अपने वज़न से 100 गुना भारी वज़न उठा सकती है.
इंसान, घोड़े या हाथी अपनी पीठ के ज़रिए वज़न उठाते हैं. वहीं चींटियां इसके लिए अपने जबड़ों का इस्तेमाल करती हैं, जो बेहद ताक़तवर होते हैं.
चींटियों के अलावा गुबरैले भी अपने से कई गुना ज़्यादा वज़न उठाने के लिए जाने जाते हैं. जैसे हर्कुलस बीटल नाम का गुबरैला अपने शरीर से 850 गुना ज़्यादा वज़न उठाने के लिए जाना जाता है. हालांकि इस दावे की तस्दीक नहीं की जा सकती.
अमरीका के कोलोरैडो यूनिवर्सिटी के रोजर क्राम ने इस दावे की सच्चाई का पता लगाने की कोशिश की. उन्होंने पाया कि हर्कुलस बीटल अपने वज़न से सिर्फ़ 100 गुना भारी सामान उठा सकता है. ये भी हैरान करने वाली बात है.
साल 2010 में गुबरैले की एक और नस्ल ओंथोफैगस टॉरस को दुनिया के सबसे ताक़तवर बीटल का रिकॉर्ड हासिल हुआ. गोबर में रहने वाले ये कीड़े, अपने से 1141 गुना भारी सामान खींच सकते हैं. लंदन यूनिवर्सिटी के रॉब नेल ने इस बात का पता लगाया था.
गुबरैले के मुक़ाबले कोई और जीव खड़ा हो सकता है तो वो है दीमक. जो सिर्फ़ 100 माइक्रोग्राम वज़न के होते हैं. 2007 में हुई एक रिसर्च के मुताबिक़ दीमक अपने वज़न से 1180 गुना भारी बोझ सह सकता है और अपने से 540 गुना भारी सामान खींच सकता है.
इन कीड़ों के इतना ताक़वर होने की वैज्ञानिक वजह का पता इटली के वैज्ञानिक गैलीलियो गैलीली ने लगाया था.
उनके मुताबिक़, इनका आकार छोटा होता है, तो इन जीवों को अपना वज़न संभालने में उतना ज़ोर नहीं लगाना पड़ता. इसीलिए ये छोटे-छोटे जीव अपने से कई गुना ज्यादा वज़न उठा लेते हैं या खींच लेते हैं.
इनके मुक़ाबले बड़े जानवरों की बहुत सी ताक़त अपने वज़न को संभालने में ही ख़र्च हो जाती है. इसीलिए वो कीड़ों के अनुपात में ज़्यादा वज़न नहीं उठा पाते. कीड़े छोटे होते हैं तो उन्हें ऊर्जा की भी कम ज़रूरत होती है. इसलिए भी वो अपने से ज़्यादा भारी सामान खींच लेते हैं.
अगर यही जानवर इंसानों या दूसरे जानवरों के आकार के हो जायेंगे तो इन्हें भी ज़्यादा वज़न उठाने में दिक़्क़त होगी. शायद ये अपने शरीर का बोझ ही न उठा सकें.
कहने का मतलब यह कि आज के सबसे ताक़तवर जानवरों से भी पहले धरती पर बेहद ताक़तवर जानवर रह चुके हैं. जैसे कि डायनासोर. लेकिन वो भी अपने शरीर के आगे लाचार होते होंगे.
(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी अर्थ पर उपलब्ध है.)