कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 72 लाख मतदाता घट गए हैं. इस प्रक्रिया को लेकर विवाद भी हुआ था.
एसआईआर के बाद राज्य में मतदाताओं की कुल संख्या 5 करोड़ 54 लाख 32 हज़ार 314 से घटकर 4 करोड़ 55 लाख 11 रह गई है.
महिला मतदाताओं की संख्या 2 करोड़ 29 लाख 12 हज़ार 355 रही, जो पुरुष मतदाताओं से 3 लाख 30 हज़ार 956 अधिक है. पुरुष मतदाताओं की संख्या 2 करोड़ 25 लाख 83 हज़ार 107 रही, जबकि अन्य श्रेणी के मतदाताओं की संख्या 2 हज़ार 841 है.
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) वी. अंबुकुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "मतदाता सूची को अपडेट करना एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है. 18 साल की उम्र पूरी कर चुका कोई भी व्यक्ति मतदाता के तौर पर अपना नाम दर्ज कराने के लिए फॉर्म 6 भरकर आवेदन कर सकता है. अगर कोई व्यक्ति दूसरी जगह मतदाता के तौर पर दर्ज है या नए पते पर चला गया है, तो नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 भरा जा सकता है. नाम में सुधार आदि के लिए फॉर्म 8 भरा जा सकता है."
मतदाता सूची के इस बड़े पुनरीक्षण की प्रक्रिया 16 जून को शुरू हुई थी. इसके तहत 5.54 करोड़ फॉर्म बांटे गए थे.
जिन मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके, मृत, दो जगह नाम वाले और अन्य श्रेणियों में रखा गया था और जिनके नाम सूची में शामिल नहीं थे, उनकी कुल संख्या 1 करोड़ 7 लाख 96 हज़ार 339 थी.
इन 1.07 करोड़ लोगों में से 65 लाख 45 हज़ार 679 को दूसरी जगह जा चुका बताया गया था. वहीं, 19 लाख 926 मतदाता अनुपस्थित थे, 16 लाख 39 हज़ार 864 को मृत बताया गया था और 7 लाख 9 हज़ार 870 के नाम मतदाता सूची में दो बार दर्ज थे.
हालांकि, 24 अगस्त के बाद शुरू हुई दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया के दौरान निर्वाचन अधिकारियों ने 10 लाख 8 हज़ार 38 नए मतदाताओं के नाम जोड़ने की पुष्टि की. इससे इन श्रेणियों में रखे गए 1.07 करोड़ लोगों की संख्या घटकर करीब 98 लाख रह गई.
वेरिफिकेशन प्रोसेस में करीब 16 लाख लोगों को मृत, सात लाख को दो जगह वोटर लिस्ट में नाम वाला पाया गया, जबकि अन्य श्रेणी में करीब तीन लाख लोग थे.
अंबुकुमार ने कहा, "कुल मिलाकर, मतदाता सूची से हटाए गए लोगों की संख्या घटकर करीब 72 लाख रह गई है."
सामान्य मतदाताओं में 18 से 19 साल की उम्र के मतदाताओं की संख्या 6 लाख 83 हज़ार 364 रही. इनमें 3 लाख 64 हज़ार 551 पुरुष और 3 लाख 18 हज़ार 795 महिलाएं थीं.
20 से 29 साल की उम्र के मतदाताओं की संख्या 86 लाख 56 हज़ार 836 रही. इस आयु वर्ग में भी पुरुष मतदाताओं की संख्या महिलाओं से अधिक थी. पुरुष मतदाताओं की संख्या 45 लाख 8 हज़ार 240 और महिला मतदाताओं की संख्या 41 लाख 47 हज़ार 863 थी.
राज्य में सबसे ज़्यादा मतदाता 30 से 39 साल के आयु वर्ग में हैं. इस वर्ग में कुल एक करोड़ 2 लाख 57 हज़ार 680 मतदाता हैं. यहां पुरुष मतदाताओं की संख्या महिलाओं से करीब 35 लाख अधिक रही.
40 से 49 साल के आयु वर्ग में कुल 94 लाख 17 हज़ार 853 मतदाता थे. इस वर्ग में महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक रही. इसके बाद 50 से 59 साल के आयु वर्ग का नंबर आता है, जिसमें कुल 76 लाख 15 हज़ार 826 मतदाता हैं. इस आयु वर्ग में भी महिलाओं की संख्या पुरुषों से करीब दो लाख अधिक रही.
85 साल या उससे अधिक उम्र के मतदाताओं की संख्या 3 लाख 92 हज़ार 134 थी. इनमें 2 लाख 29 हज़ार 609 महिलाएं और 1 लाख 62 हज़ार 522 पुरुष थे.
एक अधिकारी के मुताबिक, मतदाताओं की गणना के दौरान यूरोप, कनाडा और अमेरिका समेत कई देशों से संबंध रखने वाले करीब एक हज़ार मतदाताओं की पहचान हुई. इनमें एक पाकिस्तानी नागरिक भी था.
हालांकि, इनमें से ज़्यादातर भारतीय मूल के लोग थे, जिन्होंने इन देशों की नागरिकता ले ली थी, लेकिन अपने परिवारों के साथ कर्नाटक में बस गए थे.