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दीपक मंडल
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सऊदी अरब के रियाद एयरपोर्ट पर 10 अक्तूबर को हुए हमले में कई भारतीय घायल हो गए थे. सऊदी अरब में भारतीय दूतावास ने इस बारे में गुरुवार को अपडेट जारी किया है.
बयान में कहा गया है कि घायल भारतीय नागरिकों में से दो आईसीयू और एक हाई डिपेंडेंसी यूनिट में भर्ती है. तीन अन्य घायलों का इलाज सामान्य वार्ड में चल रहा है, जबकि एक व्यक्ति को गुरुवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.
भारतीय दूतावास ने जारी एडवाइजरी में भारतीय नागरिकों से स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने और हवाई हमले की स्थिति में घर के अंदर रहने की अपील की है.
एडवाइजरी में कहा गया है कि सऊदी अरब से तत्काल निकलने की ज़रूरत वाले भारतीय नागरिक बहरीन, कुवैत और कतर समेत पड़ोसी देशों से उड़ान लेने पर विचार कर सकते हैं.
रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ानें अब भी बंद हैं. वहीं, दम्माम, जेद्दा और मदीना एयरपोर्ट से उड़ानें कुछ बाधाओं के साथ जारी हैं.
भारतीय एयरलाइंस ने सऊदी अरब आने-जाने वाली उड़ानें 17 अक्तूबर तक रोक दी हैं.
गौरतलब है कि ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब के एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर किए गए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई थी और 10 घायल हुए थे.
सऊदी अरब में क़रीब 26 लाख भारतीय काम करते हैं और भारत की अर्थव्यवस्था में इनका अहम योगदान है. अगर सऊदी अरब में ऐसी घटनाएं बेकाबू होती हैं, तो इसका भारतीय हितों पर भी सीधा असर पड़ेगा.

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कॉकरोच जनता पार्टी के फ़ाउंडर अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया है कि दिल्ली में जहां वह ठहरे हुए हैं, वहां चारों तरफ़ सादी वर्दी में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है.
अभिजीत दीपके ने शुक्रवार शाम पांच बजे दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च निकालने का आह्वान किया है.
दीपके ने गुरुवार रात एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “मैं जहां ठहरा हूं, उस जगह को चारों तरफ़ से सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों ने घेर रखा है. ये लोग लगातार मेरी निगरानी कर रहे हैं. सफेद रंग की स्कॉर्पियो भी हर जगह मेरा पीछा कर रही है.”
सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्तूबर यानी शुक्रवार और शनिवार को बंद रखने के एनडीएमसी के फ़ैसले पर तंज़ करते हुए उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “अगर हम 100 जगहों का एलान कर दें, तो क्या नरेंद्र मोदी उन सभी 100 जगहों को बंद कर देंगे?”

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पाकिस्तान के पेशावर में एक स्कूल की छत गिरने की घटना में 33 बच्चों और एक शिक्षक सहित कुल 34 लोगों की मौत हो गई है.
बीबीसी उर्दू के मुताबिक़, लेडी रीडिंग अस्पताल ने 33 मौतों की पुष्टि की है, जबकि नसीरुल्लाह ख़ान बाबर अस्पताल ने एक छात्र की मौत की पुष्टि की है.
लेडी रीडिंग के आंकड़ों के अनुसार, अस्पताल में 33 शव लाए गए, जिनमें 25 वर्षीय शिक्षिका समरीन बीबी भी शामिल थीं. अस्पताल में लाए गए बच्चों की उम्र छह से चौदह वर्ष के बीच बताई जा रही है.
लेडी रीडिंग अस्पताल से 17 बच्चों को छुट्टी दे दी गई है, जबकि एक शिक्षक और तीन बच्चों का अभी भी अस्पताल में इलाज चल रहा है.

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दूसरी ओर, नसीरुल्लाह ख़ान बाबर मेमोरियल अस्पताल का कहना है कि 33 छात्र-छात्राओं को अस्पताल लाया गया था, जिनमें से एक की मौत हो गई है.
इस मामले में एक जांच समिति बनाई गई है जो घटना के बारे में पड़ताल कर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी.
पेशावर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बीबीसी उर्दू को बताया कि स्कूल की इमारत 'छात्रों का भार सहन नहीं कर सकी और ढह गई.'
पेशावर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (ऑपरेशन) फ़रहान अहमद ने कहा कि स्कूल "बेहद जर्जर हालत" में था.
पुलिस अधिकारियों का अनुमान है कि स्कूल में लगभग 300 छात्र पढ़ रहे थे, जबकि घटना के समय तीन कक्षाओं में लगभग 100 स्टूडेंट्स मौजूद थे.

