पहले पिता समुद्र में लापता हो गए, अब बेटे की मौत, गुजरात के एक जहाज़ पर ड्रोन हमले में क्या हुआ?

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- Author, गोपाल कटेशिया
- पदनाम, बीबीसी गुजराती संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 8 मिनट
जिस दिन अमेरिका ने ईरान के क़ेशम द्वीप पर हमला किया, उसी दिन दुबई के पास हमरिया बंदरगाह से पोरबंदर ख़जूर ले जा रहे एक जहाज़ पर होर्मुज स्ट्रेट में हमला हुआ और गुजरात के एक नाविक की मौत हो गई.
ओमान के तटरक्षक बल ने हमले में फंसे 13 अन्य नाविकों को बचाया.
अल जुसुफी नामक यह जहाज गुजरात के देवभूमि द्वारका स्थित सलाया बंदरगाह से था और इसके सभी चालक दल के सदस्य भी सलाया से ही थे.
हमले में मारे गए नाविक की पहचान नईम अजीज गांधार के रूप में हुई है. इससे पहले भी गंधार परिवार पर ऐसा ही दुख आ चुका था.
पहले भी, गांधार परिवार के एक अन्य सदस्य की जहाज़ पर काम करते समय समुद्र में मृत्यु हो गई थी. अब, 22 वर्षीय नईम की समुद्र में हुई मौत ने उनके परिवार को सदमे में डाल दिया है.
इस साल 28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हवाई हमलों के बाद युद्ध छिड़ने के बाद से होर्मुज़ स्ट्रेट में किसी भारतीय जहाज़ पर हमले की यह चौथी घटना थी.
इस तरह के हमले में मरने वाला गुजरात का दूसरा नाविक नईम है.
जहाज मालिकों का कहना है कि भारतीय सरकार द्वारा सुझाए गए सभी एहतियाती उपायों को अपनाने के बावजूद, उनके जहाज़ों पर हमले हो रहे हैं.
भारतीय सरकार ने अल जुसुफी पर हुए हमले की निंदा की है और कहा है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में कमर्शियल जहाज़ों पर हमले चिंता का विषय हैं.
क्या है पूरी घटना
अल जुसुफी नामक जहाज़ सलाया के जुसाब अमद सुम्भानिया के स्वामित्व में था. सुम्भानिया परिवार कई वर्षों से शिपिंग कारोबार में है और जुसाब के बड़े भाई अकबरभाई सुम्भानिया के पास भी अल फ़ातेम नाम का एक जहाज़ है.
अकबरभाई ने बुधवार को बीबीसी से बात करते हुए कहा कि अल जुसुफी नामक जहाज़ 31 अक्तूबर को दुबई के हमरिया बंदरगाह से पोरबंदर के लिए रवाना हुआ था.
आगे अकबरभाई बीबीसी को बताते हैं, "उसी दिन, अल फ़तेह जहाज़ दुबई बंदरगाह से भोजन सहित सामान्य माल से लदा हुआ सोमालिया के लिए रवाना हुआ. ये दोनों जहाज़ एक साथ रवाना हुए थे लेकिन उस समय मुझे होर्मुज़ का माहौल अच्छा नहीं लगा इसलिए, हमने अल जुसुफी को ओमान के खासब बंदरगाह पर रुकने का निर्देश दिया."
"वह एक दिन के लिए खासब बंदरगाह पर रुका. हमारा दूसरे जहाज़ ने सोमालिया की ओर अपनी यात्रा जारी रखी और होर्मुज़ स्ट्रेट से सुरक्षित रूप से गुजर गया."

