एसीपी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला पत्रकार की गिरफ़्तारी पर रोक
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस अधिकारी के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला पत्रकार को गिरफ़्तारी से राहत दी है.
दरअसल, एसीपी ने उस महिला पत्रकार के ख़िलाफ़ एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया था.
लाइव लॉ के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने विरोध प्रदर्शनों को कवर करने वाली महिला पत्रकारों के ख़िलाफ़ यौन हिंसा के आरोपों की जांच की मांग करने वाले पत्रकार संगठनों की याचिकाओं पर यह आदेश दिया.
कोर्ट ने कहा कि महिला पत्रकार के ख़िलाफ़ कोई 'दंडात्मक कार्रवाई' नहीं की जाएगी.
महिला पत्रकार पर दायर एफ़आईआर में कहा गया है कि उन्होंने विरोध प्रदर्शन के दौरान अपनी ड्यूटी निभा रहे एसीपी भगत को अपने सहकर्मियों के साथ मिलकर सार्वजनिक रूप से अपमानित किया और जातिसूचक गालियां दीं.
एफ़आईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 221 (लोक सेवक के काम में बाधा डालना), धारा 356(2) (मानहानि) और धारा 3(5) (सामूहिक दायित्व) के साथ एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधान भी शामिल हैं.
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने विरोध प्रदर्शनों को कवर करने वाली महिला पत्रकारों के ख़िलाफ़ यौन हिंसा के आरोपों की जांच के लिए एक अलग समिति गठित करने की मांग की.
उन्होंने कहा कि इस समिति में एक सेवानिवृत्त महिला न्यायाधीश और एक सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी को शामिल किया जाए.
तीन अक्तूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के एसीपी पर महिला पत्रकार पर यौन हमले का आरोप लगा था.
इसके बाद से अधिकारी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर की मांग को लेकर थाने के बाहर धरना प्रदर्शन हुआ.