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16 अक्तूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस में स्थित सेंट्रल पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को देखते हुए बीएनएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा जारी कर दी गई है.
साथ ही नई दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) ने सेंट्रल दिल्ली के इस पॉपुलर पार्क को दो दिनों के लिए बंद कर दिया है.
गुरुवार को दिल्ली की डीसीपी पीआरओ नेहा यादव ने कहा, "16 अक्तूबर 2026 को सीजेपी ने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए आम लोगों से अपील की कि वे शाम 5 बजे राष्ट्रीय तिरंगा लेकर कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में जुटें. आम आदमी पार्टी ने भी अपने कार्यकर्ताओं, समर्थकों और आम लोगों से इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने और बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की है."
"मौजूदा सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए कनॉट प्लेस और उसके आसपास के इलाकों में निषेधाज्ञा पहले से लागू है."

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डीसीपी ने बताया कि एनडीएमसी ने दिल्ली पुलिस को एक आधिकारिक पत्र के जरिए सूचित किया है कि प्रशासनिक कारणों से सेंट्रल पार्क 16 और 17 अक्तूबर को बंद रहेगा.
डीसीपी नेहा यादव ने कहा कि कनॉट प्लेस और उसके आसपास के कई व्यापारिक और मार्केट संगठनों ने अपनी दुकानों और प्रतिष्ठानों को उपद्रवी तत्वों और गैरक़ानूनी जमावड़े से बचाने के लिए सुरक्षा की मांग की है.
उन्होंने लोगों से इस जमावड़े में शामिल न होने की अपील की है और क़ानूनी कार्रवाई का सामना करने की चेतावनी दी है.
हालांकि, उन्होंने कहा, "दिल्ली पुलिस राष्ट्रीय ध्वज लेकर राष्ट्रगान गाने के उद्देश्य से कुछ चुनिंदा लोगों को किसी उचित जगह पर इकट्ठा होने की अनुमति देने के लिए इंतज़ाम करने पर विचार कर सकती है."

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि 2009 के फोर्ट हूड हमले में 13 लोगों की हत्या और 32 लोगों को घायल करने वाले पूर्व अमेरिकी सेना मेजर निडाल मलिक हसन को तय कार्यक्रम के मुताबिक़ फ़ायरिंग स्क्वाड के ज़रिए मौत की सज़ा दी जाएगी.
साथ ही उन्होंने कहा कि अब इस सज़ा-ए-मौत को लाइवस्ट्रीम नहीं किया जाएगा.
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "निडाल मलिक हसन, अमेरिकी सेना का पूर्व मेजर और गद्दार, एक बेहद बुरा और दुष्ट व्यक्ति है, जिसने 13 लोगों की हत्या की. इनमें एक महिला सैनिक प्रेग्नेंट थी, जिसकी अजन्मे बेटे के साथ मौत हो गई. निडाल मलिक हसन ने 32 और निर्दोष लोगों को गंभीर रूप से घायल किया."
ट्रंप ने आगे लिखा, "इन सबके बावजूद, मेरा मानना है कि मौत की सज़ा की प्रक्रिया को लाइवस्ट्रीम करना दुनिया के लिए यह देखने का एक कड़ा संदेश हो सकता था कि अमेरिका हसन जैसे आतंकवादियों और ऐसे लोगों से कैसे निपटता है. लेकिन कई बेहद अच्छे और नेक इरादे वाले लोग किसी व्यक्ति को मरते हुए देखना पसंद नहीं करेंगे, चाहे वह लाइवस्ट्रीम के ज़रिए हो या किसी अन्य माध्यम से."
क्या था मामला?
पिछले सप्ताह अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा था कि लोग फ़ायरिंग स्क्वाड के ज़रिए पूर्व अमेरिकी मेजर को दी जाने वाली मौत की सज़ा का लाइव प्रसारण देख सकेंगे.
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया था कि 2009 में फ़ोर्ट हूड सैन्य अड्डे पर 13 निहत्थे अमेरिकी सैनिकों की गोली मारकर हत्या करने वाले निडाल मलिक हसन को दी जाने वाली मौत की सज़ा का लाइव प्रसारण किया जाएगा.