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अकबरभाई बीबीसी से बातचीत में बताते हैं, "फिर अगले दिन, अल जुसुफी भी खासब बंदरगाह से रवाना होकर पोरबंदर की ओर बढ़ा, लेकिन जब वह ओमान के लीमा बंदरगाह के पास पहुंचा, तो उस पर ड्रोन से हमला किया गया."
खासब बंदरगाह होर्मुज़ स्ट्रेट में ओमान के तट पर स्थित एक छोटा बंदरगाह है.
अकबरभाई ने कहा, "यह हमला भारतीय समयानुसार शाम करीब 4.45 बजे हुआ".
उन्होंने ये भी बताया, "जब हमला हुआ, तब अल जुसुफी का ट्रांसपॉन्डर चालू था और उस पर तिरंगा फहरा रहा था. इसलिए, आसपास के सभी जहाज़ उसकी पहचान संबंधी जानकारी, उसके चालक दल के सदस्यों की जानकारी, उस पर लदे माल आदि को देख सकते थे."
"मैं अपने फ़ोन पर इसकी निगरानी कर रहा था और सोमवार को भारतीय समयानुसार शाम 4.30 बजे तक सब कुछ सामान्य लग रहा था. लेकिन शाम 4.45 बजे मुझे अल जुसुफी के कप्तान सलीम अब्दुल सुम्भानिया का फ़ोन आया कि उन पर ड्रोन से हमला हुआ है और जहाज़ में आग लग गई है. उन्होंने मुझे यह भी बताया कि सभी नाविकों ने जहाज़ छोड़ दिया था और जीवनरक्षक नौकाओं में सवार हो गए थे."
खजूर से लदा जहाज़ डूबा

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52 वर्षीय अकबरभाई ने कहा, "अल जुसुफी होर्मुज़ स्ट्रेट के मुहाने से निकल रहा था, तभी उस पर विपरीत दिशा से, ओमान की खाड़ी से हमला किया गया. ड्रोन सीधे आया और हमारे जहाज़ के केबिन से टकरा गया."
अकबरभाई ने आगे कहा, "ओमान का यह तट ईरान से काफ़ी दूर है और ईरानी जहाज़ भी इस क्षेत्र से गुजरते हैं लेकिन इस क्षेत्र के पास अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत भी मौजूद हैं और उनके हेलीकॉप्टर भी इस क्षेत्र में उड़ान भरते रहते हैं."
उन्होंने कहा, "अल जुसुफी जहाज़ पर 950 टन यानी 95 हजार किलोग्राम खजूर लदे हुए थे. लेकिन हमले के बाद जहाज़ में आग लग गई और सारा माल नष्ट हो गया."
अकबरभाई ने कहा, "आस-पास कोई अन्य जहाज़ या अग्निशमन की सुविधा न होने के कारण, अल जुसुफी पर लगी आग को बुझाया नहीं जा सका और अंततः जहाज़ जलकर समुद्र में डूब गया."
अकबरभाई ने बताया कि सूचना मिलने पर ओमान तटरक्षक बल के अधिकारी आधे घंटे के भीतर वहां पहुंच गए और नाविकों को बचाकर पास के किनारे पर ले गए.
उन्होंने बताया कि 'अस्पताल ले जाते समय नईम की मौत हो गई.'
उन्होंने आगे कहा, "भारतीय सरकार द्वारा बताए गए सभी एहतियाती उपायों को अपनाने के बावजूद, गुजरात में शिपिंग कारोबार से जुड़े लोग चिंतित हैं क्योंकि भारतीय जहाज़ों पर हमले जारी हैं".
अकबरभाई ने कहा, "मैंने 14 साल की उम्र से अपने पिता के साथ जहाज़ चलाना शुरू किया था और 25 साल तक जहाज़ के कप्तान के रूप में भी काम किया है. लेकिन मैंने अपने जीवन में ऐसा माहौल कभी नहीं देखा."
22 साल पहले पिता हो गए थे समंदर में लापता

