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पूर्व ख़ालिस्तानी लीडर ने की मोदी की तारीफ, कहा- सिखों के लिए काफ़ी काम किया
खालिस्तानी के बड़े पैरोकार रहे और लंदन में एक अलगाववादी गुट चलाने वाले जसवंत सिंह ठेकेदार ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है और कहा है कि उन्होंने सिखों की बेहतरी के लिए काफी काम किया है.
ठेकेदार ने समाचार एजेंसी एएनआई को एक वीडियो इंटरव्यू में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिख समुदाय के लिए काफी काम किया है और वे इससे प्यार करते हैं.
ठेकेदार ने कहा, ''पीएम सिख समुदाय से प्यार करते हैं. वो सिखों से प्यार करते हैं. उन्होंने सिख नेताओं की ब्लैकलिस्टिंग खत्म करवाई, करतारपुर कॉरिडोर खुलवाया. छोटे साहिब़जादे के बारे में बात की. ''
ये जसवंत सिंह के विचारों में एक बड़ा परिवर्तन है. मार्च 2013 में लंदन में बीबीसी हिंदी से बातचीत में उन्होंने कहा था कि सिख भारत में दोयम दर्जे के नागरिक हैं और उन्हें अलग देश मिलना चाहिए.
लेकिन अब वे ख़ालिस्तान को एक साज़िश बताते हैं जिसका फ़ायदा पाकिस्तान को होगा.
वे कहते हैं कि भारत सरकार पंजाब के लोगों की छोटी-मोटी बातें मान ले तो सारी समस्या हल हो जाएगी.
उन्होंने कहा, ''एक तरफ तो सरकार उनकी बड़ी मांगों पर काम किया है दूसरी तरफ लोगों की छोटी-छोटी मांगें हैं, जिन्हें मान लेने पर भारत सरकार को कोई नुकसान नहीं होगा.''
जसवंत सिंह का कहना है कि सिख बंदियों की रिहाई कोई बड़ी मांग नहीं है और इसे मान लेने से सरकार का कोई नुकसान नहीं होगा.
उनका कहना है कि सरकार ये मांगें मान लें तो ये इस तरह के आंदोलन पनपेंगे ही नहीं.
'खालसा का दुश्मन पाकिस्तान, हिन्दुस्तान नहीं'
खालिस्तानी तत्वों को पाकिस्तान के समर्थन के बारे में ठेकेदार ने कहा कि वहां की सरकार को लगता है कि उसे भारत के साथ लड़ने की जरूरत नहीं है. कुछ सिख उनके औजार के तौर पर काम कर रहे हैं. अगर पाकिस्तान भारत से सीधे लड़ाई करेगा तो उनके हजारों को लोग मारे जाएंगे. हजारों करोड़ रुपये खर्च होंगे. इससे अच्छा है कि छोटे-छोटे संगठनों और लोगों को पैसे और दूसरी मदद दी जाए जो भारत सरकार को परेशान कर सके.
ठेकेदार ने कहा ''दरअसल खालसा का असली दुश्मन पाकिस्तान है हिन्दुस्तान नहीं. उसे डर है कि अगर सिखों का अलग देश बन गया तो उसके लिए ही मुसीबत खड़ी हो जाएगी. ''
'खालिस्तान की मांग को लेकर हो रहे जनमत संग्रह पाखंड'
ठेकेदार से पूछा गया कि क्या खालिस्तानी तत्वों के उभार को खत्म करने लिए राजनीतिक कोशिश की जा सकती है. इस पर उन्होंने कहा कि हर चीज का राजनीतिक समाधान है.
उन्होंने कहा, ''सरकार को पूर्व खालिस्तानी समर्थकों को एक कमेटी बनाना चाहिए और सिखों की छोटी-छोटी मांगों को मान लेना चाहिए. इससे अलगाववादी आंदोलन खत्म हो जाएंगे.''
जसवंत सिंह को नहीं लगता कि पंजाब राज्य की मौजूदा सरकार इस समस्या का समाधान करने की काबिलियत रखती है.
जसवंत ने खालिस्तान के लिए हो रहे कथित जनमत संग्रह को साजिश बताया और कहा कि कुछ देशों में प्रतिबंधित संगठन ये पाखंड कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, ''जिस जनमत की बात कर रहे हैं उसकी मांग पंजाब ने नहीं की है. एक संगठन आईएसआई के इशारे पर ऐसा कर कर रहा. अगर भारतीय पासपोर्ट धारक या भारतीय नागरिक इसकी मांग करते हैं तो समझ आता है लेकिन जो कनाडा, अमेरिका या ब्रिटेन के नागरिक हैं और वो वोट कर रहे हैं तो उन्हें इसका कोई अधिकार नहीं है.'
कौन हैं जसवंत सिंह ठेकेदार?
जसवंत सिंह इंग्लैंड में ख़ालिस्तान के प्रमुख समर्थक हुआ करते थे. बीबीसी हिंदी ने उनसे मार्च 2013 में लंदन के साउथॉल में बात की थी. उस इलाक़े में 'मीरी-पीरी गुरुद्वारा' चलाने वाले ठेकेदार, ख़ालिस्तान के कट्टर समर्थक थे.
उन दिनों वे भारत जाने का वीज़ा न मिलने की वजह से नाराज़ थे और इसके लिए पंजाब में सत्ता में रहे अकाली दल को दोषी मानते थे.
तब से लेकर अब तक उनके विचारों में काफ़ी बदलाव देखा जा सकता है.
ठेकेदार ने तब बीबीसी को बताया था, "भारत में सिख दोयम दर्जे के नागरिक हैं, मुसलमानों को पाकिस्तान मिल गया जबकि हमें हिंदुओं के अत्याचार सहने पड़ते हैं. जब यहूदियों का देश हो सकता है, मुसलमानों का देश हो सकता है तो सिखों का अलग देश क्यों नहीं हो सकता?"
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