छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद ख़त्म होने के सरकार के दावे के बाद राज्य सरकार ने जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा चरणबद्ध तरीक़े से कम करने का अंतिम फ़ैसला किया है.
राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि इस पर अंतिम निर्णय हो चुका है और चरणबद्ध तरीक़े से सुरक्षा कम की जाएगी.
इस फ़ैसले के बाद कांग्रेस ने चिंता जताते हुए जल्दबाज़ी न करने की बात कही है.
बस्तर समेत दूसरे इलाक़ों में माओवादी हिंसा को देखते हुए सरपंच से लेकर सांसद और राजनीतिक दलों से जुड़े क़रीब 400 नेताओं को विशेष सुरक्षा मिली है, जिसमें कम से कम 1500 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं.
इनमें लगभग 55 नेताओं को ज़ेड और ज़ेड प्लस, 90 को वाई और वाई प्लस, 165 को एक्स और 90 को एक्स-2 श्रेणी की सुरक्षा दी गई है.
सुरक्षा व्यवस्था को धीरे-धीरे ख़त्म करने की बात कहते हुए राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा, "31 मार्च 2026 की डेडलाइन तय करके एक इंसर्जेंसी समाप्त की गई. समाप्त होने के तुरंत बाद आप सुरक्षा हटा लें, ये न्यायोचित नहीं है. 6 महीने देखा गया. उसी व्यवस्था में सब चले हैं. अब 6 महीने के बाद पूरा हटा देंगे, ये भी संभव नहीं है."
गृह मंत्री ने आगे बताया, "जो ज़ेड प्लस थे, वो ज़ेड हुए हैं. जो ज़ेड थे, वो वाई प्लस हुए हैं. जो वाई प्लस थे, वो वाई हुए हैं. ऐसे सबका एक ग्रेड कम किया गया है. आने वाले समय में फिर एक ग्रेड कम करेंगे. इस तरह से ग्रेजुअली उसे समाप्त करेंगे."
दूसरी तरफ़, बस्तर के आदिवासी नेता और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने दावा किया कि नक्सलवाद पूरी तरह ख़त्म नहीं हुआ है और कुछ नक्सली दबाव के कारण दूसरे राज्यों में चले गए हैं.
उन्होंने कहा कि सुरक्षा घटाने से पहले दोबारा आकलन होना चाहिए और अगर सुरक्षा कम की जा रही है, तो सरकार को जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी भी लेनी चाहिए.