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नईम के चचेरे भाई इरफान गंधार ने बीबीसी को बताया, "नईम मछली पकड़ने के उद्योग में काम करते थे. उनेका बड़ा भाई निज़ाम भी एक मछली पकड़ने वाली नाव पर नाविक के रूप में काम करते हैं. निज़ाम और नईम अविवाहित थे."
बीबीसी से बात करते हुए इरफ़ान ने कहा, "नईम चार बहनों और दो भाइयों में सबसे छोटा था. नईम के पिता अजीजभाई का 22 साल पहले देहांत हो गया था. नईम ने दो-तीन साल पहले मछली पकड़ने का काम छोड़ दिया और एक जहाज पर नाविक के रूप में काम करना शुरू कर दिया क्योंकि मछली पकड़ने की तुलना में वेतन अधिक है."
अकबरभाई ने कहा, "नईम इस साल मई में अल जुसुफी में नाविक के रूप में शामिल हुए थे. यह पहली बार था जब वह हमारे जहाज़ पर आए थे. अल जुसुफी पर हमले के समय नईम ही जहाज़ चला रहे थे. में उनके बाएं पैर और बाएं हाथ में चोटें आई"
इरफ़ान गंधार बताते हैं, "जब नईम के बचपन में ही पिता अजीजभाई की भी समुद्र में एक जहाज़ पर काम करते समय मृत्यु हो गई थी."
उन्होंने कहा, "22 साल पहले, अजीजभाई और लगभग सत्तर अन्य नाविक भेड़ और बकरियों से लदे एक जहाज़ में कच्छ के टूना बंदरगाह से दुबई के लिए रवाना हुए थे. लेकिन उनका जहाज़ तूफ़ान में खो गया, और तब से अजीजभाई या अन्य नाविकों या जहाज़ का कोई पता नहीं चला है."
अकबरभाई ने कहा, "नईम का शव फिलहाल खासब के एक अस्पताल में रखा गया है, जबकि बाकी बचे 13 चालक दल के सदस्यों को भारत वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं."
अपने पति और छोटे बेटे को खोने के बाद नईम की मां, ज़रीना, गहरे सदमे में हैं और लगातार रोती रहती हैं.
इरफ़ान ने कहा, "मां शायद फिर कभी अपने जवान बेटे का चेहरा न देख पाए."
इरफ़ान ने बताया, "अगर हम शव को ओमान से लाते हैं, तो इसमें और दिन लगेंगे. मेरे पिता अमदभाई और परिवार के अन्य सदस्यों ने मेरी चाची को समझाया कि शव को और दिनों तक नहीं रखा जाना चाहिए."
"मेरी चाची नईम को ओमान में दफ़नाने के लिए सहमत हो गई हैं. नईम के साथी नाविक उनका अंतिम संस्कार करने के बाद भारत लौट आएंगे."
गुजरात के कितने जहाज़ों पर हमला हुआ

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भारत में पारंपरिक नौकाओं के मालिकों के लिए इंडियन सेलिंग वेसल्स एसोसिएशन (एसवीआईए) नामक एक संगठन है.
इस संगठन के महासचिव एडम भाया ने बीबीसी को बताया कि वर्तमान में गुजरात में 270 जहाज़ और भारत में लगभग 450 जहाज़ कार्यरत हैं.
उन्होंने कहा कि अल जुसुफी इस साल मई से होर्मुज़ स्ट्रेट में हमला झेलने वाला गुजरात का चौथा जहाज़ है.
आदम भाया ने कहा कि इससे पहले 8 मई को अल फ़ैज़ नूर-ए-सुलेमानी पर हुए हमले में अल्ताफ़ खेर नाम का 42 वर्षीय नाविक मारा गया, जबकि चार अन्य नाविक घायल हो गए.
फिर 13 मई को हाजी अली नामक एक जहाज़ पर हमला हुआ और वह डूब गया. उसके 14 नाविकों को बचा लिया गया लेकिन जहाज़ पर सवार 1800 भेड़ और बकरियां मर गईं.
लगभग छह महीने की शांति के बाद, 29 अक्तूबर को कच्छ के मांडवी बंदरगाह से क्यूबा नामक एक जहाज़ पर होर्मुज़ स्ट्रेट में हमला किया गया.
इस साल लाल सागर में एक या दो भारतीय जहाज़ों पर भी हमले हुए हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका, इसराइल और ईरान के बीच युद्ध छिड़ने के बाद विभिन्न जहाज़ों और नौकाओं पर हुए हमलों में कुल 14 भारतीय नाविक मारे गए हैं.
बीबीसी से बात करते हुए आदम भाया ने कहा, "गुजरात से आने वाले जहाज़ भारतीय सरकार द्वारा सुरक्षा के लिए जारी किए गए दिशानिर्देशों का सख़्ती से पालन कर रहे हैं. इन दिशानिर्देशों के अनुसार, गुजरात से आने वाले जहाज़ केवल दिन के समय होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरते हैं और अपने ट्रांसपोंडर चालू रखते हैं."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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