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उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी मर्डर केस मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को चिट्ठी लिखी है.
राहुल गांधी ने इसे अपने एक्स हैंडल पर साझा किया है और दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने पर हैरानी जताई है.
उन्होंने लिखा है, "19 साल की अंकिता भंडारी ने एक वीआईपी के लिए अपनी गरिमा से समझौता करने से इनकार किया, जिसके कारण उसकी हत्या कर दी गई. चार साल बाद भी सीबीआई की धीमी जांच के चलते यह सवाल बना हुआ है कि वो वीआईपी कौन था."
राहुल गांधी ने लिखा है, "अंकिता के परिवार समेत कई लोग मानते हैं कि दुष्यंत गौतम इस मामले से जुड़े हुए हैं. ऐसे में उनकी सिक्किम के राज्यपाल के पद पर नियुक्ति से मैं स्तब्ध हूं. राज्यपाल के पद पर रहते हुए उनके ख़िलाफ़ कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं हो सकती."
"दुष्यंत गौतम की नियुक्ति की सलाह देकर प्रधानमंत्री मोदी ने साबित किया है कि महिलाओं की सुरक्षा की उन्हें बिल्कुल परवाह ही नहीं है. मैं आपसे अपील करता हूं कि सरकार को इस नियुक्ति पर पुनर्विचार करने और जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को पदभार न देने की सलाह दें. अंकिता के माता-पिता की न्याय की उम्मीद मत टूटने दीजिए."
इससे पहले अंकिता के माता पिता इंसाफ़ की मांग को लेकर 14 अक्तूबर को दिल्ली के इंडिया गेट के पास धरने पर बैठ गए थे. उनसे मिलने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी गए थे.
बाद में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि तड़के सुबह अंकिता के माता पिता को पुलिस ने हिरासत में ले लिया.
हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया था.

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अंकिता भंडारी के माता-पिता का कहना है कि उनकी बेटी की हत्या के लिए जिम्मेदार असली लोगों को बचाया जा रहा है.
बीजेपी नेता दुष्यंत कुमार गौतम का नाम अंकिता भंडारी के परिवार और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले में कथित वीआईपी के तौर पर बार-बार उठाया है.
गौतम ने इन आरोपों से इनकार किया है और आरोप लगाने वालों के ख़िलाफ़ मानहानि की कार्यवाही शुरू की. बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव रहे गौतम उत्तराखंड में पार्टी के प्रभारी भी रह चुके हैं.
12 अक्तूबर को उन्हें सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई प्रेस सेक्रेटरी कैटी ज़कारिया की कानूनी योग्यता को लेकर सवाल उठ रहे हैं. ट्रंप ने नियुक्ति के समय उन्हें वकील बताया था और ज़कारिया भी ख़ुद को लॉयर कहती रही हैं.
मामला तब चर्चा में आया जब मंगलवार को एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि उन्होंने अमेरिका के किस राज्य में वकालत के लिए ज़रूरी बार परीक्षा पास की है. ज़कारिया ने जवाब दिया, "जब मैं चीन गई." बाद में उन्होंने कहा कि शोर के कारण उन्होंने सवाल को ग़लत समझ लिया था और उन्हें लगा कि पूछा गया है कि लॉ स्कूल के बाद वे कहाँ गई थीं.
असल विवाद क्या है?
ज़कारिया ने 2011 में कैलिफ़ोर्निया की पेपरडाइन यूनिवर्सिटी से क़ानून की पढ़ाई की थी. लेकिन अमेरिका में लॉ की डिग्री अपने आप वकालत करने का लाइसेंस नहीं देती. वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक़, ज़कारिया ने कैलिफ़ोर्निया बार परीक्षा दी थी, लेकिन पास नहीं कर पाई थीं.
ज़कारिया का कहना है कि उन्होंने चीन में "इंटरनेशनल ट्रांज़ैक्शन लॉ" पर काम किया और उनके पास इसके लिए "सभी ज़रूरी योग्यताएं" थीं. उनके लिंक्डइन प्रोफ़ाइल के मुताबिक़, वह 2011 से 2013 तक बीजिंग की एक लॉ फ़र्म में एसोसिएट रही थीं. चीन में विदेशी नागरिकों को वकालत का लाइसेंस नहीं मिलता, हालांकि वे लॉ फर्मों में दूसरे पदों पर काम कर सकते हैं.
अब शिकायत भी दर्ज
बुधवार को कैंपेन फ़ॉर अकाउंटबिलिटी नाम के एक निगरानी संगठन ने कैलिफ़ोर्निया स्टेट बार में शिकायत दर्ज कराई. संगठन ने आरोप लगाया है कि ज़कारिया ने बिना लाइसेंस वकालत करने की पात्रता होने का दावा किया हो सकता है और इस मामले की जांच की मांग की है.
ज़कारिया ने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा कि जब उन्होंने टीवी पर आना शुरू किया था तो पेपरडाइन से पूछा था कि उन्हें ख़ुद को किस तरह पेश करना चाहिए. उनके मुताबिक़, यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष ने कहा था कि वह ख़ुद को "लॉयर" कह सकती हैं, लेकिन "अटॉर्नी" नहीं.
व्हाइट हाउस ने ज़कारिया का बचाव किया है. संचार निदेशक स्टीवन चिउंग ने उन्हें "बेहद योग्य और तेज़-तर्रार" बताया है.
ज़कारिया ने चीन में अपने काम के दौरान इंटरनेशनल फ़ाइनेंस कॉरपोरेशन और वर्ल्ड बैंक के लिए भी बाहर से क़ानूनी सलाहकार के तौर पर काम करने का दावा किया था. बीबीसी ने इन संस्थाओं और चीनी लॉ फर्म से इस दावे पर प्रतिक्रिया मांगी है.
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उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भीषण विस्फोट के बाद एक मकान का पूरा हिस्सा ढह गया.
गुरुवार शाम पांच बजे के क़रीब सारनाथ थाना क्षेत्र के सारंग तालाब की ये घटना है, जिसके बाद पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं.
राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ़ और एसडीआरएफ़ की टीमों को भी लगाया गया है.
अब तक दो लोगों को मलबे से बाहर निकाले जाने की जानकारी मिली है. बचाव दल मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं.
वाराणसी के डीसीपी वरुणा ज़ोन, राजेश पांडेय ने बताया कि शाम करीब पांच बजे पुलिस को मकान गिरने की सूचना मिली थी.
उन्होंने कहा कि शुरुआती जानकारी में स्थानीय स्तर पर पटाखे बनाने की बात सामने आ रही है. हालांकि, विस्फोट किस वजह से हुआ, यह अभी स्पष्ट नहीं है और इसकी जांच की जा रही है.
डीसीपी के मुताबिक़, जब पुलिस की टीम मौके पर पहुंची, तब तक किसी के मलबे में दबे होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी.
हालांकि, स्थानीय लोगों ने एक महिला के दबे होने की आशंका जताई थी. इसके बाद बचाव दलों ने मलबा हटाने का काम शुरू किया और अब तक तीन लोगों को मलबे से निकाला जा चुका है.
तीनों को अस्पताल रेफ़र कर दिया गया है. इसमें महिला और बच्चा शामिल है.

