सूचना आयोगों में लंबित मामलों का अंबार, रिपोर्ट में दावा- कुछ राज्यों में फैसले के लिए 15 साल से ज़्यादा का इंतज़ार

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सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून लागू होने के 21 साल पूरे होने के मौके पर जारी एक नई रिपोर्ट में देश के सूचना आयोगों की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर चिंताएं जताई गई हैं.
सतर्क नागरिक संगठन की ओर से तैयार ‘रिपोर्ट कार्ड ऑन द परफॉर्मेंस ऑफ इन्फॉर्मेशन कमिशन्स इन इंडिया 2025-26’ के अनुसार, देशभर के सूचना आयोगों में करीब चार लाख मामले लंबित हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक़, 14 सूचना आयोगों में किसी मामले के निपटारे के लिए अनुमानित प्रतीक्षा अवधि एक साल से अधिक है. इनमें से तीन आयोग ऐसे हैं, जहां मौजूदा लंबित मामलों के आधार पर किसी अपील या शिकायत के निपटारे में 15 साल से भी अधिक समय लग सकता है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि 12 अक्तूबर को भारत में आरटीआई कानून लागू होने के 21 साल पूरे हुए. इस दौरान यह कानून नागरिकों को सरकारी सूचनाएं हासिल करने और सार्वजनिक संस्थाओं की जवाबदेही तय करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना है.
रिपोर्ट में यह भी ज़िक्र है कि हाल के वर्षों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) जैसे मुद्दों पर जानकारी हासिल करने के लिए भी आरटीआई का इस्तेमाल किया गया है.
