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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मीडिया की उन रिपोर्ट्स पर सफ़ाई दी है, जिनमें कहा गया था कि गृह सचिव ने अवमानना नोटिस के जवाब में सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफ़ी मांगी है.
मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, अवमानना के मामलों में जवाब दाखिल करते समय हलफ़नामे के पहले पैराग्राफ़ में बिना शर्त माफ़ी का उल्लेख करना एक निर्धारित प्रक्रिया है.
बयान के अनुसार, "गृह सचिव, पुलिस आयुक्त और दूसरे संबंधित अधिकारियों की ओर से दाख़िल हलफनामों के पहले पैराग्राफ़ में इसी प्रक्रिया का पालन किया गया है. इसके बाद हलफ़नामों में विस्तार से तथ्य पेश किए गए हैं."
"हलफ़नामों में यह स्पष्ट किया गया है कि सरकार और पुलिस ने क़ानून के मुताबिक़ कार्रवाई की है और उनके ख़िलाफ़ अदालत की अवमानना का मामला नहीं बनता."
यह मामला कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान मध्य दिल्ली में इंटरनेट बंद किए जाने से जुड़ा है.
इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई को लेकर अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने कहा कि अदालत परिसर पहुंचने पर उन्हें समाचार चैनलों और अखबारों से पता चला कि सरकार पहले ही हलफ़नामा दाख़िल कर बिना शर्त माफ़ी मांग चुकी है और कोर्ट से कुछ निर्देश देने की मांग की है.
उन्होंने बताया कि सुनवाई के दौरान आइटम नंबर 22 पर सुनवाई शुरू होने पर अदालत में काफ़ी हलचल हुई. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आइटम नंबर 23 और उससे जुड़े मामलों में नोटिस जारी किए.